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Tuesday, June 9, 2026
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अटल जी की कार्यशैली और निर्णयों की पूरी दुनिया कायल थी- राजनाथ सिंह

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लखनऊ। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अटल युवा महाकुंभ’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने अटल जी के अद्वितीय व्यक्तित्व और उनके साथ जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने अटल जी की महानता का स्मरण करते हुए प्रदेश के विकास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन और विचारधारा आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “श्रध्येय अटल जी का व्यक्तित्व इतना विराट था कि उनकी कार्यशैली और निर्णयों की पूरी दुनिया कायल थी। लखनऊ अटल जी के दिल में बसता था और यहां के लोग उन्हें उतनी ही गहराई से जानते और समझते थे।” उन्होंने अटल जी के जीवन के अनेक प्रसंगों को याद करते हुए उनकी हाजिरजवाबी और सहजता का जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान दौरे के दौरान अटल जी के चर्चित जवाब को याद करते हुए कहा, “एक महिला पत्रकार ने जब उनसे कहा कि मैं आपसे शादी करना चाहती हूं, बशर्ते आप मुझे मुंह दिखाई में कश्मीर दें, तो अटल जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘मैं तैयार हूं, अगर आप दहेज में पूरा पाकिस्तान दें।’ इस जवाब ने उनकी चतुराई और सहजता को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।”

रक्षा मंत्री ने अटल जी के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “मुझे उनके साथ एक अभिभावक का स्नेह और मंत्रिमंडल में सहकर्मी के रूप में काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनकी सरकार जब एक वोट से गिरी, तब उनके ऐतिहासिक भाषण ने लोकतंत्र और देशप्रेम की नई परिभाषा गढ़ी। उन्होंने कहा था, ‘सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश और इसका लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।’ यह उनकी दूरदर्शिता और सिद्धांतवाद का प्रमाण था।”

कार्यक्रम में बच्चों द्वारा अटल जी के जीवन पर प्रस्तुत की गई झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रक्षा मंत्री ने भरपूर सराहना की। उन्होंने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा, “अटल जी के विचार और योगदान आज भी युवाओं के लिए पथ प्रदर्शक हैं।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “आज उत्तर प्रदेश विकास के हर पैमाने पर देश के अन्य राज्यों से आगे खड़ा है। सीएम योगी के कुशल नेतृत्व और अथक प्रयासों ने यूपी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यह प्रदेश अटल जी के सपनों का साकार रूप बनता जा रहा है।”

योगी की युवाओं को सीख-कदम मिलाकर चलेंगे तो लक्ष्य प्राप्त होगा

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि ‘युवा कुम्भ’ (Yuva Kumbh) जैसे आयोजन श्रद्धेय अटल जी के प्रति देश-प्रदेश के अनुराग व प्रेम को व्यक्त करते हैं। यहां के जनप्रतिनिधियों ने अटल जी की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए सभी संस्थाओं को एक मंच दिया है। युवा कुम्भ उन स्मृतियों को ताजा कर रहा है, जो भारत की सनातन धर्म की परंपरा में कुम्भ के आयोजन के साथ जुड़ती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षा मंत्री व लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के साथ मंगलवार को केडी सिंह बाबू स्टेडियम में ‘अटल युवा महाकुम्भ’ का शुभारंभ किया। ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर ‘कदम से कदम मिलाकर चलना होगा’ थीम पर यह आयोजन हुआ। सीएम व रक्षा मंत्री ने बच्चों को दुलारा-पुचकारा और चॉकलेट बांटी। निबंध व भाषण प्रतियोगिता के बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया।

भारत की पहचान है कुम्भ

सीएम योगी ने कहा कि कुम्भ भारत की पहचान है। सनातन व आध्याात्मिक ऊर्जा की अनुभूति का समागम है, उस महासमागम का जो दृश्य 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में दिखेगा, उसकी झांकी आज यहां देखने को मिल रही है।सीएम ने अटल जी की कविता ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ सुनाई। बोले-इस युवा कुम्भ ने अटल जी की स्मृतियों को ताजा किया है।

