वेटिकन/रोम। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच पोप लियो 14वें ने शांति की जोरदार अपील की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईस्टर से पहले यह युद्ध समाप्त हो सकता है, बशर्ते सभी पक्ष हिंसा कम करने की दिशा में कदम उठाएं।
पोप लियो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं और दुनिया को नफरत और खूनखराबे से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बमबारी और हिंसा को रोकने का रास्ता तुरंत खोजा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि डोनाल्ड ट्रंप भी इस युद्ध को समाप्त करने की इच्छा जता चुके हैं। पोप ने उम्मीद जताई कि यह प्रयास वास्तविक शांति की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पोप ने कहा कि अगर वैश्विक नेता गंभीरता से पहल करें, तो संघर्ष को जल्दी खत्म किया जा सकता है। उन्होंने इस संकट को केवल सैन्य नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी बताया।
उन्होंने विशेष रूप से निर्दोष नागरिकों, खासकर बच्चों की मौतों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि किसी भी युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है।
पोप लियो ने सभी देशों के नेताओं से अपील की कि वे टकराव की जगह बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाएं। उन्होंने कहा कि संवाद ही स्थायी शांति का एकमात्र उपाय है।
पाम संडे के अवसर पर उन्होंने पश्चिम एशिया में रहने वाले ईसाइयों के लिए विशेष प्रार्थना भी की और शांति की कामना की।
पोप ने यह भी कहा कि धर्म का इस्तेमाल हिंसा को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जो लोग धर्म के नाम पर युद्ध को उचित ठहराते हैं, वे उसके मूल संदेश के खिलाफ जाते हैं।
उन्होंने चेताया कि दुनिया के कई हिस्सों में धर्म को युद्ध का औजार बनाया जा रहा है, जो मानवता के लिए खतरनाक संकेत है।
इस दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि यह समय आत्ममंथन और शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने का है।
पोप लियो ने कहा कि ईस्टर जैसे पवित्र अवसर का उद्देश्य शांति, करुणा और आत्मचिंतन है, लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सभी पक्ष संयम बरतेंगे और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ेंगे।


