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Tuesday, June 9, 2026
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मुख्यमंत्री ने युवाओं को दिया मंत्र- जीवन में संवाद महत्वपूर्ण

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CM Yogi

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने युवाओं को संवाद में माहिर होने का मंत्र दिया। बोले कि सार्वजनिक जीवन में संवाद की कला अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजनेता वही सफल हो सकता है, जिसमें संवाद की कला हो। यदि वह संवाद में माहिर नहीं है तो सफल राजनेता नहीं हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देखना होगा, हम जिस भी क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, उसमें युवाओं की क्या भूमिका होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28वें युवा उत्सव-2025 में उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी दल को बुधवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह उत्सव 10 से 12 जनवरी तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

युवा संसद को करना चाहिए प्रमोट

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में परम्परागत छात्रसंघ की बजाय युवा संसद को प्रमोट करना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ा सकें। नेतृत्व का गुण, समाज और अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के प्रति संवेदना होनी चाहिए। कोई भी राजनेता, प्रशासन, पुलिस अधिकारी, अन्नदाता किसान, प्रगतिशील किसान, युवा उद्यमी समेत किसी भी क्षेत्र में कार्य करे, लेकिन उसके मन में राष्ट्रीयता, मातृभूमि के लिए प्यार, जनता व नागरिकों के प्रति संवेदना नहीं है तो उसकी प्रगति का कोई मायने नहीं है।

युवाओं को पूरे देश को जानने का प्राप्त होगा अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जनवरी की तिथि युवा उत्सव के रूप में आती है, क्योंकि यह युवा ऊर्जा के धनी व वैश्विक पटल पर भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व युवा शक्ति को पहचान दिलाने वाले स्वामी विवेकानंद की पावन जयंती है। पीएम मोदी की प्रेरणा से पिछले कई वर्षों से युवा उत्सव का कार्यक्रम दिल्ली में होता है। इसमें अनेक कार्यक्रमों में भागीदार बनकर युवाओं को पूरे देश को जानने-सीखने का अवसर प्राप्त होता है। इस वर्ष प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री का सानिध्य व संवाद का क्षण भी प्राप्त होगा।

उत्तर प्रदेश के विकास व विरासत की यात्रा में युवा भी बने हैं सहभागी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सामने कुछ लक्ष्य रखे थे। इसमें विकसित भारत भी था। विकसित भारत में युवाओं की ऊर्जा कैसे सहायक हो सकती है। सीएम ने युवाओं से कहा कि 22/23 साल बाद जब देश शताब्दी वर्ष मना रहा होगा, तब आप भी अलग-अलग क्षेत्र में कार्य कर रहे होंगे। तब ध्यान रखना होगा कि उस समय कैसा भारत चाहिए, उस भारत के निर्माण की कार्ययोजना में कौन कौन से पहलू होंगे। जिन्हें हम आगे बढ़ाकर लेकर चल सकते हैं। विकसित भारत में युवाओं की भी क्या भूमिका होगी, इसे भी हमें देखना होगा।

सीएम ने कहा 63 युवा उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करके राष्ट्रीय महोत्सव का हिस्सा बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विकास व विरासत की इस यात्रा में युवा भी सहभागी बने हैं।

सात-आठ वर्ष में बढ़ी है उप्र के विकास की यात्रा

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले सात-आठ वर्ष में विकास की यात्रा को तेजी से आगे बढ़ाया है। 10 वर्ष पहले लोग खुद को उत्तर प्रदेश का वासी कहने में संकोच करते थे। यहां सुरक्षा नहीं, बल्कि दंगा, अराजकता व गुंडागर्दी थी। उप्र आबादी में नम्बर एक लेकिन विकास के पायदान पर पीछे था,अर्थव्यवस्था में छठवें-सातवें पायदान पर था। उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में पिछड़ा था, लेकिन सात-आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में खड़ा है। इसके पीछे की सफलतम कहानी को जिन्होंने नजदीक से देखा है, वे वर्तमान व भावी पीढ़ी को अवगत कराएं, जिससे उन्हें भी प्रगति के सही मानक की जानकारी हो सकेगी।

