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Tuesday, June 9, 2026
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ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत ?

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डॉo सत्यवान सौरभ

मानव मेटान्यूमोवायरस (Human Metapneumovirus) एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभरा है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और प्रतिरक्षाविहीन व्यक्तियों जैसे कमजोर आबादी के लिए। पहली बार 2001 में पहचाना गया, मानव मेटान्यूमोवायरस दुनिया भर में महत्वपूर्ण श्वसन संक्रमण का कारण बनता है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में होती है। मानव मेटान्यूमोवायरस जैसे वायरल प्रकोपों के कारण बढ़ती चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, प्रभावी प्रबंधन के लिए नियामक ढाँचों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से मौसमी प्रकोपों के दौरान अपने व्यापक प्रसार के कारण मानव मेटान्यूमोवायरस एक महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बन गया है।

वायरस का प्रभाव क्षेत्रों में बढ़ने के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। चीन में, बढ़ी हुई निगरानी ने मानव मेटान्यूमोवायरसमामलों में वृद्धि का खुलासा किया है, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में, जो पता लगाने की दरों में वृद्धि का संकेत देता है। हालाँकि पहली बार 2001 में पहचाना गया, मानव मेटान्यूमोवायरस ने दुनिया भर में बढ़ते श्वसन संक्रमण के कारण ध्यान आकर्षित किया है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है कि मानव मेटान्यूमोवायरस वैश्विक स्तर पर अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों का 3%-10% हिस्सा है, जिसमें पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वायरस अक्सर फ्लू के मौसम में तेजी से फैलता है, जिससे श्वसन संक्रमण में वृद्धि होती है, जिससे यह मौसमी स्वास्थ्य खतरा बन जाता है। चीन में, फ्लू का मौसम मानव मेटान्यूमोवायरस के मामलों में वृद्धि के साथ मेल खाता है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने और मीडिया कवरेज में वृद्धि होती है। वर्षों से प्रचलन में होने के बावजूद, भारत सहित कई देशों में मानव मेटान्यूमोवायरस के लिए व्यापक और किफायती परीक्षण बुनियादी ढांचे का अभाव है। जबकि वैश्विक एजेंसियां मानव मेटान्यूमोवायरस की निगरानी करती हैं, फिर भी कई क्षेत्रों में इसका पता लगाने और रिपोर्ट करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे शुरुआती हस्तक्षेप प्रभावित होते हैं। वायरस पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों जैसे कुछ कमज़ोर समूहों को असमान रूप से प्रभावित करता है।

मानव मेटान्यूमोवायरस छोटे बच्चों, विशेष रूप से पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को असमान रूप से प्रभावित करता है, जिन्हें गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने का अधिक जोखिम होता है। बुज़ुर्ग, विशेष रूप से वे जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, मानव मेटान्यूमोवायरस संक्रमण से गंभीर परिणामों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। चीन में, बुज़ुर्गों में मानव मेटान्यूमोवायरस के मामलों में वृद्धि के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संख्या बढ़ी है, जिससे वृद्ध आबादी की कमज़ोरी उजागर हुई है। कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को मानव मेटान्यूमोवायरस से गंभीर संक्रमण का अधिक जोखिम होता है, जिसके लिए गहन चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है।

