पटना: बिहार की”नीतीश कुमार” सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (Scheduled Castes and Scheduled Tribes) के छात्रों के हित में बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट (Nitish cabinet) बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिसमें एससी -एसटी वर्ग के छात्रों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दर दोगुनी करना प्रमुख निर्णय रहा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार अब कक्षा 1 से 10 तक अध्ययनरत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों को वार्षिक छात्रवृत्ति राशि ₹1200 से बढ़ाकर ₹3600 कर दी गई है। वहीं, छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को अब ₹6000 प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से कमजोर वर्ग के छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहायता मिलेगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। नीतीश सरकार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सामाजिक न्याय और समान अवसर की नीति के तहत लिया गया है। बढ़ी हुई छात्रवृत्ति से एससी – एसटी वर्ग के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से ही मजबूती मिलेगी और आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा। कैबिनेट बैठक में शिक्षा, प्रशासन और विकास से जुड़े कुल 31 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें कई प्रस्ताव राज्य के सामाजिक और शैक्षिक विकास से जुड़े हैं।
छात्रों और अभिभावकों में खुशी
सरकार के इस फैसले से एससी-एसटी छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। शिक्षा से जुड़े संगठनों ने भी इसे समावेशी विकास की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है। सरकार का मानना है कि छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी से आर्थिक बाधाओं के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को रोकने में मदद मिलेगी और राज्य में शिक्षा का स्तर और मजबूत होगा।