उत्तर प्रदेश की अमिट छाप को छोड़ने में सफल होंगे युवा

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि युवा उत्तर प्रदेश की अमिट छाप को छोड़ने में सफल होंगे। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की प्राचीन विधा (जो कौशल विकास का अद्भुत उदाहरण था) उसे भी प्रस्तुत करने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट वह नहीं है, जो केवल आज हम देख रहे हैं, स्किल डेवलपमेंट वह भी था, जिसने कभी मुरादाबाद को ब्रास, अलीगढ़ को हार्डवेयर, फिरोजाबाद को ग्लास, लखनऊ को चिकन कारी, मेरठ को स्पोर्ट्स आइटम, भदोही की कालीन, सहारनपुर को वुडन वर्क, वाराणसी के रेशम वस्त्र को मौका दिया। ये सभी प्राचीन विरासत के प्रतीक हैं, जिसे सरकार वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के रूप में प्रमोट कर रही है। कौशल विकास की इस विधा को हम विरासत के रूप में आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर खेल व युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, अमरेश कुमार आदि मौजूद रहे।

असम: खदान में पानी भरने से एक मजदूर की मौत, फंसे आठ लोगों बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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दिसपुर। असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो में 300 फीट गहरी कोयला खदान (Coal Mine) में फंसे मजदूरों में से एक का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि 8 मजदूर पिछले 48 घंटो से फंसे हुए हैं। जिनको निकालने के लिए खोज एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार (6 जनवरी) को दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो (क्षेत्र के 3 किलोमीटर दूर स्थित कोयला खदान (Coal Mine) में अचानक पानी भर गया था। जिसकी वजह से कुछ मजदूर खदान में ही फंस गए थे। जिसके बाद मजदूरों के रेस्क्यू के लिए सेना को लगाया गया है। मंगलवार रात रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था और बुधवार सुबह फिर से रेस्क्यू शुरू हो गया है।

खदान में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए भारतीय सेना, असम राइफल्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ टीमों और अन्य एजेंसियां संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। जिले के एसपी मयंक झा ने बताया कि खदान में कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक पानी आया जिसके कारण मजदूर खदान से बाहर नहीं निकल पाए।

खदान में काम करने वाले एक खनिक ने कहा कि खदान में अचानक लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि पानी भर रहा है। 30-35 लोग बाहर आ गए, लेकिन 15-16 लोग अंदर ही फंस गए। खनिक का भाई भी फंसा हुआ है।

UP में 16 IPS का तबादला: लखीमपुर के SP गणेश साहा हटे, BJP विधायकों की शिकायत का असर

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लखनऊ(प्रशांत कटियार)। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मंगलवार को 16 IPS अधिकारियों के तबादलों की घोषणा की, जिसमें 8 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) का तबादला शामिल है। इस बदलाव में लखीमपुर खीरी के एसपी गणेश प्रसाद साहा का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है। उन्हें मैनपुरी स्थानांतरित किया गया है, जिसके पीछे भाजपा विधायकों द्वारा उठाए गए आरोप हैं कि वे माफिया से बातचीत करते हैं और विधायकों के फोन का जवाब नहीं देते।लखीमपुर खीरी के नए पुलिस कप्तान संकल्प शर्मा होंगे, जो हाल ही में लखनऊ से स्थानांतरित हुए हैं। इसके अलावा, सुल्तानपुर, अमरोहा, मैनपुरी, मिर्जापुर, बस्ती, कन्नौज और भदोही के एसपी का भी तबादला किया गया है। मैनपुरी के एसपी विनोद कुमार को कन्नौज का पुलिस कप्तान बनाया गया है, जबकि सुल्तानपुर के एसपी सोमेन वर्मा को हालिया घटनाओं के चलते मिर्जापुर भेजा गया है।

बस्ती के एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में डीसीपी के पद पर तैनात किया गया है, और अमरोहा के एसपी कुंवर अनुपम सिंह अब सुल्तानपुर के नए पुलिस कप्तान होंगे। इसी तरह, मिर्जापुर के एसपी अभिनंदन को बस्ती, जबकि कन्नौज के एसपी अमित कुमार आनंद को अमरोहा भेजा गया है।

