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Thursday, January 22, 2026

अधिकारियों के फरमान बेअसर! रामनगरिया मेले में सुरक्षा इंतजाम नदारद, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

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शमशाबाद (फर्रुखाबाद): ढाईघाट शमशाबाद (Dhaighat Shamshabad) के पावन तट पर आयोजित रामनगरिया मेला (Ramnagariya fair) इन दिनों पूरे शबाब पर है। गंगा तट पर धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। साधु-संतों के आश्रमों में कथाओं की गूंज है, जगह-जगह पंडालों में प्रवचन हो रहे हैं, जिन्हें सुनने के लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालु गंगा मैया के गुणगान में लीन नजर आ रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत चिंताजनक बनी हुई है।

रामनगरिया मेले में इन दिनों बड़ी संख्या में कल्पवासी, साधु-संत और श्रद्धालुओं का आवागमन जारी है। फर्रुखाबाद के साथ-साथ कन्नौज, औरैया, इटावा, शिकोहाबाद, आगरा, एटा, मैनपुरी, शाहजहांपुर और बदायूं सहित कई जनपदों से व्यापारी व संत समाज यहां पहुंचकर मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं। हालांकि शाहजहांपुर परिक्षेत्र में लगने वाले मेले की व्यवस्थाएं संतोषजनक बताई जा रही हैं, लेकिन फर्रुखाबाद परिक्षेत्र का रामनगरिया मेला अब भी अव्यवस्थाओं से जूझता नजर आ रहा है।

सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि मेले में व्यापारियों द्वारा सजाए गए प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा के इंतजाम लगभग न के बराबर दिखाई दे रहे हैं। जबकि कुछ दिन पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि सभी व्यापारियों, कल्पवासियों और साधु-संतों को एहतियात के तौर पर अग्निशमन यंत्र, गैस सिलेंडर की सुरक्षित व्यवस्था और बालू से भरे पात्र या बाल्टी अपने पास अनिवार्य रूप से रखने होंगे।

गुरुवार को रामनगरिया मेले में पहुंचे हमारे समाचार प्रतिनिधि जब मौके पर पहुंचे तो सुरक्षा इंतजामों की हकीकत देखकर दंग रह गए। मेले में दर्जनों प्रतिष्ठान सजे हुए हैं, क्रय-विक्रय का कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन अधिकांश दुकानों पर न तो अग्निशमन यंत्र दिखाई दिए, न गैस सिलेंडर की सुरक्षित व्यवस्था और न ही बालू से भरे पात्र। यह स्थिति सीधे-सीधे प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना को दर्शाती है।

जब इस संबंध में व्यापारियों से जानकारी की गई तो वे बगले झांकते नजर आए। कुल मिलाकर मेले में सुरक्षा के उपाय नदारद दिखाई दिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व शाहजहांपुर जनपद में एक साधु की झोपड़ी में गैस सिलेंडर से आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें लगभग 20 हजार रुपये की नगदी और दैनिक उपयोग का सामान जलकर खाक हो गया था। स्थानीय लोगों का कहना था कि यदि साधु के पास अग्निशमन से संबंधित आवश्यक उपकरण होते तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।

रामनगरिया मेला अभी कई दिनों तक चलेगा और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा उपायों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। कब, कहां और कैसे कोई अप्रिय घटना घट जाए, यह कहना मुश्किल है। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर चिंता और अफसोस व्यक्त करते हुए मांग की है कि आदेशों की अनदेखी करने वाले लापरवाह विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही सभी व्यापारियों, कल्पवासियों और साधु-संतों को अग्निशमन यंत्र, गैस सिलेंडर की सुरक्षित व्यवस्था, बालू आदि अनिवार्य रूप से रखने के निर्देशों का पालन कराया जाए और उन्हें प्राकृतिक व आकस्मिक आपदाओं से निपटने की आवश्यक जानकारी भी दी जाए।

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