युवा ऊर्जा का प्रतीक है यह कार्यक्रम

सीएम ने कहा कि मैंने सुबह आयोजकों को फोन कर पूछा कि कार्यक्रम होगा, तो बताया गया कि यह युवा ऊर्जा का प्रतीक कार्यक्रम है। कार्यक्रम भव्यता से होगा। वास्तव में, आज मौसम की परवाह किए बिना बच्चों ने अटल जी की स्मृतियों को याद किया है। सीएम ने कहाकि कल अटल जी का जन्म शताब्दी वर्ष है और आज उसका शुभारंभ इतनी भव्यता से हो रहा है। सीएम ने प्रतियोगिताओं में स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को बधाई दी। प्रतिभागी बच्चों को शुभकामना देते हुए कहा कि कदम मिलाकर चलेंगे तो लक्ष्य प्राप्त होगा। सीएम ने आयोजन में शामिल सभी संस्थाओं को भी साधुवाद दिया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, इंजी. अवनीश सिंह, पवन सिंह चौहान, विधायक डॉ. नीरज बोरा, योगेश शुक्ल, अमरेश कुमार, ओपी श्रीवास्तव, जय देवी, पूर्व मंत्री मोहसिन रजा आदि मौजूद रहे।

24 दिसंबर ग्राहक दिवस: आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक है ग्राहक की संतुष्टि और भरोसा

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Customer

दिनकर जी सबनीस

भारतीय चिंतन के दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के केंद्र बिंदु “ग्राहक की संप्रभुता” पर विचार करने से पहले “ग्राहक” (Customer) शब्द का अर्थ समझना आवश्यक है। क्योंकि वैश्विक ग्राहक आंदोलन “ग्राहक” को बाजार में की जाने वाली खरीद-बिक्री की गतिविधियों तक ही सीमित रखता है। जबकि ‘ग्राहक’ शब्द अंग्रेजी में ‘उपभोक्ता’ या ‘कस्टमर’ का पर्याय नहीं है। इसे हिंदी शब्द ‘उपभोक्ता’ का पर्याय भी नहीं माना जा सकता। ‘उपभोक्ता’ शब्द उपभोग की अवधारणा से लिया गया है, जबकि ‘ग्राहक’ शब्द प्राप्त करने या स्वीकार करने की क्रिया से उत्पन्न हुआ है। दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। उपभोग असीमित है और आवश्यकता के बजाय क्षमता को संतुष्ट करता है, जबकि प्राप्ति आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित है। आवश्यकता पूरी होने पर संतुष्टि प्राप्त होती है। ”ग्राहक” शब्द सुनकर वास्तव मे विचार यह होना चाहिए कि, ग्राहक ही अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। ग्राहक केवल वस्तुओं और सेवाओं के खरीदार नहीं हैं,ग्राहक आर्थिक ढांचे का केंद्रीय तत्व हैं। ग्राहक की मांग ही उत्पादन प्रक्रिया की शुरुआत करती है, और यही मांग अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखती है। ग्राहक की प्राथमिकताएं और शक्ति अर्थव्यवस्था को दिशा देती हैं। अगर ग्राहक उत्पादों या सेवाओं के प्रति उत्साह नहीं दिखाते हैं, तो उद्योग और व्यवसाय मंदी का अनुभव कर सकते हैं,जिससे अंततः उत्पादन में कमी और अर्थव्यवस्था में संभावित ठहराव आ सकता है। इसका मतलब है कि आर्थिक समृद्धि के लिए ग्राहक का आत्मविश्वास और क्रय शक्ति आवश्यक है। आर्थिक परिदृश्य में विभिन्न बाजार विकल्पों की उपलब्धता बढ़ रही है, परन्तु ग्राहक को प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। उनकी ज़रूरतें और प्राथमिकताएँ अद्वितीय हैं। इसलिए, सरकार और विभिन्न व्यवसाय अपने ग्राहक – अनुभव और संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करते हुए रणनीतियाँ तैयार करते हैं।

इस संदर्भ में, ग्राहक की संप्रभुता का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। ग्राहकों के पास अब ज्ञान और विकल्प दोनों है, और वे इनका उपयोग संतोषजनक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए करते हैं। उनके लिए अपने अधिकारों और विकल्पों के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल उनकी संप्रभुता मजबूत होती है, बल्कि अर्थव्यवस्था भी सशक्त होती है।

