नई दिल्ली/मुंबई। राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार के संसदीय भविष्य पर बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। ओवैसी ने दावा किया है कि शरद पवार के पास दोबारा राज्यसभा पहुंचने के लिए आवश्यक संख्या में विधायक नहीं हैं। रविवार को मीडिया से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल मार्च 2026 में समाप्त हो रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में उनके गठबंधन के पास इतनी ताकत नहीं दिखती कि वे दोबारा राज्यसभा पहुंच सकें। ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बड़ा राजनीतिक तमाशा होने की बात भी कही।
‘नंबर चाहिए, ताकत कहां है?’ ओवैसी
ओवैसी ने तीखे शब्दों में कहा पवार साहब का राज्यसभा टर्म कब तक का है? मार्च तक। उनके पास ताकत कहां है? उनके गठबंधन में इतने विधायक कहां हैं? अगर वह दोबारा राज्यसभा जाएंगे तो कैसे जाएंगे? नंबर चाहिए न। अभी इस पर बड़ा तमाशा देखने को मिलेगा।
चुनावी माहौल में आया बयान
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र में बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगर पालिका) समेत कई प्रमुख स्थानीय निकायों के चुनाव चल रहे हैं। साथ ही, राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर और गठबंधनों में मंथन तेज हो गया है। ऐसे में ओवैसी की टिप्पणी को महाराष्ट्र की राजनीति में दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव क्यों हैं अहम
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 में राज्यसभा की 72 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इन चुनावों का असर केंद्र और राज्यों की राजनीति पर गहरा पड़ेगा। इस बार जिन दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं।
राज्यसभा चुनावों में जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें—कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे,पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा शरद पवार, दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल बर्मा जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
राज्यसभा चुनावों में इस बार उत्तर प्रदेश की 10 सीटें सबसे अहम मानी जा रही हैं, जिन पर नवंबर 2026 में चुनाव होने हैं। इसके अलावा बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और झारखंड में भी राज्यसभा चुनाव होंगे, जो राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
ओवैसी के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर इसे शरद पवार की राजनीतिक ताकत पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे आगामी राज्यसभा चुनावों से पहले दबाव बनाने की राजनीति भी माना जा रहा है। राज्यसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह साफ है कि आने वाले दिनों में नेताओं के बयानों और गठबंधन समीकरणों को लेकर राजनीतिक पारा और चढऩे वाला है।






