निजी बसों की मनमानी वसूली: ₹600 का टिकट पहुंचा ₹5000 पार, दीपावली पर घर लौटना हुआ महंगा सपना !

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Lucknow| दीपावली के त्योहार में जहां हर कोई अपने परिवार के साथ घर लौटने की तैयारी में है, वहीं नोएडा और दिल्ली से लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बस्ती और पूर्वांचल के जिलों को जाने वाले यात्रियों के लिए सफर किसी आर्थिक यातना से कम नहीं रह गया है। निजी बस संचालकों ने टिकट के दामों में इतनी बेतहाशा वृद्धि कर दी है कि आम जनता का घर पहुंचना मुश्किल हो गया है।
₹600 का टिकट अब ₹5000 तक!
जानकारी के मुताबिक, जो बसें सामान्य दिनों में ₹600 से ₹800 में यात्रियों को लखनऊ तक पहुंचाती थीं, वे अब उसी दूरी के लिए ₹4000 से ₹5000 तक वसूल रही हैं। इसी तरह, वाराणसी और पूर्वांचल की ओर जाने वाली बसों का किराया भी चार से पांच गुना तक बढ़ा दिया गया है।
यात्रियों ने बताया कि जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है, किराया और ऊपर जाने की आशंका है। बस ऑपरेटर यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर ‘जो दे सकता है, उसे सीट मिल जाएगी’ जैसी स्थिति बना चुके हैं।
“ सरकार सो रही है, बस माफिया सक्रिय

नोएडा सेक्टर 62 बस स्टैंड पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन और सरकारी बसों में सीट पाने की बहुत कोशिश की, लेकिन टिकटें या तो फुल हैं या एजेंटों के पास पहुंच चुकी हैं। अब प्राइवेट बस ऑपरेटर यही कहकर दाम बढ़ा रहे हैं कि “सरकारी बसें फुल हैं, अब तो प्राइवेट ही सहारा है।”
एक यात्री अमित कुमार (मूल निवासी—देवरिया) ने बताया, “मैं पिछले तीन दिनों से टिकट तलाश रहा हूं। सरकारी बस में सीट नहीं मिली। निजी बस वाले ₹800 की जगह ₹4500 मांग रहे हैं। ऐसे में गरीब आदमी घर कैसे जाएगा?”
एसी व लग्जरी बसों का किराया तो आसमान छू रहा है। ₹1200 में मिलने वाला टिकट अब ₹5500 तक पहुंच गया है। कुछ बस संचालक तो खुलेआम कह रहे हैं कि दीपावली से दो दिन पहले किराया ₹6000 तक भी जा सकता है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
यात्रियों का कहना है कि यह सब कुछ प्रशासन और परिवहन विभाग की निगरानी की कमी के चलते हो रहा है। सरकार को तत्काल रेट कंट्रोल और फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों की तैनाती करनी चाहिए ताकि बस ऑपरेटरों की मनमानी पर रोक लग सके।
नोएडा के सेक्टर 37 में मौजूद एक स्थानीय समाजसेवी ने कहा, “हम लोग चाहते हैं कि सरकार या आरटीओ विभाग कम से कम त्योहारों पर स्पेशल चेकिंग कराए। टिकट ₹100–₹200 बढ़े तो लोग समझ सकते हैं, लेकिन ₹5000 देना तो लूट है।”
त्योहार की खुशी पर छाया सफर का संकट
दीपावली जैसे पारिवारिक त्योहार पर लोग घर लौटने के लिए बेताब हैं, लेकिन इस अवैध वसूली ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बस स्टैंडों और ट्रैवल एजेंसी दफ्तरों के बाहर लंबी कतारें हैं, और कई लोग मजबूर होकर ट्रेन या कार पूल का विकल्प तलाश रहे हैं।
त्योहार पर घर पहुंचने की जद्दोजहद में लोग अब “लूट के यात्री” बन चुके हैं। सरकार यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्थिति आम जनता की परेशानी को और बढ़ा देगी।
दीपावली की खुशी, बस ऑपरेटरों की मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ती दिख रही है।

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