लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा का कहना है कि प्रदेश में धर्म और जाति के आधार पर अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पक्षपातपूर्ण मंशा साफ झलकती है।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू करने से पहले धर्म और जाति के आधार पर तैनात सभी अधिकारियों को हटाया जाए, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य की 403 विधानसभा क्षेत्रों में अधिकारियों की तैनाती में स्पष्ट रूप से पक्षपात बरता गया है।
सपा ने आरोप लगाया कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर), ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) और एडीएम (चुनाव) की नियुक्तियां भाजपा सरकार की विचारधारा के अनुरूप, जाति और धर्म के आधार पर की गई हैं। पार्टी ने कहा कि जब 1,62,486 मतदान केंद्रों पर 15.44 करोड़ मतदाताओं के नामों का सत्यापन होना है, तो यह जरूरी है कि सभी अधिकारी निष्पक्ष हों।
सपा ने चेताया कि यदि ऐसे ही भेदभावपूर्ण ढंग से प्रक्रिया चली तो भारत निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। ज्ञापन में पार्टी ने यह भी दावा किया कि हाल ही में कानपुर की सीसामऊ और आंबेडकरनगर की कटेहरी विधानसभा उपचुनावों में भी बीएलओ को जाति और धर्म के आधार पर बदला गया था, जिसकी शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सपा नेताओं के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र और राधेश्याम सिंह ने ज्ञापन सौंपते हुए आयोग से मांग की है कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे और अधिकारियों की नियुक्तियों की जांच कर निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करे।





