34.3 C
Lucknow
Tuesday, June 9, 2026
Home Blog Page 4992

46 साल बाद खुले शिव मंदिर के कपाट, भक्तों ने की आरती हनुमान चालीसा का पाठ

0

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के खग्गू सराय इलाके में 46 साल से बंद पड़े प्राचीन शिव और हनुमान मंदिर (Temple) के कपाट रविवार को खोले गए। पुलिस-प्रशासन की देखरेख में मंदिर को अतिक्रमण मुक्त कराकर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सुबह भोर होते ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

मंदिर परिसर में आरती और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ महादेव और हनुमान जी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। दशकों बाद इस मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान होने से श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।

46 साल से बंद मंदिर में हुई पूजा-अर्चना

भोर होते ही भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और आरती व मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए भक्तों ने महादेव और हनुमान जी के जयकारे लगाए। इलाके के लोगों ने मंदिर खुलने पर प्रशासन की सराहना की। माना जा रहा है कि यह मंदिर करीब 200 वर्ष या उससे भी अधिक पुराना हो सकता है। इसकी ऐतिहासिकता की जांच पुरातत्व विभाग से कराई जाएगी।

1978 के दंगे के बाद बंद हो गया था मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार, 1978 में हुए दंगे के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना बंद हो गई थी। उस समय खग्गू सराय में लगभग 40 हिंदू (रस्तोगी) परिवार रहते थे, जो दंगों के बाद इलाके को छोड़कर चले गए थे। 82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि यह मंदिर उनके पूर्वजों द्वारा स्थापित किया गया था। परिवार के लोग नियमित पूजा करते थे, लेकिन इलाके से पलायन के बाद मंदिर की देखभाल नहीं हो सकी।

मंदिर परिसर में कुआं भी मिला, शुरू होगी जांच

डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि गुप्त सूचना पर मंदिर की पहचान की गई और ताले खुलवाए गए। मंदिर परिसर में एक पुराना कुआं भी मिला है, जिसे बंद कर दिया गया था। प्रशासन ने कुएं की खुदाई कराई और अब इसे दोबारा सहेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मंदिर की प्राचीनता पर होगी पुरातात्विक जांच

डीएम ने बताया कि मंदिर की ऐतिहासिकता का पता लगाने के लिए पुरातत्व विभाग से जांच कराई जाएगी। 82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी के अनुसार, उनके पूर्वजों ने भी इस मंदिर को अत्यंत प्राचीन बताया था। अनुमान है कि यह मंदिर 200 साल या उससे अधिक पुराना हो सकता है।

डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि संभल के ऐसे तीर्थस्थलों और प्राचीन कूपों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो समय के साथ विलुप्त हो गए हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर के पुनरुद्धार से स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। प्रशासन द्वारा मंदिर की नियमित देखरेख और पूजा की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

आरक्षी मंजीत की धूमधाम से विदाई

0

फर्रूखाबाद। थाना जहानगंज से थाना शमसाबाद में आरक्षी मंजीत सिंह का तबादला हुआ, जिसकी विदाई समारोह धूमधाम से आयोजित की गई। इस मौके पर थानाध्यक्ष जितेंद्र पटेल, दरोगा लव कुमार, धीरज कुमार, रामबाबू और आरक्षी विनय चौहान ,आशीष , दुरवीन कुमार आदि ने मंजीत सिंह को माला पहनाकर विदाई दी।विदाई समारोह में थानाध्यक्ष जितेंद्र पटेल ने मंजीत सिंह की सेवा और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा, मंजीत सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।आरक्षी मंजीत सिंह ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, यहाँ बिताया गया समय मेरे लिए बहुत यादगार रहा है। मैं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करता हूँ और शमसाबाद थाना में नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हूँ।समारोह में उपस्थित सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने मंजीत सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विदाई समारोह में मिठाई और नाश्ते का भी आयोजन किया गया, जिससे सभी ने मिलकर इस खास पल को साझा किया।

 

 

भारत के शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटना: कौशल के माध्यम से ग्रामीण शिक्षार्थियों को सशक्त बनाना