इसके अलावा, वरिष्ठ अफसर संजीव गुप्ता का हाल ही में हुआ तबादला निरस्तहै। गृह विभाग और डीजीपी मुख्यालय के बीच तालमेल न बैठ पाने के कारण यह निर्णय लिया गया। मेरठ से हटाए गए आईजी नचिकेता झा को स्थापना का आईजी बनाया गया है, और एडीजी एंटी करप्शन एन रविंदर को डीजीपी के जीएसओ का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक रणनीति और विधायकों की शिकायतों का एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो कि राज्य की कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा है।

इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस: छात्रों के समग्र विकास के लिए एक प्रमुख संस्थान

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ग्रेटर नोएडा। इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और समग्र विकास के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित संस्थान है। अपनी स्थापना के 19 वर्षों में, इस संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और हजारों छात्रों को उनके करियर में सफलता दिलाई है।
डॉ. के. आर. शर्मा द्वारा स्थापित यह संस्थान छात्रों को व्यावसायिक और तकनीकी कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर देता है। शिक्षा के पारंपरिक स्वरूप से आगे बढ़कर यह संस्थान छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और समकालीन मुद्दों की समझ प्रदान करता है।
डॉ. शर्मा के शब्दों में, “हमारा उद्देश्य छात्रों में आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल विकसित करना है, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।”
इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस छात्रों को उनके करियर के लिए तैयार करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करता है: जिनमें स्मार्ट क्लासरूम और लैब्स: आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कक्षाएं और प्रयोगशालाएं।
राष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट अकादमी: खेल और मानसिक फिटनेस के लिए।
निःशुल्क IGNOU कोर्स: छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक अवसर प्रदान करने के लिए।
प्लेसमेंट सेल: प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप, जो छात्रों को बेहतरीन रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
ट्रांसपोर्ट और होस्टल: छात्रों की सुविधाओं का विशेष ध्यान।
शैक्षणिक उपलब्धियां और औद्योगिक जुड़ाव
विधि (लॉ), फार्मेसी और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता।
नियमित कार्यशालाएं, सेमिनार, और इंटर्नशिप प्रोग्राम्स।
डॉ. मिश्रा, निदेशक (एडमिशन, स्ट्रेटेजी और प्लानिंग), ने संस्थान की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, “हमारा प्रयास है कि छात्र केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि जीवन में सफलता और नैतिक मूल्यों के साथ समाज में बदलाव लाने के लिए तैयार हों।” पारंपरिक और समकालीन दोनों विषयों पर ध्यान।उच्च योग्य शिक्षक छात्रों को प्रेरित करते हैं। छात्रों को अकादमिक और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने का लक्ष्य।
डॉ. शर्मा का मानना है कि शिक्षा समाज के विकास का मूल आधार है। वे कहते हैं, “अच्छी शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे छात्रों में नेतृत्व और नैतिकता विकसित करनी चाहिए।”

HMPV से चीन में बिगड़ने लगे हालात, वुहान में स्कूल बंद

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बीजिंग। कोरोना के बाद एक बार फिर चीन का नया वायरस ‘ह्यूमन मेटान्यूमो’ दुनिया को डराने लगा है। चीन में वायरस से हालात बिगड़ने लगे हैं। वुहान में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। यहां 10 दिन में HMPV के मामले 529% बढ़े हैं। बच्चों में बढ़ते मामलों को देखते हुए ही ये फैसला लिया गया है। चीन में वायरस से हड़कंप मचा हुआ है। एंटीवायरल ड्रग की भारी कमी है। एंटीवायरल ड्रग की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई है। हालत ये हो गई है कि एंटीवायरल ड्रग 41 डॉलर में बिक रहे हैं। वायरस के बढ़ते मामलों से WHO भी टेंशन में आ गया है। उसने चीन से HMPV की पूरी जानकारी मांगी है। चीन अभी तक HMPV मामलों पर जानकारी छुपा रहा है।

दुनियाभर में एचएमपी वायरस तेजी से फैल रहा है। भारत, मलेशिया, जापान, कजाकिस्तान में मामले बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन में भी संक्रमण फैल रहा है। चीन के इस नए वायरस से पूरे स्पेन में कोहराम मचा हुआ है। स्पेन में अस्पतालों के बाहर मरीजों की लंबी कतार देखने को मिल रही है। स्पेन के एलिकांटे में 600 से ज्यादा ‘इन्फ्लुएंजा A’ के केस मिले हैं।

