लखनऊ। उत्तर प्रदेश की आशा वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एकत्र हुईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज बुलंद की।
इस प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों आशा वर्कर्स शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया गया और न ही उचित मानदेय मिल रहा है।
5 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
आशा वर्कर्स ने सरकार के सामने अपनी 5 सूत्रीय प्रमुख रखी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कोरोना काल से लेकर अब तक उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले।
आशा वर्कर्स ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार भी किया जा सकता है।
प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया। किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
आशा वर्कर्स ने कहा कि यदि उनकी अनदेखी जारी रही, तो इसका सीधा असर ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, क्योंकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

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