यूथ इंडिया
आज समाज में सफलता का मतलब केवल पैसा मान लिया गया है। जिस व्यक्ति के पास पैसा है, उसे सफल और समझदार समझ लिया जाता है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। पैसा अपने आप में कोई मंज़िल नहीं है, बल्कि वह उस मेहनत, समझ और क्षमता का परिणाम होता है जो व्यक्ति ने समय के साथ विकसित की होती है।
सीधी बात यह है कि पैसा by-product है। वह अपने आप नहीं बनता और न ही हमेशा टिकता है। पैसा तभी टिकता है, जब उसके पीछे मजबूत सोच और काम करने की क्षमता होती है।
स्किल लेवल ही असली पूंजी
पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन स्किल लेवल सब कुछ तय करता है। जिस व्यक्ति में जितनी अधिक योग्यता और क्षमता होती है, उसका विकास उतना ही तेज़ होता है। स्किल का मतलब केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि समस्या को समझना, समाधान निकालना, काम को बेहतर तरीके से करना और समय के साथ खुद को अपडेट रखना है।
कम स्किल वाला व्यक्ति हमेशा डर में रहता है—नौकरी चली जाएगी, काम बंद हो जाएगा, पैसा रुक जाएगा। जबकि स्किल वाला व्यक्ति जानता है कि अगर एक रास्ता बंद होगा, तो दूसरा खुल जाएगा। उसकी योग्यता ही उसकी असली सुरक्षा होती है।
यह मान लेना कि केवल मेहनत से पैसा बनता है, एक बड़ी गलतफहमी है। मेहनत जरूरी है, लेकिन पैसा सिस्टम और प्रोजेक्ट से पैदा होता है। जहाँ काम करने का तरीका तय होता है, जहाँ जिम्मेदारियाँ बँटी होती हैं और जहाँ काम बार-बार दोहराया जा सकता है, वहीं पैसा स्थायी रूप से बनता है।
बिना सिस्टम के कमाया गया पैसा जल्दी आता है और उतनी ही जल्दी चला भी जाता है। लेकिन स्किल के साथ बनाया गया सिस्टम व्यक्ति को लंबे समय तक आगे रखता है।
पैसे को लक्ष्य बनाकर चलने वाला व्यक्ति अक्सर थक जाता है, जबकि स्किल को मजबूत करने वाला व्यक्ति खुद रास्ता बनाता है। इसलिए जरूरी है कि पहले खुद को काबिल बनाया जाए। जब योग्यता बढ़ती है, सोच साफ होती है और काम का स्तर ऊँचा होता है, तो पैसा अपने आप पीछे-पीछे आता है।
सीधी बात यही है पहले स्किल, फिर सिस्टम और उसके बाद पैसा।
पैसा मंज़िल नहीं, रास्ते में मिलने वाला परिणाम है।

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