लखनऊ।राजधानी एक बार फिर प्रदूषण की गंभीर चपेट में है और हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था आईक्यू एयर की ताजा रिपोर्ट में लखनऊ को दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है, जिसने प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 259 शहरों की सूची में लखनऊ की रैंक 34वीं है, जो यह दर्शाती है कि देश के भीतर भी राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है। खास बात यह है कि वैश्विक स्तर पर प्रदूषण के मामले में भारत के कई शहर शीर्ष सूची में बने हुए हैं, जिससे देश की पर्यावरणीय स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भारत के 64 शहर शामिल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के भी 11 शहर दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण अब केवल महानगरों की समस्या नहीं रहा, बल्कि छोटे और मध्यम शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्य, धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम की स्थिति प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। सर्दियों या बदलते मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही ठहर जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता प्रदूषण सांस और हृदय रोगों के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि प्रशासन ठोस कदम उठाए और आम लोग भी जागरूक होकर प्रदूषण कम करने में अपनी भागीदारी निभाएं, वरना आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।