भारत में अब तक 5 राज्यों में 8 केस मिले

बात करें भारत की तो अब तक 5 राज्यों में 8 केस मिल चुके हैं। महाराष्ट्र में 2 मामले मिले हैं। यहां 13 साल की लड़की और 7 साल का बच्चा संक्रमित मिला है। दोनों बच्चे बुखार के बाद इस वायरस से संक्रमित पाए गए। कर्नाटक, तमिननाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी केस मिले हैं। इस वायरस को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट है। राज्यों में बैठकों का दौर जारी है।

कहां कितने मरीज मिले

राज्य         केस    संक्रमित
कर्नाटक      2      दोनों बच्चे
गुजरात       1        बच्चा
प. बंगाल     1         बच्चा
तमिलनाडु   2     दोनों बच्चे
महाराष्ट्र      2      दोनों बच्चे

केंद्र सरकार ने राज्यों को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए निगरानी बढ़ाने और एचएमपीवी की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक डिजिटल बैठक की थी।

नक्सलवाद को समाप्त करने के साथ उन्हें बढ़ावा देने वालों पर भी हो नज़र

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अशोक भाटिया , मुंबई

2 वर्ष के बाद फिर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने दोबारा सर उठाया है। नक्सलियों द्वारा किए जाने वाले बड़े हमलों में अंतिम बार छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 26 अप्रैल, 2023 को 10 जवान मारे गए थे। इसके बाद सोमवार दोपहर नक्सलियों द्वारा किये गए अब यह दूसरा और इस साल का पहला सबसे बड़ा हमला है जिसमें बीजापुर के आईईडी ब्लास्ट में आठ जिला रिजर्व गार्ड और एक ड्राइवर की मौत हो जाने के तुरंत बाद इस संवेदनशील मामले में उच्च स्तरीय मीटिंग जारी है । मामले को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस के डीजीपी और अन्य संबंधित फोर्स के चीफ भी सक्रीय हो गए है । अब सुरक्षाबल इसका जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं।यह ठीक है कि केंद्र सरकार ने यह संकल्प ले रखा है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति को सुनिश्चित करते हुए यह भी देखा जाना जरूरी है कि आखिर नक्सलियों को आधुनिक हथियार और विस्फोटक कहां से मिल रहे हैं? गत दिवस उन्होंने जिस विस्फोटक का इस्तेमाल कर डीआरजी की गाड़ी को निशाना बनाया, वह इतना शक्तिशाली था कि जवानों के चिथड़े उड़ गए और वाहन के परखच्चे उड़कर पेड़ पर जा टंगे।

यदि यह मान लिया जाए कि नक्सली उगाही और वन संपदा के दोहन के जरिये पैसा जुटा लेते हैं, तो भी प्रश्न यह उठता है कि आखिर वे आधुनिक हथियार कहां से हासिल कर ले रहे हैं? यह तो सामने आता ही नहीं कि उन्हें घातक हथियारों की आपूर्ति कौन करता है? आखिर क्या कारण है कि तमाम नक्सलियों को मार गिराने और उनके गढ़ माने जाने वाले इलाकों में विकास के तमाम कार्यक्रम संचालित किए जाने के बाद भी उनकी ताकत कम होने का नाम नहीं ले रही है? नक्सली अपने खिलाफ जारी अभियान के बीच जिस तरह रह-रहकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और उन्हें क्षति पहुंचाने में समर्थ हो जाते हैं, वह चिंता का कारण है। नक्सली गुटों में भर्ती होने वालों की उल्लेखनीय कमी न आने से यह भी लगता है कि आदिवासियों और अन्य ग्रामीणों के बीच उनकी पकड़ अभी इतनी ढीली नहीं पड़ी है कि उनकी जड़ें उखड़ती दिखें।

