फर्रुखाबाद बिजली विभाग में डबल एक्शन
30 लाख से अधिक के कार्यों में गड़बड़ी, पोल शिफ्टिंग में देरी और गुणवत्ता पर सवाल
जनप्रतिनिधियों की नाराजगी पड़ी भारी
सांसद मुकेश राजपूत ने भी मुख्यमंत्री से की थी शिकायत
दक्षिणांतर विद्युत वितरण निगम की एमडी नीतीश कुमार की बड़ी कार्रवाई
यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ/फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद विद्युत वितरण मंडल में लंबे समय से चल रही शिकायतों और अनियमितताओं के बीच दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए अधीक्षण अभियंता अजय कुमार और कार्यकारी सहायक रविन्द्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई डीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक नीतीश कुमार द्वारा 11 फरवरी 2026 को जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों के माध्यम से की गई। जारी आदेशों में उल्लेख है कि फर्रुखाबाद मंडल में कराए गए कई विद्युत कार्यों में स्वीकृत तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। शिकायतों के आधार पर हुई प्रारंभिक जांच में पोल शिफ्टिंग, लाइन निर्माण और अन्य विकास कार्यों में गुणवत्ता की कमी तथा भुगतान प्रक्रिया में अनियमितता के संकेत मिले।
कुछ मामलों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई, जबकि मौके पर कार्य अधूरे या निम्न गुणवत्ता के पाए गए। इससे न केवल विभाग की साख प्रभावित हुई बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई। जिले में सडक़ चौड़ीकरण योजनाओं के तहत विद्युत पोल हटाने और स्थानांतरण के कार्यों में गंभीर देरी सामने आई। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि समयबद्ध कार्यों के बावजूद पोल शिफ्टिंग में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई, जिससे विकास कार्य बाधित हुए और आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सडक़ के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद कार्यों की मॉनिटरिंग प्रभावी ढंग से नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई थी। फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी, जिसके बाद शासन स्तर पर मामला गंभीरता से लिया गया।
इसी प्रकरण से जुड़े मामलों में कार्यकारी सहायक रविंन्द्र सिंह के खिलाफ भी लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के आरोप पाए गए। प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। आदेश के अनुसार, दोनों अधिकारियों को जांच पूरी होने तक उनके वर्तमान पद से हटाकर मुख्य अभियंता (वितरण), बांदा से संबद्ध कर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी तथा दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डीजल घोटाले और अवैध तबादलों पर बड़ा एक्शन!
ऊर्जा विभाग में मचा हडक़ंप
हाई लेवल शिकायत के बाद शासन सख्त, वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद/लखनऊ। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में डीजल घोटाले, वित्तीय अनियमितताओं और नियम विरुद्ध स्थानांतरण के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। शासन स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद अब मामले में सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
11 फरवरी 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल, फर्रुखाबाद के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। प्रकरण की रिपोर्ट 23 फरवरी तक मांगी गई है।
मामले की जड़ अगस्त 2025 में प्रकाशित एक खबर से जुड़ी है, जिसमें दो की जगह एक लाइन का टेंडर डाल 30 लाख के खेल का आरोप लगाया गया था। प्रारंभिक जांच में निविदा दरों में 15,02,516.37 रुपये का अंतर सामने आया। इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए जांच अधीक्षण अभियंता स्तर पर शुरू की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभागीय डीजल खर्च में फर्जीवाड़ा किया गया।
डीजल की जगह पेट्रोल अथवा अन्य मदों में भुगतान दर्शाकर विभाग को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा लगभग 80 स्थानांतरण ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत किए जाने का भी आरोप है। बताया गया है कि कई कर्मचारियों को हटाया गया, जबकि जिनके विरुद्ध शिकायतें थीं उन्हें प्रमुख पदों पर तैनात कर दिया गया। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रकरण को लेकर शिकायत सीधे अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई थी। जिलाधिकारी फर्रुखाबाद द्वारा भी मामले में पत्राचार किया गया। 6 फरवरी 2026 को शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश जारी हुए कि अधीक्षण अभियंता के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 25 अगस्त 2025 को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री (प्रभारी मंत्री, फर्रुखाबाद) जयवीर सिंह ने भी जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के स्थानांतरण/समायोजन नियमों के उल्लंघन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था।
23 फरवरी तक रिपोर्ट तलब
शासन ने मामले की विस्तृत जांच कर 23 फरवरी 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। ऊर्जा विभाग में इस कार्रवाई के बाद हडक़ंप मचा हुआ है और अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।





