नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया है। यह पत्र लोकसभा अध्यक्ष को हटाने संबंधी अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले सप्ताह लोकसभा में हुई विस्तृत चर्चा और उसके खारिज होने के बाद लिखा गया है।
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान धैर्य और निष्पक्षता की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दिखाए गए धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही ने एक नई राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का केंद्र है, जहां देश के हर क्षेत्र और वर्ग की आवाज को सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ लोग परिवारवादी और सामंती सोच के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को सीमित दायरे में रखना चाहते हैं और नए नेतृत्व को स्वीकार करने में संकोच करते हैं। प्रधानमंत्री के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह पत्र भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।
ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहे हों या वर्तमान में प्रधानमंत्री के रूप में, लोकसेवा के उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाया है।
सांसदों के आचरण पर जताई चिंता
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा में सभी दलों के नेताओं को भी एक पत्र भेजा।


