लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी करने वाले डॉक्टरों पर अब नकेल कसने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अगर कोई डॉक्टर सादी पर्ची पर या बाहर की दवा लिखता पाया गया, तो उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
नए आदेशों के तहत यह भी कहा गया है कि अगर किसी अस्पताल में डॉक्टर मरीज को उपलब्ध सरकारी या जेनेरिक दवा न देकर बाहर की दवा लिखता है, तो इसकी जवाबदेही अस्पताल के CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) पर भी तय की जाएगी।
विभाग ने बताया है कि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में 200 से अधिक प्रकार की दवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें लगभग सभी प्रमुख बीमारियों के लिए जरूरी दवाएं शामिल हैं।
इसके बावजूद कई डॉक्टर मरीजों को निजी दवा दुकानों से दवा खरीदने की सलाह देते हैं, जिससे मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।
अब यह सख्त निर्देश जारी किया गया है कि सभी डॉक्टर केवल अस्पताल में उपलब्ध सरकारी या जेनेरिक दवाएँ ही लिखेंगे।
किसी भी डॉक्टर द्वारा सादी पर्ची या निजी दवा लिखने पर निलंबन।
डॉक्टर की अनुपस्थिति या लापरवाही पर CMS भी होंगे जिम्मेदार।
सरकारी स्टॉक में 200+ दवाएं उपलब्ध, बाहर की दवा लिखना अनुचित।
सभी चिकित्सकों को जेनेरिक नाम से ही दवा लिखने का आदेश।
निगरानी टीम अस्पतालों के प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड की नियमित जांच करेगी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह आदेश मरीजों को राहत देने के लिए है।
“सरकारी अस्पतालों में दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। यदि कोई डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखता है, तो यह न केवल नीति उल्लंघन है बल्कि गरीब मरीजों के साथ अन्याय भी है।”
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवा की व्यवस्था सरकार की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नीति है।
डॉक्टरों की मनमानी और फार्मेसी लॉबी के दबाव में बाहर की दवा लिखना इस व्यवस्था की जड़ कमजोर कर रहा था।
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।




