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Monday, March 9, 2026

फर्जी दस्तावेजों से पेट्रोल पंप की हिस्सेदारी हड़पने में पेट्रोल पम्प स्वामी विनोद गंगवार सपत्नी फ़से

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– कोर्ट ने आरोपी दंपति को किया तलब

– जालसाजी के मामले में 13 मार्च को पेश होने के आदेश

– जेल जाना तय

– बिधि विज्ञान प्रयोगशाला में पंच निर्णय में पाए गए विवेक कुमार के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर

फर्रुखाबाद। कायमगंज स्थित गंगवार पेट्रोल पंप की हिस्सेदारी को लेकर कथित जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए पम्प स्वामी विनोद कुमार गंगवार और उनकी पत्नी मुन्नी देवी को तलब किया है।

मामला मैसर्स कायमगंज फिलिंग स्टेशन की साझेदारी से जुड़ा है, जिसमें उनके सगे भाई शिकायतकर्ता विवेक कुमार उर्फ मनोज गंगवार ने आरोप लगाया है कि उनके बड़े भाई विनोद कुमार गंगवार ने विश्वास का दुरुपयोग करते हुए कूटरचित और फर्जी दस्तावेज तैयार कर पेट्रोल पंप की हिस्सेदारी हड़प ली।

शिकायत के अनुसार आवास विकास कॉलोनी स्थित होटल मनकामेश्वर स्वामी विवेक कुमार उर्फ़ मनोज गंगवार पिछले करीब 15 वर्षों से अपने परिवार के साथ कानपुर में रह रहे थे। इसी दौरान उनके विश्वास का फायदा उठाकर फर्म के पुनर्गठन से संबंधित दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा किया गया।

आरोप है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से सांठगांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और पेट्रोल पंप की 32 प्रतिशत हिस्सेदारी विवेक कुमार और अपने पिता स्वर्गीय हरिश्चन्द्र गंगवार 35 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने व अपनी पत्नी मुन्नी देवी के नाम दर्ज करा ली गई।

वर्ष 2017 में सूचना का अधिकार के तहत जब फर्म पुनर्गठन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए गए तो कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। शिकायतकर्ता ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से पत्राचार कर इस पर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर न्यायालय की शरण ली।

मामले में न्यायालय में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके बाद थाना कोतवाली फर्रुखाबाद में एफआईआर संख्या 0423 दर्ज की गई।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का प्रयोग) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद दस्तावेजों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट में हस्ताक्षरों को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।क्योंकि कथित पंच निर्णय में विवेक कुमार उर्फ़ मनोज गंगवार के हस्ताक्षर फ़र्ज़ी पाए गए।

सूत्रों के अनुसार 4 नवंबर 2025 को जांच रिपोर्ट मिलने के बावजूद अदालत में अंतिम आख्या काफी देर से प्रस्तुत की गई, जिस पर भी सवाल उठे।

शिकायतकर्ता विवेक उर्फ़ मनोज गंगवार द्वारा प्रस्तुत आपत्ति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 26 फरवरी 2026 को पुलिस की अंतिम आख्या को निरस्त कर दिया।

इसके साथ ही अदालत ने आरोपी विनोद कुमार गंगवार और उनकी पत्नी मुन्नी देवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत संज्ञान लेते हुए 13 मार्च 2026 को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया है।

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