एचएमपीवी के कारण होने वाली मौतें शिशुओं और प्रतिरक्षाविहीन लोगों सहित कमज़ोर समूहों में उल्लेखनीय रूप से अधिक हैं। पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मृत्यु दर 1% है, जो विकसित और विकासशील दोनों देशों में उच्च जोखिम वाली आबादी पर वायरस के प्रभाव के बारे में चिंताएँ पैदा करती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, सीमित स्वास्थ्य सेवा पहुँच कमज़ोर आबादी के लिए गंभीर परिणामों के जोखिम को बढ़ाती है। इस तरह के वायरल प्रकोपों को प्रबंधित करने के लिए विनियामक ढाँचे और क्षमताओं को मज़बूत करने के उपाय डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना है। भारत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में एचएमपीवी जैसे वायरस के लिए परीक्षण सुविधाओं का विस्तार करके अपनी नैदानिक क्षमताओं को बढ़ा सकता है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद व्यापक, किफ़ायती एचएमपीवी परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए निजी प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग कर सकती है, जिससे शुरुआती पहचान और रोकथाम हो सके। भारत एक सुव्यवस्थित विनियामक मार्ग स्थापित करके नैदानिक परीक्षणों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में तेज़ी ला सकता है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान परीक्षणों को तेज़ी से मंज़ूरी देता है। भारतीय औषधि महानियंत्रक अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाले डायग्नोस्टिक किट के लिए आपातकालीन स्वीकृति तंत्र लागू कर सकता है। वास्तविक समय में श्वसन संक्रमण की निगरानी, रुझानों और मानव मेटान्यूमोवायरस जैसे उभरते खतरों पर नज़र रखने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय निगरानी प्रणाली विकसित की जा सकती है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय सभी राज्यों में वास्तविक समय मानव मेटान्यूमोवायरस ट्रैकिंग को शामिल करने के लिए एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम का विस्तार कर सकता है। भारत मानव मेटान्यूमोवायरस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान शुरू कर सकता है, रोकथाम के तरीकों और लक्षणों को पहचानने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, खासकर कमजोर आबादी के बीच। स्वास्थ्य मंत्रालय मानव मेटान्यूमोवायरस जैसे श्वसन संक्रमण के लक्षणों को पहचानने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना अभियान चलाने के लिए मीडिया और गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करें: भारत वायरल प्रकोपों के प्रबंधन के लिए सूचना और संसाधनों को साझा करने के लिए अपने वैश्विक सहयोग को बढ़ा सकता है, जिससे उभरते रोगजनकों के लिए समय पर प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके। भारत को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पहलों के माध्यम से निगरानी, निदान और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करके मानव मेटान्यूमोवायरस जैसे उभरते वायरल खतरों से निपटने के लिए अपने नियामक ढांचे को बढ़ाना चाहिए। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ-साथ वैक्सीन और एंटीवायरल अनुसंधान में निवेश से ऐसे प्रकोपों को कम करने में मदद मिलेगी। कमजोर आबादी की सुरक्षा और एचएमपीवी प्रसार को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है।

विदेशी जूठन खाने वाले लोग हमें बदनाम करने में लगे हैं- सीएम योगी

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि भारत की सनातन धर्म की जो मान्यता है यह दुनिया के सबसे प्राचीन संस्कृति है। इसकी तुलना किसी मत मजहब और संप्रदाय से नहीं हो सकती। हजारों वर्षों की विरासत मेरे पास है। इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन भी उतनी ही प्रचीन है। आकाश के भी ऊंचा है सनातन की परंपरा, इसकी तुलना नहीं की जा सकती।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक निजी समाचार चैनल द्वारा आयोजित ‘महाकुम्भ महासम्मलेन’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। महाकुम्भ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीएम योगी ने कहा कि देवासुर संग्राम के बाद अमृत की बूंदें चार पवित्र स्थलों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन स्थानों पर महाकुम्भ के आयोजन भारत के ज्ञान, चिंतन और सामाजिक दिशा तय करने का अवसर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ के आयोजन के दौरान भारत के ऋषि-मुनि एकत्र होकर उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंतन करते थे। यह आयोजन न केवल परंपरा का सम्मान है, बल्कि इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना भी आवश्यक है।

विरासत और विकास का संगम है महाकुम्भ 2025- योगी

सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि महाकुम्भ का आयोजन भारत में विरासत और विकास के अद्भुत संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2019 के प्रयागराज कुम्भ में यह देखा गया कि कैसे आधुनिक तकनीक, प्रबंधन और संस्कृति का सामंजस्य किया गया। यही प्रयास आने वाले महाकुम्भ में भी होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर महाकुम्भ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस आयोजन से न केवल देश के नागरिक, बल्कि दुनियाभर के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर है।

महाकुम्भ राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण है- मुख्यमंत्री

