फर्रुखाबाद। पौष पूर्णिमा के पावन पर्व पर शनिवार को फर्रुखाबाद जनपद के ऐतिहासिक पांचाल घाट पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसी पावन अवसर के साथ प्रसिद्ध मेला श्री रामनगरिया का विधिवत शुभारंभ भी हो गया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और भक्तिमय वातावरण बन गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन गंगा स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पांचाल घाट पर पहुंचना शुरू हो गया था। ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया, जरूरतमंदों को वस्त्र और अन्न का दान दिया तथा गंगा तट पर सत्यनारायण भगवान की कथाओं का आयोजन भी कराया।
पांचाल घाट पर इन दिनों हजारों की संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु कल्पवास कर रहे हैं। कल्पवास के दौरान श्रद्धालु संयमित जीवन, जप-तप, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठानों में समय व्यतीत करते हैं। घाट पर हर ओर “हर-हर गंगे” के उद्घोष गूंजते रहे। मेला श्री रामनगरिया क्षेत्र में संतों के आश्रमों में रामायण के अखंड पाठ, भजन-कीर्तन और प्रवचन चल रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु संतों के सान्निध्य में धर्म और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। गंगा घाट पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिसकर्मी लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने के लिए जागरूक करते रहे। लाउडस्पीकर और सीटी के माध्यम से भी सावधानी बरतने की अपील की जाती रही। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों के जरिए गंगा के किनारों पर लगातार निगरानी रखी गई, ताकि स्नान के दौरान कोई हादसा न हो।
पौष पूर्णिमा के अवसर पर हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, इटावा, मैनपुरी, एटा सहित कई जनपदों से श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पांचाल घाट पहुंचे। श्रद्धालुओं की आमद से स्थानीय बाजारों और मेला क्षेत्र में भी रौनक देखने को मिली। मेला श्री रामनगरिया न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है। आगामी दिनों में मकर संक्रांति और अन्य पर्वों को लेकर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाएं और सुदृढ़ करने की तैयारी शुरू कर दी है।





