नई दिल्ली: आज संसद के शीतकालीन सत्र का आठवां दिन है, और इस अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में विशेष चर्चा हुई। लोकसभा में इस ऐतिहासिक गीत के महत्व पर चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जबकि राज्यसभा में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विषय पर चर्चा करेंगे।
आज की कार्यवाही की शुरुआत में राज्यसभा में पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद लोकसभा में प्रश्नकाल संपन्न होने के बाद पीएम मोदी ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के इतिहास में कहीं भी वंदे मातरम जैसा भावपूर्ण गीत नहीं रहा। उन्होंने इसे केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और देशभक्ति की पहचान बताया। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी जमीन के टुकड़े या सत्ता के सिंहासन के लिए नहीं थी, बल्कि यह गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और भारतीय संस्कृति और गौरवपूर्ण इतिहास के पुनर्जन्म के संकल्प की लड़ाई थी।
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारत को कमजोर, निकम्मा और आलसी बताना फैशन बना दिया था। इसी चुनौती के सामने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में लिखे गए ग्रंथ आनंदमठ में वंदे मातरम को शामिल कर देशवासियों को प्रेरित किया। पीएम मोदी ने इसके महत्व को उजागर करते हुए वंदे मातरम की पंक्तियां भी उद्धृत कीं –
“त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदल विहारिणी, वाणी विद्यादायिनी… सुजलां सुफलां मातरम्। वंदे मातरम्!”
पीएम मोदी ने वेदों और भगवान राम के आदर्शों का हवाला देते हुए कहा कि मातृभूमि की सेवा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने स्वतंत्रता आंदोलन में ऊर्जा और साहस भरने का कार्य किया। 150 साल के इस ऐतिहासिक अवसर पर, उन्होंने देशवासियों से अपील की कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस गीत की प्रेरणा का सदुपयोग किया जाए।
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल, भगवान बिरसा मुंडा और गुरु तेगबहादुर के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह कालखंड इतिहास के प्रेरक अध्यायों से भरा हुआ था, और आज इस अवसर पर चर्चा से देश को एकजुट होकर चलने की प्रेरणा मिलेगी।
सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल के गंगा सागर को केंद्र सरकार की योजनाओं में शामिल न करने के सवाल पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक मदद दी, लेकिन राज्य सरकार ने इस पहल में रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने तृणमूल सांसद से सियासत न करने की अपील करते हुए बताया कि प्रस्ताव भेजने की पहल राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।