सीएम योगी ने कहा कि महाकुम्भ राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण है। यह आयोजन जाति, पंथ और लिंग भेदभाव को समाप्त करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 10 वर्षों में जो प्रगति की है, महाकुम्भ इसका सशक्त माध्यम बनेगा। यह भारत की समृद्धि, विरासत और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रमाण है। सीएम योगी ने कहा कि विदेशी जूठन खाने वाले लोग हमें बदनाम करने में लगे हैं। देश में जातिवाद का जहर घोलकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है।

सनातन धर्म हमेशा शिखर पर रहा है- योगी आदित्यनाथ

राष्ट्रीय एकता और हिंदू एकता पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म हमेशा शिखर पर रहा है। हिंदू एकता और राष्ट्रीय एकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इतिहास गवाह है कि जब हम बंटे हैं, तो कमजोर हुए हैं, और जब एकजुट हुए हैं, तो अजेय बने हैं। इसीलिए मैंने पहले कहा था कि बंटोगे तो कटोगे और एक रहोगे तो नेक रहोगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जाति और मजहब के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। ये वही शक्तियां हैं जो भारत को कमजोर करने का षड्यंत्र रचती हैं। लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। आज यूपी का नागरिक पलायन नहीं कर रहा, माफिया और अपराधी कर रहे हैं।

वक्फ के नाम पर जमीन कब्जाने वालों से वापस लेंगे एक-एक इंच जमीन- सीएम

वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीन कब्जे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह समझना मुश्किल है कि वक्फ बोर्ड है या भू-माफियाओं का बोर्ड। हमारी सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन किया है और एक-एक इंच जमीन की जांच करवा रही है। जिन लोगों ने वक्फ के नाम पर जमीन कब्जाई है, उनसे जमीन वापस ली जाएगी और गरीबों के लिए आवास, शिक्षण संस्थान और अस्पताल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुम्भ की परंपरा वक्फ से कहीं पुरानी है। सनातन धर्म की ऊंचाई आकाश से भी ऊंची और गहराई समुद्र से भी गहरी है। इसकी तुलना किसी मत या मजहब से नहीं की जा सकती।

सीएम योगी ने विपक्ष पर किया तीखा प्रहार

सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि अगर भारत को समझना है, तो राम, कृष्ण और शिव की परंपरा को पढ़ो। जो नेता लोहिया जी के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने इनकी बातों को कभी नहीं समझा। उन्होंने अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि हमने अयोध्या को विकास और विरासत का केंद्र बनाया। जो लोग अयोध्या के विकास का विरोध कर रहे थे, उन्हें वहां जाने का नैतिक अधिकार नहीं है।

संभल में धार्मिक स्थलों को तोड़कर कब्जा करने का प्रयास हुआ- योगी

संभल में धार्मिक स्थलों पर विवाद का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल में श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार कल्कि का उल्लेख पुराणों में मिलता है। वहां धार्मिक स्थलों को तोड़कर कब्जा करने का प्रयास हुआ। हमारी सरकार ने न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्रवाई की और दंगाइयों को सख्त संदेश दिया। धर्म परिवर्तन और घर वापसी के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि अगर कोई अंतर्मन से अपने धर्म में लौटना चाहता है, तो उसका स्वागत होना चाहिए। यह धर्म और परंपरा के प्रति जागरूकता का संकेत है।

यूपी सिपाही सीधी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थगित, अब इस महीने में होगा फिजिकल टेस्ट

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UP Police constable
UP Police constable

यूपी में सिपाही (Constable) सीधी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) लगभग एक माह विलंब से होगी। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने शारीरिक दक्षता परीक्षा जनवरी के तीसरे सप्ताह में कराने की तैयारी की थी। अब इसे फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च में कराया जाएगा। जल्द ही इस बाबत अभ्यर्थियों को जानकारी दी जाएगी।

