तेल अवीव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस्राइल पर अब कई दिशाओं से हमले हो रहे हैं, जिससे उसकी सुरक्षा स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। ताजा घटनाक्रम में यमन की ओर से मिसाइल हमला होने की खबर ने हालात और गंभीर कर दिए हैं।
इससे पहले इस्राइल को ईरान, हिजबुल्ला और हमास की ओर से लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा था। अब यमन के हूती विद्रोहियों के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे संघर्ष का दायरा और बढ़ गया है।
इस्राइली सेना के अनुसार, शनिवार सुबह यमन की दिशा से एक मिसाइल दागी गई, जिसके बाद कई इलाकों में सायरन बजने लगे। खासतौर पर बीयर शेबा और परमाणु अनुसंधान केंद्र के आसपास अलर्ट जारी किया गया।
हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान समर्थित माना जाता है, लंबे समय से यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। उनके हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि वे इस संघर्ष में खुलकर शामिल हो सकते हैं।
हूती प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान पर हमले जारी रहे तो वे सीधे सैन्य कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी “उंगलियां ट्रिगर पर हैं”, जो इस बात का संकेत है कि स्थिति और बिगड़ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि इस्राइल अब चारों तरफ से दबाव में है। उत्तर में लेबनान से हिजबुल्ला, दक्षिण में गाजा से हमास, पूर्व से ईरान और अब दक्षिण-पश्चिम दिशा से यमन—ये सभी मिलकर सुरक्षा चुनौती को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
इस बीच, इस्राइल ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। उसने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं, जिनमें सऊदी अरब के एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया। इस हमले में अमेरिकी सैनिकों के घायल होने और सैन्य उपकरणों के नुकसान की भी खबर है।
इस संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है।
हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने पहले ही शिपिंग और तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। ऐसे में ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बीच इस्राइल और सऊदी अरब के बीच संबंध सामान्य करने की बात दोहराई है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह प्रयास मुश्किल नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह अलग-अलग देशों और संगठनों की इस संघर्ष में एंट्री हो रही है, उससे यह खतरा बढ़ गया है कि यह जंग पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकती है।
मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील और अस्थिर बनी हुई है। अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष और ज्यादा व्यापक और खतरनाक रूप ले सकता है।