ऐसे में उनके खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान को और धार देने के साथ ही उन कारणों का पता लगाकर उनका निवारण करना भी जरूरी है, जिनके चलते वे लोगों का समर्थन हासिल करने में समर्थ हैं। निःसंदेह नक्सलवाद एक विषैली-विजातीय विचारधारा है, लेकिन नक्सलियों को जड़-मूल से समाप्त करने के लिए उनसे विचारधारा के स्तर पर भी लड़ा जाना आवश्यक है। इससे ही नक्सलियों और उन्हें वैचारिक खुराक देने वालों के इस झूठ का पर्दाफाश किया जा सकता है कि वे वंचितों के उन अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो उनसे छीने जा रहे हैं। इस झूठ को बेनकाब करने के लिए यह भी जरूरी है कि आदिवासियों के नैसर्गिक अधिकार बाधित न होने पाएं। इससे ही उनका भरोसा हासिल किया जा सकता है और उन्हें नक्सलियों से दूर किया जा सकता है।

गौरतलब है कि देश के कुछ राज्यों में नक्सलवाद की समस्या नासूर बन चुका है।खासकर छत्तीसगढ़ । छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर माना जाता है । बस्तर के लोग अपनी संस्कृति और विशेष परंपराओं के निर्वहन के लिए जाने जाते हैं।कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने खुशहाल जीवन जीने के लिए स्वयं को प्रकृति के अनुकूल बनाए रखा, अपने को संभाले रखा, लेकिन पिछले कुछ दशक पहले उनके खुशहाल जीवन को नक्सलियों की नजर लग गई, नाच-गाना बंद हो गया, मांदर की थाप मंद पड़ गई, सड़कें सूनी हो गई और स्कूल बंद होने लगे।स्थानीय हाट बाजार भी बंद हो गए, बस्तर के वनवासियों की जिंदगी धीरे-धीरे बेरंग हो गई। पिछले कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में यहां के लोगों के बीच एक उम्मीद जगी है कि अब नक्सलवाद खत्म होगा।

दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लेकर काम शुरू किया है। इससे लगने लगा कि बस्तर में अब धीरे-धीरे लोग हिंसा से मुक्ति पा रहे हैं। ये सच भी लगने लगा था क्योंकि पिछले 13 महीने की सरकार में नक्सली बैकफुट पर ही रहे। जवान नक्सलियों पर भारी पड़ते रहे।इसका जश्न भी बस्तर में देखने को मिला ,मगर नक्सलियों ने एक बार फिर कायराना हरकत करते बीजापुर में आठ जवानों को धात लगाकर मार दिया। इस बीच रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नक्सलियों पर नियंत्रण पाना उतना सरल नहीं है, जितना कि इसके लिए लक्ष्य का निर्धारण मार्च 2026 तक आसानी से कर लिया गया है।

ऐसे में सरकार को नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए रणनीति में और बदलाव करने होंगे। इसके लिए दो रास्तों पर बराबर जोर देना होगा, या तो उनसे प्यार बातचीत का रास्ता प्रशस्त किया जाए या फिर वार से ही आर-पार की लड़ाई लड़कर निपटा जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों को मुख्य धारा में लाकर उनके लिए लागू होने जा रही पुनर्वास नीति के सफल क्रियान्वयन से नक्सलवाद को खुद हद तक समाप्त किया जा सकता है।ऐसा नहीं है कि इसके लिए पहले कभी प्रयास नहीं हुए हैं। इसके पहले भी सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी थोड़े-थोड़े समय पर ही नक्सली सक्रिय होकर सुरक्षा बलों को चुनौती देते रहे हैं, मगर कुछ न कुछ चूक की वजह से मिशन पूरा नहीं हो पाया है।पिछले वर्षों में भी सुरक्षाबलों, राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्रामीणों की हत्या करने का रिकार्ड नक्सलियों ने बना रखा है। ऐसे में नक्सलियों से पूरी तरह से निपटना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

