बदायूं l स्थायी लोक अदालत ने फाइनेंस कंपनी और बैंक के खिलाफ अहम फैसला सुनाया है। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष इशितयाक अली, सदस्य राकेश कुमार रस्तोगी व स्वदेश कुमारी की पीठ ने वादी को 1.15 लाख रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये अधिवक्ता शुल्क भी अदा करने का निर्देश दिया है।
मौसमपुर निवासी जवाहर सिंह ने अदालत में दायर वाद में बताया कि उसने गाय और भैंस खरीदने के लिए एक फाइनेंस कंपनी और बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन लिया था। लोन के साथ पशुओं का बीमा भी कराया गया था। जवाहर सिंह ने कुल 11 गाय और 39 भैंस खरीदी थीं, जिनमें से दो गायों की मृत्यु हो गई थी। इन दोनों गायों की कीमत 1.15 लाख रुपये थी।
वादी का आरोप था कि गायों की मृत्यु के बाद उसने बीमा क्लेम के लिए फाइनेंस कंपनी और बैंक से संपर्क किया, लेकिन दोनों ने बीमा राशि देने से इंकार कर दिया। इसके बाद उसने मजबूर होकर स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्याय की गुहार लगाई।
बैंक की ओर से यह आपत्ति लगाई गई थी कि मृत गायों के कान में टैग नहीं लगे थे, इसलिए बीमा राशि देय नहीं है। वादी ने अदालत को बताया कि उसने कर्मचारियों को बुलाकर टैग सहित फोटो और वीडियोग्राफी कराई थी। इसके बावजूद भी बैंक और बीमा कंपनी भुगतान में टालमटोल करती रहीं।
मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बदायूं और बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक को संयुक्त रूप से भुगतान का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 दिनों के भीतर पूरी धनराशि वादी को दी जाए। फैसले के बाद वादी ने राहत की सांस ली और कहा कि लंबे संघर्ष के बाद उसे न्याय मिल सका है।


