रांची: झारखंड के बिरसा मुंडा जेल (Birsa Munda Central Jail) में 1 करोड़ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस (Prashant Bose) की मौत हो गई। प्रशांत बोस प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का टॉप लीडर और थिंक टैंक रह चुका था। वो पोलित ब्यूरो सदस्य भी रहा था. उसे किशन दा के नाम से भी जाना जाता था। प्रशांत बोस ने शुक्रवार की सुबह करीब 4 बजे रांची स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में अंतिम सांस ली। मौत के बाद जेल प्रशासन ने उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए रांची के रिम्स अस्पताल भेज दिया है।
भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और 1 करोड़ के इनामी प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की रांची जेल में मौत हो गई है। प्रशांत बोस संगठन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल था। नक्सली संगठन में किशन दा के नाम से पहचान रखने वाला बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। उसने कई वर्षों तक संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व किया और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई। उसका शुरुआती जुड़ाव माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) से था, जहां वो प्रमुख पद पर रहा।
प्रशांत बोस संगठन के शीर्ष नेताओं में शामिल था और उसे महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वे भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाता रहा। करीब 75 वर्ष से अधिक उम्र के बोस लंबे समय से जेल में बंद था। उनकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि वो संगठन के महत्वपूर्ण और रणनीतिक थिंक टैंक नेता माना जाता था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, 1 करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा पर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों में भूमिका रही थी। प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वर्ष 2004 में जब एमसीसीआई और पीपुल्स वार ग्रुप का विलय हुआ और भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तब उसे नए संगठन के पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया।


