वीजिंग। चीन के मार्केट रेगुलेटर ने ऑटो उद्योग में बढ़ती कीमत जंग पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नए नियमों के तहत अब कोई भी ऑटो कंपनी अपनी कारों को कुल उत्पादन लागत से कम कीमत पर नहीं बेच सकेगी। इस कुल लागत में निर्माण खर्च के साथ-साथ प्रशासनिक, वित्तीय और बिक्री से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे। इसका उद्देश्य कंपनियों के बीच होड़ में हो रही ‘घाटे की बिक्री’ को रोकना है।
रेगुलेटर ने प्राइस-फिक्सिंग पर भी सख्त रोक लगा दी है। कंपनियां अब डीलर्स को भारी रीबेट या इंसेंटिव देकर कम कीमत पर गाड़ियां बेचने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगी। माना जा रहा है कि यह कदम बाजार में स्थिरता लाने और छोटे खिलाड़ियों को आक्रामक मूल्य कटौती से बचाने के लिए उठाया गया है।
इस फैसले से Tata Motors को अपनी लग्जरी यूनिट Jaguar Land Rover (JLR) के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ तिमाहियों में चीन की तीखी कीमत जंग ने जेएलआर के मार्जिन और बिक्री पर दबाव डाला था। घरेलू कंपनियों की आक्रामक रणनीति के कारण वैश्विक ब्रांड्स को भी कीमतें घटानी पड़ीं।
चीन में BYD, Geely और Tesla जैसी कंपनियों ने कम कीमत और उन्नत तकनीक के दम पर बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है। इससे प्रीमियम सेगमेंट में भी प्रतिस्पर्धा तेज हुई और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की लाभप्रदता प्रभावित हुई।
दबाव सिर्फ जेएलआर तक सीमित नहीं रहा। Mercedes-Benz ने कोविड के बाद अपना सबसे कम वार्षिक मुनाफा दर्ज किया। 2025 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 5.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 49 प्रतिशत कम है। चीन में उसकी बिक्री 19 प्रतिशत गिरकर 2016 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई।
जेएलआर को चीन में कमजोर उपभोक्ता खर्च, कड़े क्रेडिट हालात और डीलर्स की वित्तीय तंगी का सामना करना पड़ा। कंपनी पहले ही कह चुकी है कि बैंकिंग क्रेडिट सिकुड़ने और रिटेलर दिवालिया होने से मांग पर असर पड़ा है। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि प्रतिस्पर्धी स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और अन्य बाजारों—खासतौर पर अमेरिका—से बेहतर ग्रोथ देखने को मिल रही है।
चुनौतियों के बावजूद टाटा मोटर्स भविष्य की रणनीति पर दांव लगाए हुए है। जगुआर की नई ऑल-इलेक्ट्रिक फोर-डोर GT के प्रोटोटाइप आर्कटिक सर्कल में विंटर टेस्टिंग से गुजर रहे हैं। यह जगुआर के सबसे व्यापक ग्लोबल वैलिडेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसमें 150 प्रोटोटाइप अलग-अलग परिस्थितियों में परखे जा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह नया मूल्य नियंत्रण कदम बाजार में मार्जिन स्थिरता ला सकता है। यदि कीमत जंग पर प्रभावी नियंत्रण होता है, तो प्रीमियम ब्रांड्स को राहत मिल सकती है और आने वाली तिमाहियों में लाभप्रदता में सुधार देखने को मिल सकता है।


