हरिद्वार: उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी (Har Ki Pauri) क्षेत्र में गैर-हिंदुओं (Non-Hindus) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। बार-बार मांग उठने के बाद ये पोस्टर लगाए गए हैं। इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। इन्हें हर की पौड़ी क्षेत्र की व्यवस्था संभालने वाली संस्था श्री गंगा सभा ने लगवाया है। पोस्टरों में यह भी बताया गया है कि यह क्षेत्र हरिद्वार नगर पालिका अधिनियम 1916 के अंतर्गत आता है, जिसके तहत गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।
हर की पौड़ी को सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक माना जाता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा में स्नान करने, धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना करने तथा दान-पुण्य करने के लिए यहां आते हैं। श्री गंगा सभा दशकों से हर की पौड़ी क्षेत्र का प्रबंधन कर रही है। इस संस्था की स्थापना महामाना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी।
श्री गंगा सभा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गौतम ने हर की पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के अनुरोध को दोहराया है। इस अनुरोध को कुछ संतों और हिंदू संगठनों के सदस्यों का समर्थन मिला है, जो तर्क देते हैं कि तीर्थ स्थल की धार्मिक परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए प्रवेश प्रतिबंधित करना आवश्यक है।
1916 के नगर पालिका उपनियमों का संदर्भ
1916 में स्थापित इन नगर पालिका उपनियमों में निर्दिष्ट है कि हर की पौड़ी क्षेत्र में केवल हिंदू ही प्रवेश कर सकते हैं। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने 1916 में बने नगर पालिका उपनियमों का हवाला देते हुए कहा, इस संबंध में प्रावधान पहले से मौजूद हैं और इन्हें लागू करना आवश्यक है। लंबे समय से धार्मिक परंपराओं की उपेक्षा की गई है, जिससे सनातन धर्म प्रभावित हुआ है। प्रशासन से कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो हमने स्वयं ये पोस्टर लगाने का निर्णय लिया।