अंततः हम कह सकते है, “ग्राहक” अर्थव्यवस्था के विकास और सुधार के लिए ज़रूरी कुंजी हैं,उनकी संतुष्टि और भरोसा दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। किसी भी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्राहक की सक्रिय भागीदारी एक अनिवार्य शर्त है। लेकिन वर्तमान में वैश्विक आर्थिक गतिविधियां ग्राहक की अनदेखी करते हुए संचालित की जा रही हैं। पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। यही कारण है कि दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं इस समय संकट में हैं। सरकार, उत्पादक, कॉरपोरेट और व्यापारी-ग्राहकों को अंधेरे में रखकर न केवल उनका शोषण कर रहे हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था के पोषक तत्वों को भी नष्ट कर रहे हैं। वे भूल जाते हैं कि जैसे ही ग्राहक का बाजार से भरोसा डगमगाता है, वैसे ही मंदी की काली छाया बाजार को अपनी चपेट में लेने लगती है। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था के सभी घटक प्रभावित होने लगते हैं और वे ग्राहकों को बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए अप्राकृतिक तरीकों का सहारा लेते हैं।

पश्चिमी दुनिया में ग्राहकों की प्रकृति, व्यवहार और विशेषताओं के कारण बाजार मंदी से उबर जाते हैं, लेकिन इसकी कीमत ग्राहकों को चुकानी पड़ती है, जो लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जाते हैं। इसके विपरीत हमारे देश में ग्राहक, भारतीय ग्राहक आंदोलनों और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से प्रभावित होकर अपनी आवश्यकताओं को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सरकार विभिन्न वित्तीय संस्थानों के माध्यमों द्वारा ग्राहकों को अपनी ज़रूरतें बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आसान पूंजी और ऋण उपलब्ध कराने के बाद भी, स्थानीय ग्राहक अपनी ज़रूरतें बढ़ाने में बहुत कम रुचि दिखाते हैं, क्योंकि वे अपने कर्ज का बोझ नहीं बढ़ाना चाहते। भारतीय बाजार में ग्राहक मांग बढ़ाने के कृत्रिम तरीकों से दूर रहते हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि बाजार की समृद्धि पूरी तरह से ग्राहक के व्यवहार और आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। इसके बावजूद वर्तमान में सरकार, उत्पादक और व्यापारी ग्राहक की अनदेखी कर रहे हैं। हालाँकि, ग्राहक आंदोलनों के प्रचार प्रसार और ग्राहक कार्यकर्ताओं की सतर्कता के कारण, ग्राहक सहायता के नाम पर कुछ कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम ग्राहक की समस्या को हल करने के बजाय उसे और जटिल बनाते नज़र आते हैं। वे ग्राहक की समस्याओं को सुनते नहीं हैं, बल्कि ग्राहक को अपनी समस्याओं को अपने तैयार किए गए ढाँचे में बाँधने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे समस्या-समाधान की आड़ में उनका ध्यान भटक जाता है। इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य उत्पादकों के हितों की सेवा करना है, जिसके कारण अपनी समस्याओं का समाधान चाहने वाले अधिकांश ग्राहक निराशा में सिर पकड़कर बैठ जाते हैं। उत्पादक वस्तुओं का निर्माण करते हैं और सेवा प्रदाता ग्राहक को सेवाएँ प्रदान करते हैं। ग्राहक को इन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। फिर इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव क्यों है? उत्पादकों/सेवा प्रदाताओं द्वारा लिए जाने वाले मुनाफे पर ग्राहकों को कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, इन मुनाफों की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

आजकल ग्राहकों का शोषण करने के लिए नई-नई मार्केटिंग तकनीकें अपनाई जा रही हैं। यह शोषण बंद होना चाहिए। ग्राहक आंदोलन वस्तुओं को सस्ता बनाने के बारे में नहीं है; यह “उचित मूल्य पर उचित वस्तु” की वकालत करता है। जब कोई ग्राहक किसी उत्पाद के लिए निर्माता द्वारा मांगी गई पूरी कीमत चुकाता है, तो उसे ऐसा उत्पाद मिलना चाहिए जो निर्माता द्वारा वादा किए गए गुणों को पूरा करता हो। वे उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता क्यों करें? ग्राहक उत्पाद के लिए चुकाई गई कीमत का पूरा मूल्य चाहता है, थोड़ा भी कम नहीं। यही परिस्थितियाँ हैं जो बाजार में टकराव का माहौल बनाती हैं। नीतिगत विषय तो यह है कि, “ग्राहक” आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु होने तथा आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण संप्रभुता होना चाहिए।