दरअसल, भर्ती बोर्ड बीती 26 दिसंबर से शारीरिक मानक परीक्षा एवं दस्तावेजों की जांच करा रहा है। इसमें लगभग 1.74 लाख अभ्यर्थी हिस्सा ले रहे हैं। बोर्ड द्वारा सभी 75 जिलों की रिजर्व पुलिस लाइंस में रोजाना करीब पांच हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

5 से 7 फरवरी को किया जाएगा आयोजित

प्रयागराज में 28 से 30 जनवरी तक होने वाली परीक्षा को अपरिहार्य कारणों से अब 5 से 7 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। शारीरिक मानक परीक्षा और दस्तावेजों की जांच के बाद चयनित अभ्यर्थियों को बोर्ड द्वारा शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम जारी होगा।

400 मीटर ट्रैक की उपलब्धता का मांगा ब्योरा

शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित करने के लिए भर्ती बोर्ड ने एडीजी पीएसी से सभी वाहिनियों में 400 मीटर ट्रैक की उपलब्धता का ब्योरा मांगा है। उन्होंने पीएसी की वाहिनी का नाम, ट्रैक सही स्थिति में उपलब्ध है या नहीं और उसके प्रकार (सिंथेटिक अथवा कच्चा) के बारे में जानकारी देने को कहा है ताकि उसके मुताबिक परीक्षा का आयोजन कराया जा सके। उन्होंने एडीजी पीएसी से 10 जनवरी तक जानकारी देने को कहा है।

अब तक पकड़े गए तीन अभ्यर्थी

शारीरिक मानक परीक्षा और दस्तावेजों की जांच के दौरान अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले तीन अभ्यर्थियों को अब तक पकड़ा गया है। नोएडा और गोरखपुर के बाद बीती 3 जनवरी को हापुड़ में महिला अभ्यर्थी शिखा चौधरी को स्वतंत्रता सेनानी का आश्रित होने का फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के दौरान पकड़ा गया। उसके खिलाफ थाना कोतवाली हापुड़ में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

दिल्ली चुनाव: कांग्रेस ने लॉन्च की ‘जीवन रक्षा योजना’, 25 लाख के हेल्थ इंश्योरेंस का वादा

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नई दिल्ली। दिल्ली में अगले महीने यानी फरवरी में विधानसभा चुनाव (Delhi Elections) होने वाला है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर लोक लुभावन वादे करने शुरू कर दिए हैं। अब कांग्रेस (Congress) पार्टी ने दिल्लीवासियों के लिए ‘जीवन रक्षा योजना’ लॉन्च की है। इसके तहत दिल्ली के सभी नागरिकों को 25 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा यानी 25 लाख रुपए तक का फ्री इलाज होगा। इससे पहले कांग्रेस ने महिलाओं के लिए बड़ा ऐलान किया था। पार्टी ने महिलाओं के लिए ‘प्यारी दीदी योजना’ शुरू करने की बात कही थी। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे।

‘प्यारी दीदी योजना’ का ऐलान’

कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ‘प्यारी दीदी योजना’ का ऐलान करते हुए कहा था कि अगर कांग्रेस दिल्ली की सत्ता में आती है, तो पार्टी हर महीने महिलाओं को 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। शिवकुमार ने आश्वासन देते हुए कहा कि पार्टी की पहली कैबिनेट मीटिंग में इस योजना को मंजूरी दी जाएगी। इसी तरह की योजना सफल रूप से कर्नाटक में भी चल रही है

पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि यह स्कीम दिल्ली की महिलाओं के लिए बड़ी सौगात है। जिस तरह कर्नाटक में वादा निभाया उसी तरह दिल्ली में भी वादा निभाएंगे। सरकार बनने पर दिल्ली की हर ‘प्यारी दीदी’ के खाते में 2500 रुपये प्रतिमाह आएंगे।

शिवकुमार ने कहा, “कर्नाटक में महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा है। दिल्ली में सत्ता में आएगी तो पहली कैबिनेट में यह योजना लागू करेंगे। मैं यहां कर्नाटक मॉडल की तरह प्यारी दीदी योजना की घोषणा करने आया हूं। मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र में हमारी योजना को बीजेपी कॉपी कर रही है।”