हालांकि इस बात से गुरेज नहीं किया जा सकता है कि प्रदेश में पिछले 13 महीने की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के नाम नक्सलवाद के खिलाफ चले अभियान में एतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो चुकी है। इस समयावधि में विष्णु सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगति की है।इस दौरान 221 नक्सली मारे गए हैं, 925 नक्सलियों की गिरफ्तारियां हुई हैं और 738 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह कह सकते हैं कि नक्सली क्षेत्र में सक्रिय 1800 से अधिक नक्सली ठिकाने लग चुके हैं। ये निस्संदेह सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी कही जा सकती है कि नक्सलियों को योजनाएं अंजाम देने से पहले ही मार गिराया गया, परन्तु अभी भी नक्सलियों के मनोबल को तोड़ने के लिए काम करने की दरकार है।बीजापुर की घटना इसकी तस्दीक कर रही है कि खूफिया तंत्र भी नक्सलियों के मूवमेंट पर सटीक जानकारी जुटाने में फेल साबित हुआ है। अभी भी प्रदेश में लगभग एक हजार नक्सलियों के सक्रिय होने की जानकारी है।खूफिया सूत्रों के अनुसार इन नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराने, गिरफ्तार करने के बाद ही नक्सलवाद की लड़ाई जीती जा सकेगी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मार्च 2026 तक नक्सलियों का सफाया करने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि नक्सली क्षेत्र में एक भी नक्सली नेता केंद्र और राज्य सरकार के नक्सल विरोधी मुहिम के लिए घातक हो सकता है, इसलिए हर नक्सली का खात्मा जरूरी है, ताकि नक्सलियों के संगठन को पूरी तरह से तोड़ा जा सके।बस्तर के आदिवासी युवा नक्सलियों के प्रति आकर्षित न हों, इसके लिए उतनी ही लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है जितनी की नक्सलियों से बंदूक की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। नक्सली आदिवासी समूहों को यह कहकर अपनी ओर आकर्षित करते हैं कि सरकारें उनके संसाधनों पर पूंजीपतियों को कब्जा दिलाने का प्रयास करती हैं।

ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि आदिवासी समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वहां औद्योगिक इकाइयों का विस्तार करे। यहां के युवाओं को नौकरी दे ताकि वह नक्सलियों के चंगुल में न फंस सकें। हालांकि हाल में ही राज्य सरकार ने बस्तर ओलिंपिक का आयोजन करके बस्तर के आदिवासियों युवाओं को जोड़ने का काम किया है।इस आयोजन का जिक्र देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी किया था। इसके बाद से यहां के युवाओं और जवानों में नए उत्साह का संचार हुआ है। इस तरह के आयोजन इस क्षेत्र में निरंतर होते रहना चाहिए। वहीं नक्सलियों को अत्याधुनिक सूचना प्रणाली, हेलीकाप्टर आदि के जरिए उन पर नकेल कसने की कोशिश निरंतर होनी चाहिए।

नक्सलियों पर पुलिसिया कार्यवाही के अलावा फंडिंग स्रोतों को भी तोड़ने की जरुरत है । फंडिंग स्रोतों के बारे में जिक्र होने पर उद्योगों से जबरन वसूली पर चर्चा होती रही है। बिहार और झारखंड में पिछले एक दशक के दौरान माओवादी संगठन के लोगों की गिरफ्तारियों के बाद यह बार बार दोहराया गया कि माओवाद प्रभावित इलाकों में जो कॉर्पोरेट बिज़नेस करते हैं, उनसे जबरन वसूली माओवादी संगठनों का बड़ा फंडिंग सोर्स रहा है। कॉर्पोरेट से भी ज़्यादा अहम उद्योग माइनिंग यानी उत्खनन का रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह कारोबार नक्सलियों को ‘टैक्स’ दिए बगैर नहीं चलता। यही नहीं, यहां अवैध उत्खनन में भी नक्सलियों की बड़ी दखलंदाज़ी रही है। मार्च 2010 में संसद में केंद्रीय खनन मंत्री हांडीक ने बताया था कि देश भर में 1,61,040 अवैध माइन्स थीं, जिनमें से बड़ी संख्या छत्तीसगढ़, झारखंड व ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में थीं। समझा जा सकता है कि नक्सलियों की ज़बरदस्त फंडिंग का राज़ क्या रहा। ताज़ा जानकारियों की बात करें तो 2018 के आखिरी महीनों में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए ने बड़े खुलासे करते हुए बताया था कि छोटे और मझोले किस्म के नक्सली नेता अपने इलाकों के लोगों से भी जबरन वसूली करते रहे। यही नहीं, ये लोग को ऑपरेटिव सोसायटी और म्यूचुअल फंड्स में निवेश भी करते रहे। एनआईए के मुताबिक एक गिरफ्तार माओवादी के मामले में करीब 12 लाख रुपये का निवेश सहारा क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी में होना पाया गया था।