फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशा सखियों का अपनी लंबित मांगों को लेकर चल रहा धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को भी पूरे जोर-शोर के साथ जारी रहा। लगातार कई दिनों से धरना दे रहीं आशा सखियों ने शुक्रवार को विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए धरना स्थल पर ही चाय बनाकर अपना आक्रोश जताया। प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में आशा और आशा संगिनी मौजूद रहीं, जिन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरना स्थल पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) भी पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। सीएमओ ने आशा सखियों से कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लखनऊ जाकर धरना दें, क्योंकि निर्णय वहीं से संभव है। सीएमओ की इस बात पर आशा सखियां आक्रोशित हो गईं और धरना स्थल पर जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आशा सखियों ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रही हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि वर्ष 2025 के कई माह से बकाया आधार प्रोत्साहन राशि, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति राशि तथा विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में किए गए कार्यों का भुगतान तत्काल किया जाए। साथ ही 30 अक्टूबर तक वर्षों से लंबित सभी प्रोत्साहन राशियों की अदायगी सुनिश्चित की जाए।

आशा वर्कर्स यूनियन ने यह भी मांग उठाई कि आशा और आशा संगिनी को मानदेय स्वयंसेवक के बजाय 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाए। प्रोत्साहन राशि की जगह न्यूनतम वेतन लागू किया जाए। इसके साथ ही आशा व आशा संगिनी को ईपीएफ और ईएसआई का सदस्य बनाया जाए तथा सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा लागू करने की मांग भी उठाई। आशा सखियों का कहना है कि एक ही दिन में कई-कई प्रकार के कार्य कराए जाते हैं, लेकिन उसके अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता, जिससे बड़ी संख्या में आशा कर्मी मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रही हैं। उन्होंने बेहतर कार्यदशा उपलब्ध कराने, कार्य की सीमा तय करने और जीवन निर्वाह लायक मानदेय देने की मांग की।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया जाता, तब तक आशा कर्मियों को 21 हजार रुपये तथा आशा संगिनी को 28 हजार रुपये मासिक आधारभूत मानदेय दिया जाए। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना से जुड़े बुनियादी कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशि का निर्धारण कर नियमित और पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जाए।
धरना-प्रदर्शन में कविता देवी, पूजा मिश्रा, रीता देवी, प्रसन्न देवी, नीलम, दुर्गेश, नंदिनी, मीना यादव, कामिनी मौर्य, ऋषि राजपूत, अनीता देवी, सरस्वती देवी, रणजीत बिहार, अरुणा देवी, सुनीता सोनी, अरुण वर्मा, रमाकांत, मीना यादव, रुचि राजपूत सहित बड़ी संख्या में आशा और आशा संगिनी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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