अंतरराष्ट्रीय पहचान के बाद भी इंतजार में विकास
संवाददाता, एटा। अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने के बावजूद एटा जनपद का पटना पक्षी विहार बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। हाल ही में इसे रामसर साइट घोषित किया गया है और पक्षियों की गणना में यह प्रदेश में अव्वल रहा, लेकिन इसके बाद भी यहां पर्यटकों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाई है। मौजूदा समय में यहां आने वाले लोगों में अधिकांश स्थानीय नागरिक ही शामिल हैं, जबकि बाहर से आने वाले पर्यटक न के बराबर हैं।
जलेसर कस्बे से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित पटना पक्षी विहार भौगोलिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यह अलीगढ़ और आगरा जैसे दो मंडल मुख्यालयों के साथ-साथ आधा दर्जन जिला मुख्यालयों से 50 से 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। इसके बावजूद यह स्थल बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित नहीं हो सका है। स्थानीय लोग इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में देखते हैं, लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में परिवार और पर्यटक यहां अधिक समय बिताना पसंद नहीं करते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बच्चों के खेलने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। झील का पानी कई बार साफ नहीं रहता, जिससे दुर्गंध फैलती है। बैठने के लिए व्यवस्थित सिटिंग प्लान का भी अभाव है। झील के किनारे ऊबड़-खाबड़ हैं और जगह-जगह वनस्पति उग आने से सौंदर्य प्रभावित होता है। हालांकि पूर्व में खराब रही सड़क को अब दुरुस्त करा दिया गया है, जिससे पहुंच आसान हुई है, लेकिन अन्य सुविधाओं की कमी अभी भी खलती है।
पटना पक्षी विहार की सबसे बड़ी झील होने के बावजूद यहां नौकायन (बोटिंग) की सुविधा नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि झील में बोटिंग शुरू की जाए और किनारों को बीच जैसा स्वरूप दिया जाए, तो यह बच्चों और पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकता है। सर्दियों के मौसम में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, जो फरवरी मध्य तक रुकते हैं, इसके बाद उनकी विदाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
हाल ही में पक्षी विशेषज्ञ केपी सिंह के नेतृत्व में यहां पक्षियों की गणना की गई, जिसमें नार्दन पिनटेल 1270, कॉमन टील 458, नार्दन शोवलर 432, गेडवाल 369 और कॉमन कूट 295 की संख्या दर्ज की गई। इसके अलावा क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क, कॉमन पोचार्ड, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल सहित नौ संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान भी की गई। इसी गणना के आधार पर 21 जनवरी को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद पटना पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित किया गया, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया है।
आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष में यहां करीब 10 हजार पर्यटक ही पहुंचे, जबकि नवंबर से फरवरी के बीच यहां पक्षियों की मौजूदगी चरम पर रहती है। इनमें कुछ शोधार्थी और पक्षी प्रेमी भी शामिल रहे। पटना पक्षी विहार की रेंजर मनीषा कुकरैती का कहना है कि विभाग का प्रयास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का है। यह एक प्राकृतिक झील है, जो वर्षा के जल पर आधारित है, इसलिए यहां बोटिंग की सुविधा संभव नहीं है। अब जब पटना पक्षी विहार को 11वें वेटलेंड के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है, तो उम्मीद है कि भविष्य में यहां सुविधाओं का विकास होगा और देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में आकर्षित होंगे।


