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Monday, April 6, 2026

विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव

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आरक्षण प्रक्रिया अधूरी बड़ी वजह

सूर्या पंडित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों के चलते समय पर नई पंचायतों का गठन मुश्किल नजर आ रहा है।

दरअसल, प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल आगामी 26 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बावजूद अभी तक नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सबसे बड़ी बाधा पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर चल रही प्रक्रिया मानी जा रही है, जो अभी अधूरी है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में समय लग रहा है। जब तक आरक्षण का अंतिम खाका तैयार नहीं हो जाता, तब तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं माना जा रहा है। यही वजह है कि चुनाव कार्यक्रम आगे खिसकने की पूरी संभावना है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी फिलहाल पंचायत चुनाव प्राथमिकता में नहीं हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुटे हुए हैं। ऐसे में कोई भी दल स्थानीय स्तर के चुनावों में उलझना नहीं चाहता, जिससे उनका फोकस बड़े चुनाव से हटे।

हालांकि इस मामले में न्यायिक पहल भी शुरू हो चुकी है। पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इस पर न्यायालय का रुख भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो आगे की स्थिति को स्पष्ट कर सकता है।

कुल मिलाकर, प्रशासनिक देरी, आरक्षण प्रक्रिया की अधूरी स्थिति और राजनीतिक प्राथमिकताओं के चलते उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव फिलहाल टलते नजर आ रहे हैं। अब सबकी निगाहें सरकार और अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि लोकतंत्र की यह स्थानीय इकाई कब तक नए स्वरूप में सामने आएगी।

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