0

विजय गर्ग

भारत की विशाल विविधता संस्कृति और भाषा से परे फैली हुई है, जो शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों तक असमान पहुंच में प्रकट होती है भारत महान भाषाई, सांस्कृतिक, नस्लीय, सामाजिक और आर्थिक विविधता वाला देश है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पास कौशल, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं जो अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों (Urban-Rural) के लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। पिछले एक या दो दशकों में, कई कारकों के कारण कौशल और शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में काफी वृद्धि और विकास हुआ है

सरकारों – केंद्र और राज्य दोनों – ने महसूस किया है कि भारत अपने जबरदस्त जनसांख्यिकीय लाभांश से एकमात्र तरीका यह सुनिश्चित कर सकता है कि कामकाजी उम्र के व्यक्ति तेजी से वैश्विक कार्यस्थलों में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस हों। केंद्र और राज्य कौशल संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर सिस्टम बनाए हैं जो भारत भर के हर जिले तक पहुंचते हैं और अब तक वंचित दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले संसाधन उपलब्ध कराते हैं। कॉर्पोरेट क्षेत्र ने, प्रचलित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कानूनों का लाभ उठाते हुए, सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग करके और सह-वित्तपोषण, सामग्री, प्रमाणन और नौकरी के अवसरों के साथ उनका समर्थन करके भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रशिक्षण महानिदेशालय (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय) हजारों संस्थानों के एक नेटवर्क का प्रबंधन करता है जो हर साल सैकड़ों हजारों शिक्षार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले कौशल उपलब्ध कराने के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र और नागरिक समाज के साथ सहयोग करते हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, हजारों इंजीनियरिंग संस्थानों के अपने नेटवर्क के माध्यम से, भारत भर के शिक्षार्थियों को उनके स्थान या सामाजिक-आर्थिक सीमाओं के बावजूद, अत्याधुनिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, एडुनेट फाउंडेशन, राष्ट्रीय स्तर पर इंजीनियरिंग कॉलेजों, राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षार्थियों के लिए आईटी स्पेक्ट्रम में कोर्सवेयर और कौशल उपलब्ध कराता है, और हर साल लाखों शिक्षार्थियों के साथ सीधे काम करता है। ये कार्यक्रम कक्षा में सीखने, समकालिक वीडियो, ऑनलाइन सामग्री और व्यावहारिक परियोजना कार्य का लाभ उठाते हुए मिश्रित मोड में पेश किए जाते हैं।

जबकि कौशल और शिक्षा के अवसरों की उपलब्धता है, ऐसे कई मुद्दे हैं जो इन कार्यक्रमों के लाभों को सीमित करते हैं। सबसे बड़ी समस्या प्रौद्योगिकी तक पहुंच की है। चूंकि पाठ्यक्रम मिश्रित मोड में पेश किए जाते हैं, इसलिए शिक्षार्थियों को केवल मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि उच्च बैंडविड्थ इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले कंप्यूटर तक पहुंच की आवश्यकता होती है। भारत में लगभग हर घर में मोबाइल फोन की पहुंच है, लेकिन बड़े उपकरण जो प्रौद्योगिकी में अनुभवात्मक सीखने के लिए अधिक अनुकूल हैं, व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

सरकार और कॉर्पोरेट हितधारक दोनों ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षार्थियों को दान देकर और/या इन क्षेत्रों में मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों के परिसर के भीतर प्रयोगशालाएं और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करके वर्तमान प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। दूसरा मुद्दा स्थानीय रोजगार तक पहुंच का है।

अधिकांश नौकरियाँ – विशेष रूप से प्रौद्योगिकी-केंद्रित – प्रमुख शहरों और कस्बों के आसपास केंद्रित हैं। जो शिक्षार्थी रोजगार के लिए पलायन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह एक बड़ी बाधा है। इसके अतिरिक्त, निस्संदेह, शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रवासन से जुड़ी कई समस्याएं हैं। स्थानीय कैरियर के अवसर पैदा करने की आवश्यकता है जो लोगों को अनुमति देकिसी बड़े शहर या कस्बे में स्थानांतरित होने की आवश्यकता के बिना, वे जहां भी हों, लाभप्रद ढंग से काम करते हैं। यह उद्यमशीलता पर लगातार ध्यान केंद्रित करके किया जा सकता है जो स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करता है और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में मदद करता है।

ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमिता, विशेष रूप से कृषि और संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित, बड़े पैमाने पर प्रवासन और असंतुलित आर्थिक विकास से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान कर सकती है। इस प्रकार निर्मित स्थानीय व्यवसाय, स्थानीय अर्थव्यवस्था को चलाएंगे और स्थानीय रोजगार पैदा करेंगे। ग्रामीण उद्यम पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करके भारत को मदद मिलेगी।

सरकार और कॉर्पोरेट क्षेत्र द्वारा कई कार्यक्रम हैं जो इसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नागरिक समाज के समर्थन से उन्हें बढ़ाने और अधिक शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है। ऐसे माहौल में जहां ग्रामीण शिक्षार्थियों के पास प्रौद्योगिकी और रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, सरकार और कॉर्पोरेट क्षेत्र की कौशल पहल बड़ा प्रभाव डालेगी। शिक्षार्थी स्थानीय स्तर पर सीखने और कमाने में सक्षम होंगे, जिससे शहरी-ग्रामीण विभाजन को कम किया जा सकेगा।

Noida Authority के निलंबित अफसर के घर छापा, मिला अकूत दौलत का खजाना

0

नोएडा। यूपी में नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Development Authority) के तत्कालीन ओएसडी रवींद्र सिंह यादव (OSD Ravindra Yadav) के ठिकानों पर विजिलेंस ने शनिवार को छापेमारी की है। टीम उनके नोएडा स्थित आवास और इटावा के स्कूल पहुंची। यहां काफी देर तक छानबीन की। रवींद्र यादव (Ravindra Yadav) वर्तमान में निलंबित चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में नोएडा विकास प्राधिकरण के विशेष कार्य अधिकारी रहे रवींद्र सिंह यादव के नोएडा और इटावा स्थित ठिकानों पर विजिलेंस ने 18 घंटे तक रेड डाली। रेड में रवींद्र यादव के घर से 60 लाख के गहने और 2.5 ​कैश बरामद हुए। विजिलेंस टीम शनिवार को उनके नोएडा स्थित आवास और इटावा के स्कूल पहुंची थी। रवींद्र यादव  वर्तमान में निलंबित चल रहे हैं। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में यह कार्रवाई हुई है। रवींद्र यादव के खिलाफ जांच के बाद आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया था। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिसके बाद रवींद्र सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यूपी विजिलेंस डिपार्टमेंट ने एफआईआर दर्ज की थी।

कोर्ट से सर्च वारंट लेने के बाद यूपी विजिलेंस डिपार्टमेंट के मेरठ सेक्टर की टीमों ने 14 दिसंबर को रवींद्र यादव के नोएडा स्थित आवास और इटावा स्थित स्कूल पर छापेमारी की। सर्च के दौरान नोएडा सेक्टर-47, स्थित उनके तीन मंजिला आवासीय परिसर से 60 लाख से अधिक के जेवर और 2.5 लाख कैश बरामद हुए। रवींद्र यादव  के नोएडा वाले घर की वर्तमान कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है। घरे में लगे सामानों व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनुमानित कीमत 37 लाख रुपये है।

रवींद्र यादव के घर से विजिलेंस टीम को पासपोर्ट मिले हैं। विजिलेंस की टीम उनके परिजनों द्वारा की गईं विदेश यात्राओं की जानकारी जुटा रही है. उनके पास दो चार पहिया वाहनों (इनोवा और क्विड) के संबंध में भी जानकारी एकत्रित की जा रही है। इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंको में 06 अकाउंट, पॉलिसियों व इन्वेस्टमेंट से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

आरोपी रवींद्र यादव ने लगभग एक दर्जन जमीनें खरीदी थीं, जिनका दस्तावेज विजिलेंस टीम के हाथ लगा है। इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। आरोपी के नोएडा आवास से ही एरिस्टोटल वर्ल्ड स्कूल, मलाजनी, तहसील जसवंतनगर, इटावा के पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुए हैं. स्कूल की भूमि व इमारत की वर्तमान अनुमानित मूल्य 15 करोड़ रुपये है। स्कूल सोसाइटी के अध्यक्ष रवींद्र यादव के पुत्र निखिल यादव हैं। स्कूल में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगा है। स्कूल में लगे सभी उपकरणों एवं फर्नीचर की अनुमानित कीमत 2 करोड़ रुपये है। स्कूल की 10 बसें चलती हैं।

