फर्रुखाबाद।कुख्यात माफिया अनुपम दुबे और उसके नेटवर्क के खिलाफ चल रहा अभियान अब उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग में पहुंच चुका है। पूरे ऑपरेशन पर एडीजी आलोक सिंह की सीधी नजर बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जोन स्तर पर नियमित समीक्षा हो रही है और प्रत्येक कार्रवाई की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जा रही है।
गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद पुलिस ने दायरा और बढ़ा दिया है। सरगना अनुपम दुबे के साथ अनुराग दुबे उर्फ डब्बन, अमित दुबे उर्फ बब्बन समेत अन्य सक्रिय सदस्यों को गैंगचार्ट में शामिल कर धारा 3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
अंडरग्राउंड वसूली तंत्र की पड़ताल
जांच एजेंसियां अब उन “अंडरग्राउंड वर्कर्स” की पहचान में जुटी हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से सामने न आकर कथित तौर पर वसूली और दबाव बनाने का काम करते थे। व्यापारियों, ठेकेदारों और जमीन से जुड़े मामलों में सक्रिय इस नेटवर्क के मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और आपसी संपर्कों की बारीकी से जांच की जा रही है। संकेत हैं कि यदि किसी की संलिप्तता पुख्ता होती है तो उसे भी गैंगस्टर की कार्रवाई में शामिल किया जाएगा।
पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय कर दिया है। ऐसे अकाउंट्स और पेज चिन्हित किए जा रहे हैं जो आपराधिक मामलों में आरोपित व्यक्तियों का महिमामंडन कर रहे हैं या भ्रामक/उत्तेजक सामग्री के जरिए कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान रहेगा, लेकिन हिंसा भड़काने, झूठी सूचना फैलाने या वैमनस्य उत्पन्न करने वाले कंटेंट पर आईटी एक्ट व अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई होगी।
गैंग से जुड़ी कथित अवैध संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीमें फर्जी बैनामा, बेनामी संपत्ति और संदिग्ध जमीन सौदों की जांच कर रही हैं।
एडीजी आलोक सिंह की निगरानी में जोन स्तर पर समन्वय बैठकों का दौर जारी है। थानों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक इनपुट पर त्वरित कार्रवाई की जाए और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। गिरफ्तारी, कुर्की, और तकनीकी साक्ष्य संकलन—तीनों मोर्चों पर एक साथ काम हो रहा है।