ये गतिविधियां पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि पारदर्शी तरीके से संचालित होनी चाहिए। इन आर्थिक गतिविधियों में ग्राहक को शामिल होना चाहिए। आर्थिक गतिविधियां त्रिकोणीय (सरकार, उत्पादक और व्यापारी) नहीं होनी चाहिए, वे चतुर्भुज (सरकार, उत्पादक, व्यापारी और ग्राहक) होनी चाहिए। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से और स्थायी रूप से विकसित करने के लिए यह एक आवश्यक शर्त है। इसके अभाव में सरकार, उत्पादक और ग्राहक के बीच टकराव जारी रहेगा, जो देश और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक नहीं है। यह अलग बात है कि आज ग्राहक आंदोलन इतना संगठित या मजबूत नहीं है कि वह सीधे आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर उन्हें पंगु बना सके। हालांकि, ग्राहकों को संगठित करने के लिए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रयास सफल हो रहे हैं।

वर्तमान समय की आवश्यकता है कि, ग्राहकों को आर्थिक व्यवस्थाओं के नीति निर्धारण में शामिल करना और उन्हें उनका उचित स्थान देना, प्राथमिकता होना चाहिए तथा आर्थिक ढांचे के सभी घटकों को साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

Video: सब्जी मंडी में दाम पता करने पहुंचे राहुल गांधी, बोले- महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया

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नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) सब्जियों का दाम जानने के लिए सब्जी मंडी पहुंचे। यहां उन्होंने दुकानदार से लहसुन, टमाटर और शलजम सहित कई सब्जियों के दाम पता किए। दुकानदार ने उन्हें बताया कि लहसुन 400 रुपए किलो हैं। अपनी सब्जी मंडी विजिट का वीडियो राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि कभी लहसुन 40 रुपए का था और 400 का हो गया है। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है और सरकार कुंभकरण की नींद सो रही है।

राहुल गांधी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें बताया गया है कि यह दिल्ली के गिरी नगर के सामने हनुमान मंदिर की सब्जी मंडी का वीडियो है। वीडियो में महिलाएं कहती नजर आ रही हैं कि उन्होंने राहुल गांधी को चाय पर बुलाया है। ताकि, वह आकर देखें कि कितनी महंगाई है, जिससे हमारा बजट बहुत ज्यादा बिगड़ रहा है। राहुल गांधी से मिलकर महिलाएं कह रही हैं कि सैलरी तो किसी की नहीं बढ़ी है, लेकिन रेट बढ़ गया है और वो घटने का नाम नहीं ले रहा है। आगे और बढ़ेगा।

40-50 से नीचे कुछ भी नहीं मिल रहा

वीडियो में राहुल गांधी महिलाओं से पूछते हैं कि आज क्या खरीद रही हैं? इस पर एक महिला कहती है कि वह थोड़ा सा टमाटर, थोड़ा सा प्याज खरीद रही है। ताकी बस कुछ तो चल जाए। एक महिला सब्जी वाले से पूछती है कि इस बार सब्जी इतनी महंगी क्यों है। कुछ भी कम ही नहीं हो रहा है। कुछ भी 30-35 रुपए का नहीं है। सब 40-50 से ज्यादा ही है।

सब्जी वाले ने भी मानी महंगाई की बात

राहुल ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें सब्जी वाला कहता दिख रहा है कि इस बार बहुत महंगाई है। इससे पहले इतनी महंगाई कभी नहीं हुई। राहुल गांधी सब्जीवाले से पूछते हैं कि लहसुन कितने का है। इस पर सब्जी वाला बताता है कि लहसुन की कीमत 400 रुपए किलो चल रही है।

500 रुपए की सब्जी, अब 1000 में मिलती है

राहुल गांधी एक महिला से पूछते हैं कि आपको क्या लगता है कि महंगाई क्यों बढ़ रही है। इस पर महिला कहती है कि सरकार इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है, उन्हें तो बस अपने भाषणों से मतलब है। सरकार को इससे मतलब नहीं है कि आम आदमी खाना क्या खाएगा। जो चीज पहले 500 रुपए की आती थी, आज 1000 रुपए की आती है। अब खर्च कम करना है तो फिर कटौती करनी पड़ेगी। इससे तो हम लोगों को परेशानी ही होगी।

