इस्लामाबाद। ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद पाकिस्तान में श्रेय लेने की होड़ अब सोशल मीडिया पर एक अजीब मोड़ ले चुकी है। जहां एक ओर राजनीतिक नेतृत्व खुद को शांति स्थापित करने वाला बताने में जुटा है, वहीं आम यूजर्स भी कॉपी-पेस्ट पोस्ट के जरिए “ग्लोबल पीसमेकर” बनने का दावा कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब Shehbaz Sharif के एक कथित ‘ड्राफ्ट ट्वीट’ को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस ट्वीट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और देखते ही देखते यह मुद्दा ट्रेंड में बदल गया।
युद्धविराम के बाद पाकिस्तान में यह नैरेटिव बनाने की कोशिश दिखाई दी कि उसने Iran और United States के बीच शांति स्थापित कराने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक जैसे संदेशों की बाढ़ आ गई। हजारों यूजर्स एक ही तरह का टेक्स्ट कॉपी-पेस्ट कर रहे हैं, जिसमें वे विदेशों में अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट को लेकर “सम्मान” मिलने की बातें कर रहे हैं।
वायरल हो रहे इन पोस्ट्स में लिखा जा रहा है कि जैसे ही वे किसी विदेशी एयरपोर्ट पर अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट दिखाते हैं, इमिग्रेशन अधिकारी उन्हें “ग्लोबल पीसमेकर” कहकर सम्मानित करते हैं। इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चुटकुले और तंज भी देखने को मिल रहे हैं।
कई यूजर्स ने इन पोस्ट्स की सत्यता पर सवाल उठाते हुए इसे “संगठित ट्रेंड” करार दिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित प्रयास हो सकता है, जिसके जरिए देश की छवि सुधारने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर, बड़ी संख्या में लोग इस ट्रेंड का मजाक भी उड़ा रहे हैं। कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि जिनके पास बुनियादी संसाधनों की कमी है, वे अब वैश्विक स्तर पर अपनी छवि गढ़ने में लगे हैं।
इस ट्रेंड की सबसे दिलचस्प बात यह है कि लोग एक ही मैसेज को अलग-अलग देशों के नाम के साथ शेयर कर रहे हैं। कई बार तो कॉपी-पेस्ट करते समय गलतियां भी हो रही हैं, जिससे यह और अधिक हास्यास्पद बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बताती है कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया किस तरह धारणा निर्माण का बड़ा माध्यम बन चुका है। यहां वास्तविकता से ज्यादा ‘नैरेटिव’ और ‘इमेज’ पर जोर दिया जाता है।
इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के ट्वीट की भी आलोचना हुई है। यूजर्स ने आरोप लगाया कि सरकार खुद इस तरह के दावों को बढ़ावा दे रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार या आधिकारिक एजेंसियों की ओर से इस वायरल ट्रेंड पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।


