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Tuesday, June 9, 2026
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एक भारत-श्रेष्ठ भारत व सुरक्षित भारत की पृष्ठभूमि में सरदार पटेल की सोच, प्रयास व परिश्रमः योगी

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल वर्तमान भारत के शिल्पी थे। उनका पूरा जीवन राष्ट्र व भारत मां के चरणों में समर्पित था। 1946 में देश के संविधान सभा का गठन हुआ। उसके प्रमुख सदस्य और स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने न केवल देश के एकीकरण के वर्तमान अभियान को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं, बल्कि 563 से अधिक रियासतों को भारत गणराज्य का हिस्सा बनाया। आज जो भारत देख रहे हैं, यह सरदार पटेल की सूझबूझ का परिणाम है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सुरक्षित भारत की पृष्ठभूमि में सरदार पटेल की सोच, प्रयास व परिश्रम है।

मुख्यमंत्री ने रविवार को भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शिरकत की। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

सरदार पटेल की संकल्पनाओं को मूर्त रूप देने का चल रहा अभियान

सीएम योगी ने कहा कि सरदार पटेल ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर देश की आजादी के आंदोलन को नई दिशा देने के लिए तत्कालीन नेतृत्व के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया। गुजरात के आणंद के पास छोटे गांव में सामान्य किसान परिवार में उनका जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा भी मां के सानिध्य में घर पर संपन्न हुई। इंग्लैंड से लॉ की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे भारत आए। सरदार पटेल का देहावसान 15 दिसंबर 1950 को हो गया। उनके नेतृत्व में भारत नई ऊंचाइयों को छूता। उनकी संकल्पनाओं को मूर्त रूप देने के लिए जो अभियान चल रहा है, वह एक भारत-श्रेष्ठ भारत की पीएम मोदी की परिकल्पना को साकार करेगा।

अन्नदाता किसानों की समृद्धि व उत्थान के लिए भी सरदार पटेल ने चलाए जनजागरण के अनेक अभियान

सीएम योगी ने कहा कि सरदार पटेल ने चंपारण आंदोलन, नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन समेत आजादी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आंदोलनों में भाग लिया। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें जेल की यातना भी झेलनी पड़ी थी। सरदार पटेल ने अन्नदाता किसानों की समृद्धि व उत्थान के लिए जनजागरण के अनेक अभियान भी चलाए। गुजरात में सहकारिता के मजबूत आंदोलन की पृष्ठभूमि में भी सरदार पटेल का विजन है। उन्होंने हर अन्नदाता किसान को समृद्धि की नई ऊंचाई तक पहुंचाया।

देश के एकीकरण के लिए सरदार पटेल ने चलाया अभियान

सीएम योगी ने कहाकि एक तरफ भारत मां के इस महान सपूत ने देश के एकीकरण के लिए अभियान को आगे बढ़ाया तो दूसरी तरफ गुलामी के कालखंड में जिन मानबिंदुओं का अपमान हुआ था, उनकी पुनर्स्थापना का भी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न कराया। सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार को हाथों में लेकर सांस्कृतिक भारत की स्थापना का जो अभियान चलाया था, उसी का परिणाम है कि सरदार पटेल के प्रति श्रद्धा व कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

नए सांस्कृतिक भारत का अभिन्न हिस्सा है राम मंदिर

सीएम योगी ने कहा कि सरदार पटेल होते तो कश्मीर में धारा-370 कभी लागू नहीं हो पाती। छद्म रूप से जिन लोगों ने धारा-370 को डालकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत के मार्ग में बैरियर खड़ा किया, उसे पीएम मोदी ने 5 अगस्त 2019 को हटाकर आतंकवाद की नींव को समाप्त कर दिया। अयोध्या में राम मंदिर भी नए सांस्कृतिक भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसका शुभारंभ 1948 में लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर से किया था।

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक शशांक वर्मा, अमरेश कुमार, आशीष सिंह ‘आशु’, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, इंजी. अवनीश कुमार सिंह, रामचंद्र प्रधान, उमेश द्विवेदी, आयोजन समिति की अध्यक्ष राजेश्वरी देवी वर्मा, डीएम कटियार, दिनेश सचान, डॉ. इंद्रेश्वर वर्मा आदि मौजूद रहे।