टल गया ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ बिल, कल लोकसभा में नहीं होगा पेश

0
One Nation One Election

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation One Election) के मुद्दे को लेकर एक अहम कदम उठाया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सोमवार को लोकसभा में यूनियन टेरेटरीज (संशोधन) बिल 2024 और संविधान संशोधन बिल (100 और 29) पेश करेंगे, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया है। सोमवार को लोकसभा की संशोधित कार्य सूची में इस विधेयक का नाम शामिल नहीं किया गया, जबकि पहले इसे सूचीबद्ध किया गया था।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव  ने कहा कि इतनी बड़ी रिपोर्ट को अब तक पढ़ा नहीं गया है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह मौका मिल सकता है कि वह राज्यों और केंद्र की सरकारों को भंग कर दें और दोबारा चुनाव कराए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के जुमलों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। वहीं, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इसे देश के संघीय ढांचे पर प्रहार बताया।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation One Election)  को देश के हित में बताया। उन्होंने कहा कि इससे चुनावों के खर्चों में कमी आएगी और पैसे की बचत होगी। गिरिराज सिंह ने यह भी बताया कि 1967 तक देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation One Election)  ही हो रहा था और उस समय संघीय संरचना पर कोई आंच नहीं आई थी।उनका कहना था कि इस प्रस्ताव से देश को और मजबूती मिलेगी और विकास में कोई रुकावट नहीं आएगी।

मोदी सरकार के इस फैसले से यह साफ है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation One Election)  का मुद्दा अब और भी गंभीर होता जा रहा है, और इसके पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क जोर पकड़ रहे हैं।

अच्छा इंसान बनने के लिए सिर्फ पढ़ाई-लिखाई नहीं, परवरिश और संस्कार भी जरूरी हैं

0

आज के समाज में शिक्षा को सबसे बड़ी सफलता की कुंजी माना जाता है। माता-पिता और शिक्षक अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों को अधिक से अधिक पढ़ाई करनी चाहिए ताकि वे अच्छे अंक प्राप्त करें, प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश पाएं, और अपने करियर में ऊंचाई तक पहुंच सकें। हालांकि, यह विचारधारा अधूरी है। सिर्फ पढ़ाई-लिखाई से किसी व्यक्ति का अच्छा इंसान बनना संभव नहीं है। इसके लिए परवरिश और संस्कार (Culture) उतने ही जरूरी हैं जितना शिक्षा।

शिक्षा और संस्कार का परस्पर संबंध

शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करती है, लेकिन संस्कार उसे उस ज्ञान का सही उपयोग करना सिखाते हैं। जब ज्ञान और संस्कार का संतुलन होता है, तभी एक व्यक्ति समाज के लिए उपयोगी और नैतिक रूप से सुदृढ़ बन सकता है। केवल पढ़ाई से कोई डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक तो बन सकता है, लेकिन वह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी तभी निभा पाएगा जब उसमें सही संस्कार होंगे।

परवरिश केवल बच्चों की देखभाल करना ही नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे-बुरे का भेद समझाने और सही मूल्य प्रदान करने की प्रक्रिया है। घर में माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम होती है। एक बच्चे का आचरण उसके माता-पिता की सोच और व्यवहार का प्रतिबिंब होता है। अगर माता-पिता खुद सच्चाई, ईमानदारी और मेहनत के आदर्शों पर चलेंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे।

संस्कार वे नैतिक मूल्य हैं, जो व्यक्ति को जीवन में सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाते हैं। ये किसी व्यक्ति को यह समझने में मदद करते हैं कि सफलता केवल पैसे या प्रतिष्ठा में नहीं है, बल्कि यह दूसरों के प्रति दया, सहानुभूति और सहायता में भी है।

