लखनऊ। गुजरात में समान नागरिक संहिता को लेकर सियासी और सामाजिक बहस के बीच अब इसका विरोध भी तेज होता नजर आ रहा है। मुस्लिम जमात के कई संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है।
इस बीच मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरैली ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता शरीयत कानून में सीधा हस्तक्षेप है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि देश में विभिन्न धर्मों और समुदायों की अपनी-अपनी परंपराएं और कानून हैं, ऐसे में एक समान कानून लागू करना धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
मौलाना ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और यदि आवश्यक हुआ तो विरोध को और तेज किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर सभी पक्षों से संवाद कर सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर जहां सरकार इसे समानता और न्याय का कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठन इसे धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप मानते हुए विरोध कर रहे हैं। आने वाले समय में यह विषय और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।


