साइबर जालसाज़ों का बड़ा खेल फेल
लखनऊ| साइबर अपराधियों के जाल में फंसे एक पूर्व बैंक अधिकारी की गिरफ्तारी ने प्रशासन की सतर्कता और तकनीकी दक्षता को उजागर कर दिया है। अधिकारी पर आरोप है कि उसने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2.75 करोड़ रुपये की ठगी की, और मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से इस रकम को संगठित तरीके से छिपाने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार, साइबर जालसाज़ों ने इसे 25 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के जरिए नियंत्रित रखा, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
विकास नगर थाने में मामले की शिकायत दर्ज की गई और तत्परता से जांच शुरू कर दी गई। अधिकारी के खिलाफ डिजिटल सबूतों का संकलन किया जा रहा है और साइबर अपराध विशेषज्ञ इस मामले की गहराई में उतरकर सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल और साइबर अपराध अब और अधिक संगठित, जटिल और व्यापक रूप ले चुके हैं, जो न केवल वित्तीय संस्थानों के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं।
प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी, चाहे वह कितना भी परिष्कृत क्यों न हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा में सतर्कता बनाए रखना आज की जरूरत है।