शतरंज की बिसात पर चमकता नन्हा सितारा – अनीश सरकार

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हेमन्त खुटे

प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती इस बात को साबित कर दिखाया है कोलकाता के नन्हे से शतरंज खिलाड़ी अनीश सरकार (Aneesh Sarkar) ने। महज 3 साल की अल्पायु में फीडे रेटिंग हासिल कर दुनिया के सबसे यंगेस्ट खिलाड़ी के रूप में इतिहास रच दिया। उन्होंने मात्र 3 साल 8 महीने 19 दिन की उम्र में फीडे रेटिंग हासिल करके दुनिया के सबसे कम उम्र के रेटेड शतरंज खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड उत्तराखंड के शतरंज खिलाड़ी तेजस तिवारी के नाम था जिसने साढ़े पांच वर्ष की उम्र में शतरंज की दुनिया में अपना परचम लहराया था ।

शतरंज का सफर

अनीश का शतरंज का सफर 1 साल पहले ही शुरू हुआ है। अनीश की मां ने शतरंज की बिसात और मोहरे उन्हें लाकर दिए थे ताकि शतरंज खेल के प्रति बचपन से ही उनके अंदर दिलचस्पी व ललक पैदा किया जा सके। अनीश की मां के अनुसार यूट्यूब चैनलों के जरिए शतरंज के वीडियो की ओर उनका आकर्षण बढ़ा। इनकी जिज्ञासा को दृष्टिगत रखते हुए भारत के भूतपूर्व राष्ट्रीय चैंपियन ग्रैंडमास्टर दिब्येंदु बरुआ के सान्निध्य में उन्हें शतरंज का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।

सफलता की ऊंची उड़ान के लिए मेहनत जारी

सच्ची लगन,दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत के गुण यदि आपके अंदर विद्यमान है तो निश्चित रूप से सफलता आपके कदम चूमेगी। बरुआ के कथानानुसार “हमने उसे एक विशेष समूह में रखा है जहां वह 7 से 8 घंटे का प्रशिक्षण ले रहा है। एक बार जब वह बोर्ड में बैठ जाता है तो उठता नहीं है। उनका ध्यान वास्तव में आश्चर्य जनक है।”

शतरंज खेलने से पढ़ाई में लाभ

शतरंज खेलने से दिमागी क्षमता विकसित होती है। नई सोच का विकास होता है। विषय वस्तु को समझने में सहायता मिलती है।यही सोचकर उसके माता – पिता उन्हें शतरंज अकादमी में भर्ती कराने ले गए थे । उनका कहना था कि अनीश आगे चलकर शतरंज खेले या न खेले ,लेकिन इसे सीखने से दिमाग थोड़ा तेज हो जायेगा जो कि पढ़ाई में काम आएगा। उन्हें क्या पता था कि एक दिन वही बालक शतरंज की बिसात पर ऐसा दिमाग दौड़ाएगा कि शतरंज जगत में इतिहास रच देगा।

परिवार में कोई पेशेवर शतरंज खिलाड़ी नही

अनीश की मां आर सरकार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि हमारे परिवार में शतरंज के कोई पेशेवर खिलाड़ी नही है। परिवार का शतरंज से दूर – दूर तक कोई नाता नहीं । उनके पिता शौकिया तौर पर शतरंज खेलते है । पिता ने ही शतरंज की बुनियादी जानकारी दी। पिता से ही प्रारंभिक जानकारी के बाद अनीश ने यूट्यूब पर शतरंज के वीडियो देखकर अपने गेम को निखारा है।

ट्रायल में किया प्रशिक्षकों को अचंभित

कोलकाता में संचालित दिब्येंदु बरुआ की शतरंज अकादमी में अमूमन 5 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं लिया जाता है लेकिन अनीश के ट्रायल के दरमियान अपने करिश्माई खेल से वहां के प्रशिक्षकों को दंग कर दिया। इस तरह अनीश के अद्भुत व हैरत अंगेज कारनामे से अकादमी में एंट्री मिली ।

अनीश की इलो रेटिंग

अनीश की इलो रेटिंग 1555 है। यह रेटिंग वर्ल्ड चेस फेडरेशन (फीडे) द्वारा दी जाती है। आरंभिक रेटिंग 1400 से शुरू होती है जिसे अर्जित करने के लिए पांच रेटेड खिलाड़ियों के विरुद्ध कम से कम एक या डेढ़ अंक पाना होता है। अनीश ने अपने उम्दा प्रदर्शन के चलते पांच रेटेड खिलाड़ियों के खिलाफ 2 अंक प्राप्त कर 1555 की रेटिंग प्राप्त की। यह सफलता उन्हें पिछले नवंबर माह में वेस्ट बंगाल में आयोजित अंडर – 9 केटेगरी की स्पर्धा में मिली ।