मोबाइल और कम्प्यूटर का कहर आँखों पर

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कम्प्यूटर पर अधिक देर तक काम करने और मोबाइल (Mobile) के अंधाधुंध उपयोग के कारण आँखों में दर्द होना आम बात हो गई है। जापानी वैज्ञानिकों ने कम्प्यूटर,लेपटॉप और मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोगों की आँखों का परीक्षण कर पाया है कि इससे ग्लूकोमा सहित कई बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है।

जापान स्थित टोटो यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने लगभग दस हजार कर्मचारियों पर अध्ययन कर पाया कि कम्प्यूटर सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का अधिक उपयोग करने वालों की दृष्टि कमजोर हो गई थी और आगे चलकर यह ग्लूकोमा में बदल गयी। ग्लूकोमा में आँख की नसें धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं और अगर इनका समय रहते उपचार नहीं किया जाए, तो व्यक्ति के अंधे होने की आशंका बढ़ जाती है।

चार अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले लोगों की आँखों की जांच करने वाले डॉक्टर मासायुकी तातेचिमी ने लोगों की कम्प्यूटर के सामने बैठने की आदत के बारे में जानकारी एकत्रित की और कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने वालों को तीन श्रेणियों में बाँटा- मामूली, अधिक और अत्यधिक।

कम्प्यूटर का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने वाले लोगों में आँखों की बीमारियां अधिक पायी गयी। इन लोगों की पास की नजर तो कमजोर थी ही, अधिकांश की आंखें ग्लूकोमा की शिकार भी पाई गई।

अब तो यह माना जा रहा है कि जैसे-जैसे कम्प्यूटर लेपटॉप और मोबाइल का उपयोग बढ़ रहा है, आँखों की बीमारियाँ भी बढ़ती जाएंगी और इनके उपचार के लिए और अधिक सुविधाओं की आवश्यकता होगी।

Atul Case: पत्नी निकिता गुरुग्राम से अरेस्ट, सास और साला प्रयागराज में पकड़े गए

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जौनपुर। बेंगलुरु में इंजीनियर अतुल सुभाष के सुसाइड केस (Atul Suicide Case) में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया गिरफ्तार कर लिया गया है। इन तीनों समेत कुल चार लोग अतुल को सुसाइड के लिए उकसाने के मामले में आरोपी हैं। बेंगलुरु पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

डीसीपी व्हाइट फील्ड डिवीजन (बेंगलुरु) शिवकुमार ने बताया कि अतुल सुभाष सुसाइड केस में आरोपी निकिता सिंघानिया को हरियाणा के गुरुग्राम से अरेस्ट किया गया है, जबकि आरोपी निशा सिंघानिया और अनुराग सिंघानिया को प्रयागराज से अरेस्ट किया गया है। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले शनिवार को सभी आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी।

क्या है पूरा मामला

मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले अतुल सुभाष बीते सोमवार को बेंगलुरु में मराठाहल्ली के मुन्नेकोलालू स्थित अपने घर में मृत पाए गए। यह खौफनाक कदम उठाने से पहले अतुल ने एक 80 मिनट का वीडियो और 24 पन्नों के सुसाइड नोट के जरिए अपनी पत्नी निकिता सिंघानिया और ससुराल वालों पर उन्हें और उनके परिजनों को कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल करके प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे ही सुसाइड की वजह बताया। बेंगलुरु पुलिस को उनके कमरे में एक तख्ती भी लटकी मिली है, जिसमें लिखा था कि ‘न्याय मिलना बाकी है’।

मृतक अतुल सुभाष के भाई बिकास कुमार की शिकायत पर बेंगलुरू की मराठाहल्ली पुलिस ने पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया, पत्नी के भाई अनुराग संघानिया और चाचा सुशील सिंघानिया के खिलाफ BNS की धारा 108 और 3(5) के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। पुलिस ने इस मामले में सख्त एक्शन लेने की बात कहते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में काम करने वाले अतुल सुभाष ने अपना 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने शादी के बाद जारी तनाव और उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों का उल्लेख किया है।

अतुल ने सुसाइड नोट में जिक्र किया कि कैसे उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया और उनके ससुराल वालों ने उन्हें और उनके माता-पिता व भाई को कानून का गलत इस्तेमाल करके प्रताड़ित किया। अतुल ने सुसाइड करने से पहले डेढ़ घंटे का एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उन्होंने उन सभी परिस्थितियों का जिक्र किया। पुलिस ने बताया कि अतुल का शव मंजूनाथ लेआउट क्षेत्र में स्थित उनके आवास पर फंदे से लटका मिला। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साला अनुराग सिंघानिया फरार थे।

