डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष कार्गो रूट से उद्योगों को सीधा लाभ, सप्लाई चेन होगी मजबूत
20 लाख से 80 लाख मीट्रिक टन तक कार्गो क्षमता विस्तार का लक्ष्य
मल्टी मोडल कार्गो हब से निर्यात-आयात को मिलेगा बड़ा बूस्ट
इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनेगा एयरपोर्ट
जेवर, 28 मार्च। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के सबसे बड़े कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी उभरने जा रहा है। एयरपोर्ट के पास निर्मित डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और विशेष कार्गो रूट इस क्षेत्र को ग्लोबल ट्रेड गेटवे बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।
डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल से बढ़ेगी क्षमता
एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल विकसित किया गया है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 20 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शुरुआती चरण में लगभग 2.5 लाख टन प्रति वर्ष कार्गो संचालन की क्षमता विकसित की गई है, जिसे आगे बढ़ाकर करीब 15 लाख टन प्रति वर्ष तक विस्तारित किया जाएगा। लगभग 80 हजार वर्गमीटर में फैले इस कार्गो क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
मल्टी मॉडल कार्गो हब का हो रहा विकास
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां वायु मार्ग, सड़क और संभावित रेल कनेक्टिविटी के माध्यम से माल परिवहन को आसान बनाया जाएगा। डेडिकेटेड कार्गो रूट का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे औद्योगिक इकाइयों से सीधे एयरपोर्ट तक माल की तेज और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।
उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और फार्मा सेक्टर को इस कार्गो हब से सीधा लाभ मिलेगा। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास स्थापित उद्योगों के उत्पाद अब तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे निर्यात को नई गति मिलेगी और उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।
सप्लाई चेन होगी मजबूत, समय और लागत में कमी
डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष रूट के कारण लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया अधिक सुगम और समयबद्ध हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उद्योगों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस तरह की सुविधाओं से उत्तर प्रदेश “जस्ट-इन-टाइम” सप्लाई मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा भी बढ़ेगा।
ग्लोबल ट्रेड गेटवे के रूप में उभरता उत्तर प्रदेश
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह कार्गो हब उत्तर प्रदेश को ‘लैंडलॉक्ड’ स्थिति से बाहर निकालते हुए सीधे वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे न केवल निर्यात-आयात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।


