लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। विद्या परिषद की बैठक में कई अहम निर्णयों पर मुहर लगी, जिससे शोध और पीएचडी की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
अब संविदा शिक्षक भी पीएचडी कर सकेंगे। यह निर्णय उन शिक्षकों के लिए राहत भरा है जो अब तक नियमित नियुक्ति न होने के कारण शोध से वंचित रह जाते थे।
विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को भी आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिससे अधिक छात्रों को मौका मिल सकेगा और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
बैठक में संशोधित शोध अध्यादेश को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत पीएचडी से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और छात्रहित में बनाया गया है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय में 300 से अधिक पीएचडी सीटें बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है। इससे शोध के अवसरों में वृद्धि होगी और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।
इन फैसलों को विश्वविद्यालय में शोध और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
संविदा शिक्षक भी कर सकेंगे पीएचडी, लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़े बदलाव


