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Tuesday, June 9, 2026
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सीरिया में तख्तापलट, राष्ट्रपति बशर अल-असद विशेष विमान से भागे लेकिन रडार से गायब हुआ प्लेन

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दमिश्क। सीरिया में जारी गृह युद्ध के बीच इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। सीरिया में तख्तापलट (Coup in Syria) हो गया है। विद्रोही सेना सीरिया की राजधानी दमिश्क (Damascus) के अंदर दाखिल हो गई है। वहीं 4 शहरों पर कब्जा कर लिया है। इनमें अलेप्पो, हमा, होम्स और दारा शहर शामिल है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है राष्ट्रपति बशर अल-असद (Bashar al-Assad) राजधानी दमिश्क छोड़कर जा चुके हैं। वो रूस में शरण लेने जा रहे हैं। हालांकि, सीरिया सरकार ने असद के देश छोड़कर भागने की खबरों का खंडन किया है। वहीं खबर है कि जिल विमान से राष्ट्रपति बसर देश छोड़कर भाग रहे थे वो रडार से गायब हो गया है।

वहीं दमिश्क अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दहशत और अराजकता का माहौल है। राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता जाने से आशंकित उनके वफादार देश से भागने की जद्दोजेहद में लगे हुए हैं।

हमा, अलेप्पो और दरा पर कब्जा करने के बाद होम्स चौथा प्रमुख शहर है जहां विद्रोहियों ने कब्जा जमा लिया है, जो वीडियो सामने आए हैं वो शहर पर कब्जे की कहानी को बयां कर रहे हैं। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रमुख शहर होम्स पर नियंत्रण के लिए सरकारी बलों से लड़ रहे सीरियाई विद्रोहियों के बीच गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं और विद्रोही लड़ाके सड़कों पर दिख रहे हैं।

विद्रोही लड़ाके राजधानी दमिश्क में दारा शहर की तरफ से घुसे हैं, जिस पर उन्होंने 6 दिसंबर को कब्जा किया था। दारा वही शहर है, जहां से 2011 में राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत हुई थी और पूरे देश में जंग के हालात हो गए थे। दारा से राजधानी दमिश्क की दूरी करीब 100 किमी है। यहां स्थानीय विद्रोहियों ने कब्जा किया है। वहीं, अलेप्पो, हमा और होम्स इस्लामी चरमपंथी ग्रुप हयात तहरीर अल-शाम की गिरफ्त में है।

विद्रोहियों ने गोलियां चलाकर मनाया जश्न

केंद्रीय शहर से सेना के हटने के बाद हजारों होम्स निवासी सड़कों पर उतर आए और “असद चला गया, होम्स आजाद है” और “सीरिया अमर रहे, बशर अल-असद मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए जश्न मनाया। विद्रोहियों ने जश्न में हवा में गोलियां चलाईं, जबकि उत्साहित युवकों ने सीरियाई राष्ट्रपति के पोस्टर फाड़ दिए। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, जब विपक्षी लड़ाके राजधानी के उपनगरीय इलाकों में पहुंचे, तब 24 वर्षों तक देश के शासक रहे बशर असद का पता नहीं चल पाया था।

सीरिया में 27 नवंबर को सेना और विद्रोही गुटों के बीच संघर्ष शुरू हुआ

सीरिया में 27 नवंबर को सेना और सीरियाई विद्रोही गुट हयात तहरीर अल शाम (HTS) के बीच संघर्ष शुरू हुआ था। इसके बाद 1 दिसंबर को विद्रोहियों ने उत्तरी शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया। इसके 4 दिन बाद विद्रोही गुटों ने एक और बड़े शहर हमा पर भी कब्जा कर लिया। विद्रोहियों ने दक्षिणी शहर दारा पर कब्जा करने के बाद राजधानी दमिश्क को दो दिशाओं से घेर लिया है। दारा और राजधानी दमिश्क के बीच सिर्फ 90 किमी की दूरी है।

दूरी : हिंदी की महत्ता और अंग्रेजी का प्रभाव

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प्रशांत कटियार ✍️

 

भारत की बहुभाषी संस्कृति में हिंदी एक महत्वपूर्ण भाषा रही है, जो न केवल हमारी पहचान को दर्शाती है, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी समेटे हुए है। लेकिन आज के युग में, अंग्रेजी शिक्षा के बढ़ते प्रभाव ने हमें हमारी मूल संस्कृति से दूर कर दिया है।