पुण्यतिथि : सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रेरणा

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प्रशांत कटियार (स्टेट हेड दैनिक यूथ इंडिया)
प्रशांत कटियार (स्टेट हेड दैनिक यूथ इंडिया)

सरदार वल्लभ भाई पटेल, जिन्हें ‘लौह पुरुष’ के नाम से जाना जाता है, ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अद्वितीय नेतृत्व और दृढ़ संकल्प ने न केवल भारत के विभाजन को रोका, बल्कि विभिन्न जातियों और धर्मों को एकजुट कर एक संपूर्ण राष्ट्र की नींव रखी। उनके शब्द “हमें निश्चय कर लेना चाहिए कि हमें हिंदुस्तान में भाई-भाई की तरह रहना है” आज भी हमारे लिए एक अमूल्य संदेश है।

 

पटेल जी का यह विचार हमें यह सिखाता है कि विविधता में एकता ही हमारी ताकत है। उन्होंने हमेशा यह विश्वास दिलाया कि चाहे कोई भी कौम हो—हिंदू, मुसलमान, सिख, पारसी या ईसाई—हम सभी को एक ही धागे में पिरोना है। उनके दृष्टिकोण ने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी, जिसमें सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान किया गया।

 

उनकी पुण्यतिथि पर, हमें यह याद करना चाहिए कि उनके विचार न केवल एक ऐतिहासिक संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। हमारे समाज में बढ़ती असहिष्णुता और विभाजन की भावना के बीच, पटेल जी की शिक्षाएं हमें एकजुटता और बंधुत्व का संदेश देती हैं।

आने वाली पीढ़ियों के लिए, सरदार पटेल का जीवन और उनके विचार प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। हमें उनके आदर्शों को अपनाते हुए राष्ट्र की सेवा में समर्पित रहना चाहिए। यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

लेखक दैनिक यूथ इंडिया के स्टेट हेड हैं।

आईजीआरएस पर गलत निस्तारण: अपराधों पर पर्दा डालने की कवायद, जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल

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उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अपराधों पर नकेल कसने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इसके तहत IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रीड्रेसल सिस्टम) को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में स्थापित किया गया है। इस पोर्टल का उद्देश्य जनता की शिकायतों का सही और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है। लेकिन हाल के आंकड़ों और घटनाओं से यह स्पष्ट हो रहा है कि कुछ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक कर्मी इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर मुख्यमंत्री की मंशा को पलीता लगा रहे हैं।

आईजीआरएस पर दर्ज शिकायतों का सही निस्तारण करने के बजाय, कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी आंकड़ों में सुधार दिखाने के लिए फर्जी तरीके से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। उदाहरणस्वरूप, शिकायतों को बिना उचित जांच के निस्तारित कर दिया जाता है, शिकायतकर्ता से संपर्क तक नहीं किया जाता, और कई मामलों में शिकायतों को “मामूली विवाद” या “असत्य” घोषित कर बंद कर दिया जाता है।

आंकड़े बताते हैं कि 2024 की शुरुआत से अब तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज अपराधों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। लेकिन IGRS पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की उच्च दर ने सवाल खड़े कर दिए हैं। 2024 में दर्ज अपराध: करीब 3 लाख मामले। IGRS पर दर्ज शिकायतें: 5 लाख से अधिक। निस्तारित मामलों का प्रतिशत: 95%। इन आंकड़ों को देखने पर लगता है कि पुलिस ने अत्यधिक कुशलता से शिकायतों का निस्तारण किया है। लेकिन जब इन मामलों की पड़ताल की जाती है, तो यह सामने आता है कि इनमें से 60% शिकायतों का निस्तारण बिना शिकायतकर्ता से संपर्क किए किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें न तो निस्तारण प्रक्रिया में शामिल किया गया, न ही उनके द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि की गई।