विलक्षण प्रतिभा के धनी

भारतीय ग्रैंडमास्टर दिब्येंदु बरुआ अनीश की विलक्षण प्रतिभा गॉड गिफ्टेड (ईश्वर प्रदत्त) मानते है। बरुआ कहते है कि अनीश की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे किसी भी चीज को बहुत जल्दी समझ व सीख लेता है।उसका दिमाग बहुत तेज है।

कार्लसन अनीस के रोल मॉडल

कोलकाता से लगे हुए उत्तर 24 परगना जिले के कैखली इलाके के रहने वाले अनीश का जन्म 26 जनवरी 2021 को हुआ । वह स्थानीय सेंट जेम्स स्कूल में नर्सरी का छात्र है। उसके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक व माता सामान्य गृहणी है।
अनीश शतरंज की दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी नार्वे के मैग्नस कार्लसन को अपना असली हीरो व आदर्श मानते है।
गत माह 13 से 17 नवम्बर 2024 को टाटा स्टील चेस इंडिया टूर्नामेंट में खेलने के लिए जब कार्लसन कोलकाता आए थे तब अनीश से इनकी मुलाकात हुई थी। मुलाकात के बाद कार्लसन अनीश की प्रतिभा देख मुग्ध हो गए थे । उन्होंने अनीश को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी । भारत के गौरव विश्वनाथन आनंद, दिव्येंदु बरुआ,अर्जुन एरिगेसी और सूर्यशेखर गांगुली को भी अनीश अपना पसंदीदा खिलाड़ी मानते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता 2024 में भारत की गणित प्रतिभाएँ चमकीं

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विजय गर्ग

गणितीय प्रतिभा की समृद्ध विरासत वाले देश भारत ने यूसीएमएएस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2024 (International Mathematical Competition) में जीत हासिल कर अपनी उपलब्धि में एक और उपलब्धि जोड़ ली है। भारत लंबे समय से महान गणितज्ञों की भूमि रहा है, आर्यभट्ट से लेकर रामानुजन और भास्कर तक, प्रत्येक ने अपनी गणितीय प्रतिभा से दुनिया पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

आज, भारत इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है, जैसा कि नई दिल्ली में यूनिवर्सल कॉन्सेप्ट ऑफ मेंटल अरिथमेटिक सिस्टम (यूसीएमएएस) अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2024 में इसके शानदार प्रदर्शन से पता चलता है, जहां देश ने सर्वोच्च व्यक्तिगत और टीम दोनों ट्राफियां हासिल कीं। प्रतियोगिता, अबेकस और मानसिक अंकगणित के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन, लगभग 30 देशों के 6,000 से अधिक छात्रों ने एक साथ भाग लिया। प्रतिभागियों को केवल अबेकस या मानसिक गणित तकनीकों पर भरोसा करते हुए, केवल आठ मिनट में 200 अंकगणितीय प्रश्नों को हल करने की चुनौती का सामना करना पड़ा – एक उपलब्धि जो वास्तव में जादू की तरह महसूस हुई। दूसरी बार, विश्व का सबसे बड़ा अबेकस और मानसिक अंकगणित कार्यक्रम- यूसीएमएएस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2024 भारत में दिल्ली विश्वविद्यालय बहुउद्देशीय हॉल में आयोजित किया गया था।

पुरस्कार जीतने के लिए दुनिया भर के छात्रों ने बड़ी संख्या में गणित की समस्याओं को सबसे कम समय में हल करने में अपनी मानसिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा की। यह ऐतिहासिक घटना गणित में युवा दिमागों को विकसित करने में इसके वैश्विक महत्व की पुष्टि करती है। प्रतियोगिता का उद्देश्य मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देना, संज्ञानात्मक कौशल को बढ़ाना और अबेकस और मानसिक अंकगणित के माध्यम से छात्रों द्वारा हासिल की जा सकने वाली अविश्वसनीय क्षमताओं का प्रदर्शन करना है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वालों को ट्रॉफी प्रदान करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने ठीक ही कहा, “स्मार्ट दिमाग हर समस्या के लिए स्मार्ट समाधान तैयार करता है और समृद्धि तभी आगे बढ़ती है जब हमारे पास स्मार्ट दिमाग होता है।” युवा प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए, लेखी ने ऐसी पहल के महत्व पर जोर दिया और कहा, “यूसीएमएएस संज्ञानात्मक कौशल और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ा रहा है।” आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ अबेकस के प्राचीन उपकरण का मिश्रण एक अद्वितीय शैक्षिक अनुभव बनाता है।

