लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षकों को जारी नोटिस को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एआई (Artificial Intelligence) से जुड़े सेमिनार में शामिल न होने पर करीब 80 शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया, जिससे अकादमिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
तीन दिन में मांगा गया जवाब
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में संबंधित शिक्षकों को तीन दिन के भीतर अपनी अनुपस्थिति का कारण बताने के निर्देश दिए गए हैं। यह सेमिनार 16 और 24 मार्च को आयोजित किया गया था, जिसमें शिक्षकों की उपस्थिति अपेक्षित बताई गई थी।
शिक्षकों का कहना है कि सेमिनार ऐसे समय पर आयोजित किया गया जब उनकी नियमित कक्षाएं चल रही थीं। क्लासेस को स्थगित किए बिना सेमिनार में अनिवार्य उपस्थिति का निर्देश देना व्यावहारिक नहीं था, जिससे कई शिक्षक शामिल नहीं हो सके।
डीन के अधिकार पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद डीन द्वारा नोटिस जारी करने के अधिकार को लेकर खड़ा हो गया है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकार का नोटिस जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है और इसे लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए।
नोटिस जारी होने के बाद शिक्षकों में नाराजगी का माहौल है। कई शिक्षक इसे अनावश्यक दबाव और अकादमिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मान रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन इस कदम को अनुशासन और अकादमिक गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बता रहा है।
यह विवाद अब विश्वविद्यालय के भीतर ही नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासन और शिक्षकों के बीच संवाद या टकराव की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षक नोटिस का क्या जवाब देते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है।
लखनऊ विश्वविद्यालय में नोटिस विवाद: एआई सेमिनार में अनुपस्थिति पर 80 शिक्षकों से जवाब तलब