संस्कार व्यक्ति को यह सिखाते हैं कि:सच बोलना और गलत के खिलाफ खड़ा होना क्यों महत्वपूर्ण है।
अगर कोई व्यक्ति बहुत पढ़ा-लिखा है, लेकिन उसमें दया, सहानुभूति और ईमानदारी का अभाव है, तो उसकी शिक्षा अधूरी मानी जाएगी।

आज का युग प्रतिस्पर्धा का है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे बेहतर बने। इस दौड़ में अक्सर बच्चों के चरित्र निर्माण को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें परीक्षा में अच्छे अंक लाने, टॉप करने और बड़ी नौकरियां पाने के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन नैतिक मूल्यों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप, बच्चे भले ही करियर में सफल हो जाएं, लेकिन उनमें जीवन के लिए आवश्यक संवेदनशीलता और नैतिकता की कमी रह जाती है।
संस्कार और परवरिश के अभाव में शिक्षा व्यक्ति को अहंकारी बना सकती है। एक ऐसा व्यक्ति, जो केवल अपनी महत्वाकांक्षाओं के बारे में सोचता है और दूसरों के दुख-दर्द को नजरअंदाज करता है, समाज के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

उदाहरण के लिए, एक कुशल डॉक्टर, जो केवल पैसे कमाने के लिए काम करता है और रोगियों के प्रति सहानुभूति नहीं रखता, वह अपने ज्ञान का सही उपयोग नहीं कर पाएगा। इसी तरह, एक सफल बिजनेसमैन, जिसमें नैतिकता की कमी है, समाज को धोखा देकर या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर अपनी संपत्ति बना सकता है।

परिवार किसी भी बच्चे का पहला विद्यालय होता है। माता-पिता और दादा-दादी के साथ बिताया गया समय बच्चे के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालता है। परिवार के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दें, जो उन्हें समाज का अच्छा नागरिक बनाने में मदद करें।बच्चों के साथ समय बिताएं और उनके साथ संवाद करें। उनकी भावनाओं और विचारों को समझें। बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने आसपास देखते हैं। माता-पिता को अपने आचरण से बच्चों को सही मार्ग दिखाना चाहिए। बच्चों को ईमानदारी, मेहनत, सहानुभूति और दया के महत्व को समझाएं। बच्चों को सिखाएं कि उनका जीवन केवल उनके लिए नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी है।
हमारे शिक्षा प्रणाली में भी नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। स्कूलों में केवल किताबों का ज्ञान देने के बजाय, बच्चों को नैतिकता, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न गतिविधियों और सत्रों का आयोजन किया जा सकता है, जैसे:सामुदायिक सेवा में भागीदारी।
नैतिक कहानियों और जीवन के अनुभवों पर आधारित चर्चा। सहनशीलता और विविधता को समझाने के लिए कार्यशालाएं।

धर्म और संस्कृति का योगदान

हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रंथों में नैतिकता और संस्कारों के अनेक उदाहरण हैं। भगवद्गीता, रामायण, और महाभारत जैसे ग्रंथ न केवल आध्यात्मिकता का पाठ पढ़ाते हैं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाते हैं। इनका अध्ययन बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकता है।
एक अच्छा इंसान ही समाज को सही दिशा में ले जा सकता है। आज जब हमारा समाज भौतिकता, असहिष्णुता और आत्मकेंद्रितता के जाल में फंसा हुआ है, तो अच्छे संस्कार और परवरिश से सुसज्जित व्यक्तियों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। ऐसे व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

अच्छा इंसान बनने के लिए पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ परवरिश और संस्कार का होना अत्यंत आवश्यक है। एक संतुलित व्यक्तित्व वही होता है, जो शिक्षा और नैतिक मूल्यों का सही मिश्रण हो।

माता-पिता, शिक्षक और समाज को यह जिम्मेदारी उठानी होगी कि वे बच्चों को न केवल शिक्षित करें, बल्कि उनमें ऐसे संस्कार डालें, जो उन्हें अच्छा इंसान बना सकें। तभी हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे, जहां हर व्यक्ति न केवल खुद के लिए, बल्कि दूसरों के लिए भी जीने की प्रेरणा ले सके।

“आखिरकार, इंसान की पहचान उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और व्यवहार से होती है।”