– पिता-पुत्रों को थाने में बैठाकर प्रताड़ित करने का दावा
यूथ इंडिया | संवाददाता
फतेहपुर। जाफरगंज थाना क्षेत्र के दरौटा लालपुर गांव में एक युवती के अपहरण के मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार ने जाफरगंज पुलिस पर पिता-पुत्रों को थाने में बैठाकर प्रताड़ित करने और पिता को छोड़ने के एवज में 19 हजार रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर परिजन ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
दरौटा लालपुर गांव निवासी रामबाबू रैदास ने एसपी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि 27 जनवरी को वह अपने पुत्र सोनू और सुनील के साथ जाफरगंज थाने पहुंचे थे। वहां पुलिस ने उनके बड़े पुत्र पर गांव की ही एक स्वजातीय युवती को ले जाने का आरोप लगाया और तीनों को थाने में बैठा लिया गया। परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के नाम पर पुलिस ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और रुपये की मांग शुरू कर दी।
रामबाबू का कहना है कि रुपये न देने पर पुलिसकर्मियों ने पूरे परिवार का जीवन बर्बाद करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। 28 जनवरी को पुलिस ने उनके बेटों से रुपये लाने को कहा। मजबूरी में बेटों ने कस्बा जाफरगंज की एक कॉस्मेटिक दुकान से 20 हजार रुपये ऑनलाइन उधार लिए और नकद पुलिस को सौंप दिए।
आरोप है कि रुपये लेने के बाद पुलिस ने पिता रामबाबू को तो छोड़ दिया, लेकिन दोनों बेटों को थाने में ही बैठाए रखा गया। इसी बीच मामले की जानकारी मिलने पर युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष कोमल सिंह ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद कथित तौर पर पुलिस ने लिए गए रुपये वापस किए। पीड़ित परिवार का दावा है कि रामबाबू को चार दिन बाद और उनके पुत्रों को आठ दिन बाद थाने से छोड़ा गया।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि थाने में उनके और उनके बेटों के साथ मारपीट की गई और लगातार दबाव बनाया जाता रहा। घटना के बाद से पूरा परिवार भयभीत है और न्याय की गुहार लगा रहा है।
वहीं, जाफरगंज थानाध्यक्ष धनंजय सरोज ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि युवती को सकुशल बरामद कर लिया गया है और पुलिस ने पूरी कार्रवाई नियमानुसार की है। रिश्वत लेने या मारपीट के आरोप निराधार हैं।


