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Tuesday, June 9, 2026
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जय शाह ने बीसीसीआई सचिव पद से दिया इस्तीफा

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Jay Shah
Jay Shah

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव जय शाह (Jay Shah) पद इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल की शुरुआत कर दी है। बता दें कि जय शाह इस साल अगस्त में आईसीसी के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। वह इस पद को संभालने वाले सबसे युवा अध्यक्ष हैं। आईसीसी ने रविवार को इस बात की जानकारी दी।

ICC अध्यक्ष के रूप में अपने पहले बयान में जय शाह ने अपने कार्यकाल के लिए अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जिसमें लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल करना है। साथ ही महिलाओं के खेल के विकास को और तेज करना शामिल है। शाह ने एक बयान में कहा कि मुझे ICC अध्यक्ष की भूमिका निभाने पर गर्व है और ICC निदेशकों और सदस्य बोर्डों के समर्थन और विश्वास के लिए आभारी हूं।

उन्होंने कहा कि खेल के लिए यह एक रोमांचक समय है क्योंकि हम LA28 ओलंपिक खेलों की तैयारी करते हैं। दुनिया भर के प्रशंसकों के लिए क्रिकेट को अधिक समावेशी और आकर्षक बनाने के लिए काम करते हैं। जय शाह ने कहा कि हम कई प्रारूपों के सह-अस्तित्व और महिलाओं के खेल के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। क्रिकेट में वैश्विक स्तर पर अपार संभावनाएं हैं, और मैं इन अवसरों को भुनाने और खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ICC टीम और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।

बता दें कि 2019 में शाह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) में शामिल हुए और इसके सबसे कम उम्र के मानद सचिव बने। उन्होंने एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष और ICC की वित्त और वाणिज्यिक मामलों की समिति के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

शाह अब ICC के अध्यक्ष के रूप में ग्रेग बार्कले का स्थान लेंगे। बार्कले नवंबर 2020 से इस पद पर थे और शाह ने पिछले चार वर्षों में ICC की उपलब्धियों में उनके योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मैं पिछले चार वर्षों में भूमिका में उनके नेतृत्व और उस अवधि के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों के लिए ग्रेग बार्कले को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मैं वैश्विक मंच पर खेल की पहुंच और विकास का विस्तार करने के लिए ICC टीम और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।

न्यायिक आयोग की टीम संभल पहुंची, हिंसाग्रस्त इलाके का कर रही है मुआयना

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Sambhal

संभल । यूपी के संभल (Sambhal) जिले में हुई हिंसा की जांच के लिए रविवार को तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति के सदस्य पहुंच गए हैं। टीम हिंसाग्रस्त इलाके में मुआयना कर रही है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ टीम इलाके का दौरा कर रही है। 24 नवंबर को संभल जिले की शाही जामा मस्जिदमें सर्वेक्षण को लेकर हिंसा भड़क गई थी।

रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति के सदस्य निरीक्षण के लिए शाही जामा मस्जिद में दाखिल हुए।

29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट से कहा कि शाही जामा मस्जिद के खिलाफ मुकदमे में तब तक आगे न बढ़ा जाए, जब तक मस्जिद कमेटी द्वारा सर्वेक्षण आदेश के खिलाफ दायर याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में सूचीबद्ध नहीं हो जाती।

लगातार 5वें महीने में गैस सिलेंडर महंगा,18 रुपये इजाफा हुआ एलपीजी सिलेंडर

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LPG commercial gas cylinder
LPG commercial gas cylinder

देश के चारों महानगरों में गैस सिलेंडर (Cylinder) के दाम में लगातार 5वें महीने इजाफा देखने को मिला है। इन 5 महीनों में देश की राजधानी दिल्ली में 172 रुपए से ज्यादा की तेजी देखने को मिल चुकी है। वास्तव में ये बढ़ोतरी कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत हुई है।

वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में लगातार 9वें महीने में कोई बदलाव नहीं हुआ है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में आखिरी बार बदलाव 9 मार्च को देखा गया था। तब सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 100 रुपए की कटौती की थी।

घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं

वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में लगातार 9वें महीने में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। आंकड़ों के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 803 रुपए का है। वहीं दूसरी ओर कोलकाता में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें 829 रुपए देखने को मिल रही है। व

हीं दूसरी ओर वहीं मुंबई में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें 802.50 रुपए पर बनी हुई हैं। चेन्नई में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 818.50 रुपए पर देखने को मिल रहे हैं।

कन्नौज पुलिस बनेगी यूपी की पहली डिजिटल पुलिस

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Kannauj Police

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन को उत्तर प्रदेश में योगी सरकार तेज गति से अमली जामा पहनाने में जी-जान से जुटी हुई है। इसके तहत वर्ष के अंत (दिसंबर) तक कन्नौज पुलिस (Kannauj Police) के सभी थाने मोटी-मोटी फाइलों के जंजाल से मुक्त हो जाएंगे। इसी के साथ कन्नौज पुलिस पूरे प्रदेश में पहला ऐसा जिला होगा, जहां सारे थाने ई ऑफिस सिस्टम प्रणाली पर पूरी तरह से काम करते नजर आएंगे, जहां कागजों पर लिखा-पढ़ी का दौर नये साल से गुजरे जमाने की बात हो जाएगा। दरअसल, स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा की ओर कदम बढ़ाते हुए कन्नौज पुलिस सभी थानों, सीओ ऑफिस और एडिशनल ऑफिस समेत तमाम पुलिस ऑफिसेज में ई-ऑफिस सिस्टम लागू कर देगी। इसके लिए तैयारी और ट्रेनिंग लगभग पूरी हो चुकी है। साथ ही सभी थानों और ऑफिस को ई ऑफिस सिस्टम से संबंधित उपकरण उपलब्ध करा दिये गये हैं।

