मथुरा: मथुरा (Mathura) जिले के कोसीकलां थाना क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव फालैन में आस्था और विश्वास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। करीब 5200 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए संजू पंडा धधकती होलिका (Holika) की भीषण लपटों के बीच से सुरक्षित बाहर निकल आए। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्त प्रह्लाद के जयकारों से गूंज उठा और हजारों श्रद्धालुओं ने इस क्षण को श्रद्धा से निहारा।
बताया जाता है कि इस प्राचीन परंपरा के निर्वहन से पूर्व संजू पंडा ने वसंत पंचमी से 45 दिनों तक कठोर व्रत और साधना की। वे प्रह्लाद मंदिर में रहकर एक समय फलाहार करते रहे और ब्रह्मचर्य का पालन किया। तड़के करीब 4 बजे प्रह्लाद कुंड में स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई। उनकी बहन ने जलते कलश के साथ होलिका की परिक्रमा कर अर्घ्य अर्पित किया। दैवीय संकेत मिलने पर संजू पंडा जलती होलिका में प्रवेश कर कुछ ही क्षणों में सुरक्षित बाहर आ गए।
होलिका से सकुशल बाहर निकलते ही हुरियारों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उनके बड़े भाई मोनू पंडा पांच बार इस परंपरा का निर्वहन कर चुके हैं, जबकि इस वर्ष पहली बार संजू पंडा ने यह दायित्व संभाला। इस दौरान संजू पंडा ने बताया कि आग के बीच रहने के अनुभव को उन्होंने दैवीय कृपा बताते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार का भय महसूस नहीं हुआ।
इस अलौकिक परंपरा को देखने के लिए फालैन सहित आसपास के दर्जनभर गांवों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। विदेशी पर्यटकों ने भी इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और पुलिस व तहसील प्रशासन के अधिकारी मौके पर तैनात रहे।


