एटा। जनपद में अवैध रूप से संचालित कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सख्ती के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। विभाग द्वारा लगातार पंजीकरण कराने के निर्देश और छापामार कार्रवाई किए जाने के बाद भी अब तक केवल 50 कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों ने ही पंजीकरण कराया है, जबकि जिले में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार, जनपद में करीब 80 से 100 कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे हैं। इन संस्थानों में छात्रों को पढ़ाई की सुविधाएं तो दी जा रही हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर सुरक्षा, संसाधन और मानकों का अभाव है, जो विद्यार्थियों के भविष्य और सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी पंजीकरण से जुड़े लिपिक प्रदीप कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा गठित टीमों ने अलीगंज, जैथरा, सकीट, मिरहची, मारहरा, निधौलीकलां, जलेसर और अवागढ़ क्षेत्रों में छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 65 से 70 कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों को चिन्हित कर उन्हें मार्च माह तक हर हाल में पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, विभागीय प्रयासों के बावजूद केवल 50 संचालकों ने ही अब तक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की है। बाकी संचालक अभी भी नियमों की अनदेखी करते हुए अपने संस्थान संचालित कर रहे हैं, जिससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिन कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनके खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है, और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जाएगा और आवश्यकतानुसार सीलिंग व अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना भी है।
फिलहाल, विभाग की इस कार्रवाई से कोचिंग सेंटर संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं अभिभावकों ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे छात्रों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।