मोटी-मोटी फाइलों का जमाना गुजरे जमाने की बात

कन्नौज एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में तकनीकी सुधार और आधुनिकरण की दिशा में बड़े कदम उठाये जा रहे हैं। इसी दिशा में कन्नौज पुलिस ने बड़ी पहल करते हुए सभी थानों को दिसंबर 2024 तक पूरी तरह से डिजिटल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल के तहत थानों में मोटी-मोटी फाइलों का जमाना खत्म होगा और ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा।

इसी के तहत कन्नौज उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन जाएगा, जहां सभी पुलिस थानों और कार्यालयों में शत-प्रतिशत ई-ऑफिस प्रणाली पर काम होगा। पुलिस अधीक्षक कन्नौज ने हाल ही में पुलिस कार्यालय में आयोजित एक समारोह में डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत की है। इस दौरान सभी थाना प्रभारियों, क्षेत्राधिकारियों और राजपत्रित अधिकारियों को लैपटॉप वितरित किए गए।

पुलिसकर्मियों को दी जा रही ई-ऑफिस की ट्रेनिंग, थानों को उपलब्ध कराए गए तकनीकी उपकरण

पुलिस अधीक्षक कन्नौज अमित कुमार आनंद ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को ई-ऑफिस की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। यह प्रणाली एनआईसी (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर) द्वारा तैयार की गई है और यह केन्द्रीय सचिवालय नियमावली (CSMeOP)पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए जिले में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है। सभी पुलिस थानों और कार्यालयों को आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

लंबित शिकायतों के निपटारे में आएगी और तेजी, मिलेगा त्वरित न्याय

ई-ऑफिस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य फाइलों और डेटा के डिजिटल प्रबंधन के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाना है। यह प्रणाली शिकायतों और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को तेज बनाएगी, जिससे जनता को त्वरित न्याय मिल सकेगा। साथ ही डिजिटल फाइल के जरिये मॉनिटरिंग से अधिकारियों को कार्यों पर नजर रखने और निर्णय प्रक्रिया को सुगम बनाने में काफी मदद मिलेगी।

वहीं ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से जनता को भी कई लाभ होंगे। इससे थानों में लंबित शिकायतों के निपटारे में देरी नहीं होगी और रिपोर्टिंग प्रक्रिया पारदर्शी के साथ समयबद्ध होगी। इसके अलावा थानों और जिला कार्यालयों में भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी। कन्नौज पुलिस की पहल जनता के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। इससे न केवल पुलिसकर्मियों का कार्यभार कम होगा, बल्कि आमजन को पुलिस विभाग से जुड़ी सेवाओं का लाभ तेजी और पारदर्शी तरीके से मिलेगा। कन्नौज पुलिस की यह पहल प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा है।

सरकारी नलकूप पर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल

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यूथ इंडिया जहानगंज/फर्रुखाबाद । ब्लॉक कमालगंज की ग्राम पंचायत उस्मानगंज में सरकारी नलकूप संख्या 94 Fg पर नाली के रिपेयरिंग कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय समाजसेवी निशांत कटियार ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नलकूप पर चल रहा रिपेयरिंग कार्य बेहद दयनीय है। रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण में सीमेंट की मात्रा बहुत कम इस्तेमाल की जा रही है और पुरानी ईटों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कार्य की स्थिरतापर खतरा उत्पन्न हो सकता है।निशांत कटियार ने अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “इस तरह के घटिया निर्माण से न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि ग्रामीणों की जरूरतों को भी पूरा नहीं किया जा रहा है।स्थानीय लोगों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और उचित कदम उठाने की अपील की है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह की गुणवत्ता से काम जारी रहा, तो नलकूप की उपयोगिता प्रभावित होगी और इससे पानी की समस्या और बढ़ सकती है।समाजसेवी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है

संभल घटना पर जारी सियासत, अखिलेश यादव और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप

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लखनऊ। संभल मस्जिद विवाद ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि मस्जिद के दूसरे सर्वे की आवश्यकता क्यों थी, जबकि पहले सर्वे में सब कुछ स्पष्ट था। उन्होंने मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप हिंसा हुई।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए लिखा:

“झूठ को सच की मीठी चाशनी में लपेटकर खिलानेवाले,  आईने में कितना शर्मिंदा होंगे, अपना फ़र्ज़ न निभानेवाले।”

इस पर कमिश्नर आंजनेय सिंह ने भी चुप नहीं बैठे। उन्होंने एक शायर की पंक्तियों के माध्यम से अपने जवाब में कहा:

नेक लोगों में मुझे नेक गिना जाता है, और गुनहगार गुनहगार समझते हैं मुझे।  मैं बदलते हुए हालत में ढल जाता हूं, देखने वाले अदाकार समझते हैं मुझे।वो जो उस पार हैं इस पार मुझे जानते हैं ये जो इस पार हैं उस पार समझते हैं मुझे।।”

 

कमिश्नर ने इस शायरी के जरिए यह संकेत दिया कि वे अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभा रहे हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें गलत समझ रहे हैं।इस बीच, योगी सरकार ने इस विवाद के संदर्भ में समाजवादी पार्टी के दो नेताओं को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।