दुनिया भर में 3 मिलियन से अधिक बच्चों ने अबेकस और मानसिक अंकगणित पाठ्यक्रम से लाभ उठाया है, जो मजबूत अंकगणितीय क्षमताओं को विकसित करते हुए रचनात्मकता, दृश्यता और फोकस को प्रोत्साहित करता है। आज के प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल में, मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना कई बच्चों के लिए एक कठिन लड़ाई बन गया है। उत्कृष्टता हासिल करने का लगातार दबाव अक्सर तनाव, चिंता और यहां तक ​​कि अवसाद का कारण बनता है। कुछ दिल दहला देने वाले मामलों में, यह छात्रों को अत्यधिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है, जैसा कि राजस्थान के कोटा जिले से हाल की रिपोर्टों में देखा गया है – जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का केंद्र है। हालाँकि, अबेकस और मानसिक अंकगणित पाठ्यक्रम जैसे नवीन शैक्षिक कार्यक्रम आशा की किरण के रूप में उभर रहे हैं, जो बच्चों को मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के साथ-साथ तनाव को प्रबंधित करने में मदद कर रहे हैं।

यूसीएमएएस इंडिया के सीईओ डॉ. स्नेहल कारिया के अनुसार, यह पाठ्यक्रम बच्चों की एकाग्रता, फोकस और याददाश्त को बढ़ाकर उनकी मानसिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उन्हें अपने व्यक्तित्व को समझने और अपनाने का आत्मविश्वास प्रदान करता है, जिससे चिंता और अवसाद को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। अबेकस और मानसिक अंकगणित कार्यक्रम की कुंजी नवीन शिक्षण विधियों के माध्यम से आत्म-आश्वासन के निर्माण के लिए इसके संरचित दृष्टिकोण में निहित है। प्रशिक्षण के दौरान दिया गया प्रोत्साहन और कौशल किसी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंबच्चे का उज्ज्वल भविष्य. कार्यक्रम में आठ स्तर शामिल हैं, प्रत्येक तीन से चार महीने तक चलता है। बच्चे प्रशिक्षित प्रशिक्षकों द्वारा निर्देशित साप्ताहिक कक्षाओं में भाग लेते हैं, विशेष रूप से डिज़ाइन की गई पुस्तकों और गतिविधियों के माध्यम से काम करते हैं।

पारंपरिक शिक्षा के विपरीत, यह पाठ्यक्रम संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक पूरक शिक्षण प्रणाली के रूप में कार्य करता है। मस्तिष्क के विकास पर ध्यान केंद्रित करके स्कूल के पाठ्यक्रम को पूरक बनाने की तत्काल आवश्यकता है। यह कोर्स याददाश्त, कुशाग्रता और सतर्कता में सुधार करता है। परिणामस्वरूप, छात्र शैक्षणिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करते हैं और अधिक आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसी दुनिया में जहां प्रतिस्पर्धा अक्सर रचनात्मकता और आत्म-मूल्य पर हावी हो जाती है, अबेकस और मेंटल अरिथमेटिक जैसे कार्यक्रम बच्चों को मानसिक, भावनात्मक और शैक्षणिक रूप से आगे बढ़ने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करते हैं।

यूसीएमएएस इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन के सीईओ एलेक्सन वोंग ने कहा, “प्रतियोगिता न केवल उनके कौशल का परीक्षण करती है बल्कि उनकी रचनात्मकता, दृश्य स्मृति और फोकस को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करती है – ये सभी उनकी भविष्य की सफलता को आकार देंगे।”

ऐसे कार्यक्रमों की परिवर्तनकारी शक्ति का एक प्रमाण, जहां छात्र न केवल अपने गणित कौशल का परीक्षण करते हैं बल्कि व्यापक संज्ञानात्मक लाभों का भी प्रदर्शन करते हैं जो उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास को आकार देते हैं। अंततः, दुनिया को ऐसे संपन्न व्यक्तियों के पोषण के लिए ऐसी पहल की ज़रूरत है जो आत्मविश्वास और रचनात्मकता के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हों।