सेंट लारेंस , सेंट एंथनी,सेंट जेवियर्स जैसे कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का उदय, न केवल शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह हमारी राज भाषा हिंदी की स्थिति को भी कमजोर कर रहा है।अंग्रेजी का बढ़ता चलन इस बात का संकेत है कि हम अपनी भाषाई पहचान को भूलते जा रहे हैं। कई लोग अंग्रेजी में बात करके अपनी काबिलियत का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन क्या यह जरूरी है कि हम अपनी मातृभाषा को छोड़ दें? यह सच है कि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में अंग्रेजी का प्रयोग होता है, लेकिन क्या यह सही है कि वादी और प्रतिवादी को निर्णय की सही जानकारी न हो? न्याय का अर्थ केवल कानून का पालन करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सभी पक्षों को समझ में आए।हाल ही में सरकार ने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कुछ कानूनों में बदलाव किया है, जो स्वागत योग्य है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हमारी राज भाषा हिंदी के प्रति भी कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। जब हम अपनी भाषा को महत्व नहीं देंगे, तब हम अपनी पहचान को भी खो देंगे।सरकार को चाहिए कि वह हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस नीतियाँ बनाए। स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए, और सरकारी कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाया जाए। इसके अलावा, हमें समाज में भी इस बात को समझाना होगा कि हिंदी में बात करना कोई कमतरता नहीं, बल्कि गर्व का विषय है।हमें अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान को सहेजने का प्रयास करना चाहिए। हिंदी को उसका उचित स्थान दिलाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। यह केवल एक भाषा का सवाल नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक एकता और पहचान का सवाल है।

 

प्रशांत कटियार स्टेट हेड (दैनिक यूथ इंडिया )
प्रशांत कटियार स्टेट हेड (दैनिक यूथ इंडिया )

उत्तर प्रदेश में ठंड का बढ़ता प्रकोप, कोहरे का अलर्ट जारी

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Fog

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम में बदलाव के साथ सर्दी का असर बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर घने कोहरे (Fog) और ठंडी हवाओं (Cold Wave) के चलते सावधानी बरतने की सलाह दी है। अगले 48 घंटों में तापमान में 2-3 डिग्री तक गिरावट की संभावना जताई गई है।

कानपुर में शुक्रवार को तेज हवाओं के कारण न्यूनतम तापमान 9.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने शनिवार से बादलों की घेराबंदी और रविवार को हल्की बारिश की संभावना जताई है। बारिश के बाद ठंड और बढ़ने की उम्मीद है।

आगरा में तापमान में गिरावट का दौर जारी है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री की कमी दर्ज की गई। शनिवार को आसमान साफ रहेगा, लेकिन रविवार से कोहरा छाने की संभावना है। तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

मुजफ्फरनगर में कोहरे ने दस्तक दे दी है, जिससे सुबह और रात की ठंड बढ़ गई है। जिला अस्पताल में नजला, जुकाम और सांस की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

मौसम विभाग ने लोगों को कोहरे और ठंडी हवाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

धर्म, जनहित और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में मुख्यमंत्री का प्रयास

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CM Yogi

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर में शताब्दी समारोह के अवसर पर कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को संबोधित किया। उनके वक्तव्य न केवल धार्मिक आस्था और राष्ट्रधर्म के महत्व को रेखांकित करते हैं, बल्कि जनहित और प्रशासनिक सुधारों की उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करते हैं। यह दौरा उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्जीवित करने और नागरिक समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने का एक और प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने शताब्दी समारोह के दौरान संतों और नागरिकों को राष्ट्रधर्म निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, “जब तक देश सुरक्षित रहेगा, तब तक धर्म भी सुरक्षित रहेगा।” यह वक्तव्य न केवल देशभक्ति को प्रोत्साहित करता है, बल्कि धर्म और राष्ट्र के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

मुख्यमंत्री का यह विचार कि संतों का कोई व्यक्तिगत अस्तित्व नहीं होता, बल्कि उनका प्रत्येक कार्य देश और समाज के लिए होना चाहिए, आधुनिक संदर्भ में धर्म के वास्तविक स्वरूप को परिभाषित करता है। उन्होंने धर्म को केवल पूजा और आध्यात्मिकता तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी से जोड़ा।

योगी आदित्यनाथ ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शिरकत की, जहां 401 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद और उपहार प्रदान किए। सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता और दहेज प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैं। मुख्यमंत्री ने दहेज प्रथा को एक “सामाजिक संकट” बताते हुए इस प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की अपील की। सामूहिक विवाह जैसी घटनाएं गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक रूप से राहत प्रदान करती हैं और समाज में समानता और सौहार्द को बढ़ावा देती हैं।

दहेज प्रथा जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री का रुख न केवल उनकी सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह उनकी नीति का हिस्सा भी है, जिसमें वह महिलाओं और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हैं।
मुख्यमंत्री ने वाराणसी के चौराहों पर शिव धुन बजाने की व्यवस्था का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काशी में शिव धुन की ध्वनि एक बार फिर गूंजनी चाहिए। यह कदम धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की दिशा में उठाया गया है।

शिव धुन का प्रसार न केवल क्षेत्रीय संस्कृति को जीवंत बनाएगा, बल्कि यह वाराणसी को उसकी पारंपरिक पहचान को सुदृढ़ करने में भी मदद करेगा। इसी तरह, प्रयागराज में महाकुंभ से पहले शिव धुन बजाने का निर्देश एक ऐसी पहल है, जो उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने इसे स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के एक साधन के रूप में भी देखा है।

मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अधिकारियों को प्रशासनिक सुधारों और जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और आईजीआरएस के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगा, बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि “प्रशासनिक देरी ग्रामीण अशांति का कारण बन सकती है,” और इसे रोकने के लिए अधिकारियों को सतर्क रहना होगा।

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों को लंबित न रखने और शीघ्र निस्तारण की अपील की। यह निर्देश नागरिकों की समस्याओं के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने धर्म और विकास के बीच एक संतुलन कायम करने का प्रयास किया है। उनका यह दौरा इसी दृष्टिकोण का प्रमाण है, जहां उन्होंने धर्म को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता से जोड़ा और जनहित को सर्वोपरि रखा।

योगी आदित्यनाथ ने धर्म को केवल आस्था तक सीमित न रखते हुए इसे राष्ट्रीय और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा।शिव धुन जैसे धार्मिक प्रयासों ने सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया। सामूहिक विवाह कार्यक्रम ने सामाजिक सुधारों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने जनशिकायतों के त्वरित समाधान और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया। यह दृष्टिकोण राज्य में कानून व्यवस्था और नागरिकों की समस्याओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वाराणसी दौरा न केवल धार्मिक आस्था और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने का प्रयास था, बल्कि यह प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी था। उन्होंने धर्म को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, और जनहित से जोड़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी नीतियां संतुलन और प्रगति की ओर केंद्रित हैं।

इस दौरे से यह संदेश मिलता है कि जनहित, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, और प्रशासनिक सुधार ही उत्तर प्रदेश की प्रगति की कुंजी हैं। मुख्यमंत्री ने नागरिकों, संतों और अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों को समझने और राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

कोतवाल का दबाव: पीड़ित से तहरीर बदलवाने की कोशिश

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फतेहगढ़। मोहल्ला हाथीखाना निवासी सूरज कुशवाहा की पत्नी रोहिणी देवी को पड़ोसी युवक अभिषेक द्वारा बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का मामला सामने आया है। साथ ही, अभिषेक ने घर से एक लाख रुपये की नगदी और सोने-चांदी के जेवरात भी चुरा लिए। पीड़ित सूरज कुशवाहा और उसके परिजन पत्नी की तलाश में भटकते रहे, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाली में लिखित तहरीर दी। कोतवाल ने तहरीर पढ़ते ही पीड़ित पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि वह तहरीर बदल दे। कई बार कोतवाली के चक्कर लगाने के बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।निराश होकर सूरज कुशवाहा ने पुलिस अधीक्षक से भी संपर्क किया और अपनी पीड़ा सुनाई। पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि मूल तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और पीड़ित को कोतवाली भेजा। लेकिन कोतवाल ने इस आदेश का पालन नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस प्रशासन पीड़ित की सहायता करने में असफल रहा है।इस घटना ने पुलिस की जवाबदेही और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।

सपा विधायक ने अखिलेश यादव के ईवीएम बयान को नकारा, निष्पक्ष चुनावों की सराहना की

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Raees Sheikh

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख (Raees Sheikh) ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ईवीएम और चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों का खंडन किया है। शेख ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र भिवंडी पूर्व में चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुए थे। उन्होंने चुनाव आयोग, पुलिस प्रशासन और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से काम कर रहे थे। शेख ने ईवीएम में किसी प्रकार की गड़बड़ी को सिरे से खारिज कर दिया और इसे लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।

शेख ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 52,015 मतों के अंतर से जीत हासिल की, जो इस साल चुने गए 10 मुस्लिम विधायकों में सबसे बड़ी जीत थी। उन्होंने अपने विजय भाषण में कहा, “लोगों ने साबित कर दिया है कि काम बोलता है। हमने सभी समुदायों के लिए काम किया और यही कारण था कि हमें भारी जनादेश मिला। भिवंडी में करीब 97% मुस्लिम और 9.8% गैर-मुस्लिम मतदाताओं ने उनका समर्थन किया।”

इससे पहले, अखिलेश यादव ने लोकसभा में ईवीएम पर संदेह जताया था और कहा था कि भले ही उनकी पार्टी यूपी की सभी 80 सीटें जीत ले, वह ईवीएम पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने इसे लेकर अपनी चिंता दोहराई और कहा कि यह मुद्दा तब तक हल नहीं होगा, जब तक ईवीएम का उपयोग बंद नहीं हो जाता।

इस बीच, चुनाव आयोग और ईवीएम के संबंध में विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। अदालत ने ईवीएम की सुरक्षा और इसकी संभावित हैकिंग को लेकर विपक्ष की चिंताओं को खारिज करते हुए इसे सुरक्षित और विश्वसनीय बताया था।

रईस शेख के बयान ने अखिलेश यादव के बयान से विपरीत रुख अपनाया है, जिससे पार्टी में एक अंदरूनी मतभेद नजर आ रहा है। शेख का कहना है कि भिवंडी जैसे क्षेत्र में जहां मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं, वहां भी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी थे, जो कि ईवीएम की विश्वसनीयता को साबित करता है।