एक मामले में, फर्रुखाबाद में दर्ज एक विवाद की शिकायत को गलत साबित कर क्षेत्राधिकारी नगर ने फर्जी ही निस्तारित कर दिया,और कुख्यात माफिया अनुपम दुबे के साथी पर कार्यवाही न कर शिकायतकर्ता को ही अपराधी घोषित कर दिया,जबकि शिकायतकर्ता को कोई समाधान नहीं मिला। कई मामलों में, पुलिस ने शिकायतों को “असत्य” करार देते हुए फर्जी रिपोर्ट दर्ज की। उदाहरण: लखनऊ में दर्ज एक घरेलू हिंसा के मामले में पीड़िता ने दावा किया कि पुलिस ने जांच किए बिना मामला बंद कर दिया।

आईजीआरएस पर “टॉप प्रदर्शन” दिखाने का दबाव अधिकारियों को गलत तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लेकिन IGRS पर गलत निस्तारण ने सरकार की इस नीति को कमजोर कर दिया है। जब शिकायतें सही तरीके से नहीं निपटाई जातीं, तो जनता का पुलिस और प्रशासन पर से विश्वास उठने लगता है। गलत निस्तारण के कारण अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे उनके हौसले और बुलंद हो जाते हैं।

IGRS जैसे पोर्टल का सही उपयोग पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही ला सकता है। लेकिन इसके लिए कुछ सुधार आवश्यक हैं। कई अधिकारियों और कर्मचारियों को IGRS के सही उपयोग का प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। निचले स्तर के अधिकारियों पर ऊपरी अधिकारियों का दबाव होता है कि वे निस्तारण दर को ऊंचा रखें। निस्तारण की संख्या पर अधिक जोर दिया जाता है, जबकि गुणवत्ता की अनदेखी की जाती है।

IGRS पोर्टल के जरिए शिकायतों की प्रगति को सटीक रूप से मॉनिटर किया जा सकता है। अगर शिकायतकर्ता को निस्तारण प्रक्रिया में शामिल किया जाए, तो इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। पोर्टल के जरिए समय सीमा के भीतर शिकायतों का निपटारा सुनिश्चित किया जा सकता है।

IGRS पर दर्ज शिकायतों की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी बनाई जानी चाहिए, जो पुलिस पर दबाव डाले बिना निष्पक्ष जांच कर सके। शिकायत को बंद करने से पहले शिकायतकर्ता से उसकी सहमति ली जानी चाहिए। अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन निस्तारित शिकायतों की संख्या के बजाय उनकी गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए।
गलत निस्तारण करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता को IGRS के सही उपयोग और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

IGRS पोर्टल एक प्रभावी उपकरण है, लेकिन इसके दुरुपयोग ने इसे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। गलत निस्तारण के कारण न केवल मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति कमजोर हो रही है, बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन से उठ रहा है। अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह व्यवस्था जनता और सरकार दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। आंकड़े बताते हैं कि निस्तारण दर भले ही बढ़ी हो, लेकिन उनकी गुणवत्ता में कमी आई है। यह दर्शाता है कि सुधार के लिए कठोर कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

ऊर्जा संरक्षण दिवस 2024 का आयोजन

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लखनऊ। ऊर्जा संरक्षण दिवस 2024 (Energy Conservation Day) के अवसर पर 14 दिसंबर को होटल रेनेंस, लखनऊ में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण के महत्व को उजागर करना और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन यूपीनेडा के सचिव पंकज सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने ऊर्जा संरक्षण को देश की प्रगति और सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में प्रमुख ऊर्जा सलाहकार गिरीश कुमार ने ऊर्जा संरक्षण के प्रति लोगों की प्रतिबद्धता की सराहना की और दैनिक जीवन में ऊर्जा की खपत कम करने के उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सौर ऊर्जा, बायो गैस और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के अधिकतम उपयोग का सुझाव दिया ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “नेट जीरो” लक्ष्य को साकार किया जा सके।

सचिव पंकज सिंह ने अपने उद्बोधन में यूपीनेडा द्वारा ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि “परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड” योजना के तहत 29,000 मिलियन यूनिट बिजली की खपत कम की गई है। इससे 240 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। इसके अलावा, यूपीनेडा ने राज्य में ग्रीन बिल्डिंग कोड लागू करने के लिए आर्किटेक्ट्स और बिल्डर्स को प्रशिक्षित करने की भी पहल की है।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि वी के श्रीवास्तव ने कार्बन एकाग्रता को कम करने और ऊर्जा संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

अंत में, यूपीनेडा के सचिव पंकज सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और ऊर्जा संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।