बता दें कि इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भी महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं को चुनाव जीतने पर 2100 रुपये देने का वादा किया था। इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

भारत-पाक वॉर के हीरो बलदेव सिंह का 93 साल के उम्र में निधन

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जम्मू। भारत के लिए चार बड़े युद्ध में लड़ चुके पूर्व सैनिक हवलदार बलदेव सिंह (Baldev Singh) अब नहीं रहे हैं। 93 साल की उम्र में बलदेव सिंह का मंगलवार को राजौरी जिला में उनके निवास पर निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। जिला की नौशहरा तहसील में उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

बलदेव सिंह का जन्म 27 सितंबर, 1931 को नौशहरा के नौनिहाल गांव में हुआ था। उन्होंने साल 1947-48 में नौशहरा और झंगड़ की लड़ाई के दौरान 50 पैरा ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर उस्मान के नेतृत्व में बाल सेना में स्वेच्छा से शामिल होने का फैसला किया था। उस समय बलदेव सिंह की उम्र महज 16 साल थी। इस उन्होंने 12 से 16 साल की आयु के स्थानीय लड़कों के समूह (बाल सेना) के साथ इस युद्ध के अहम पलों में भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम किया। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना व कबाइलियों के दांत खट्टे करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बाल सैनिकों की बहादुरी के लिए उन्हें सम्मानित कर सेना में शामिल होने का अवसर दिया। बलदेव सिंह 14 नवंबर, 1950 को भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने तीन दशकों तक समर्पण और वीरता के साथ देश की सेवा की। उन्होंने भारत के लिए चीन के खिलाफ 1962 युद्ध, पाकिस्तान के खिलाफ 1965 युद्ध और सेवानिवृत्त होने के बाद भी 1971 का युद्ध लड़ा।

अपने पूरे जीवन में देश की सेवा व बहादुरी के लिए उन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित देश के कई बड़े नेताओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। तीन साल पहले जवानों के साथ दीपावली मनाने के लिए पीएम मोदी नौशहरा आए थे। इस दौरान पीएम ने बलदेव सिंह के साथ बातचीत की थी और उन्हें सम्मानित भी किया था।

वी नारायणन होंगे नए इसरो चीफ, 14 जनवरी को एस सोमनाथ की लेंगे जगह

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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) के नए प्रमुख के नाम का ऐलान हो गया है। वर्तमान इसरो प्रमुख एस सोमनाथ (S Somnath) की जगह प्रतिष्ठित वैज्ञानिक वी नारायणन (V Narayanan) लेंगे। इसकी जानकारी मंगलवार को भारत सरकार ने दी। वी नारायणन 14 जनवरी को इसरो प्रमुख का पदभार ग्रहण करेंगे।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति के आदेश के अनुसार, वी नारायणन 14 जनवरी को वर्तमान इसरो प्रमुख एस सोमनाथ के स्थान पर पदभार ग्रहण करेंगे। वह अगले दो वर्षों तक या अगली सूचना तक इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। दरअसल, इसरो के वर्तमान चेयरमैन एस. सोमनाथ ने 14 जनवरी 2022 को अपना पद संभाला था। वे तीन साल के कार्यकाल के बाद रिटायर हो रहे हैं।

बता दें कि एस. सोमनाथ के कार्यकाल में ही ISRO ने चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 मिशन की सफल लैंडिंग और धरती से 15 लाख किमी ऊपर लैगरेंज पॉइंट पर सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-L1 भी भेजने जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।

कौन हैं इसरो के नए प्रमुख वी नारायणन?

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक वी नारायणनके पास रॉकेट और अंतरिक्ष यान प्रणोदन में लगभग चार दशकों का अनुभव है। नारायणन एक रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन विशेषज्ञ हैं। वह साल 1984 में इसरो का हिस्सा बनें और उन्होंने लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर के निदेशक बनने से पहले विभिन्न पदों पर कार्य किया। प्रारंभिक चरण के दौरान, वी नारायणन ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में साउंडिंग रॉकेट्स और संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के ठोस प्रणोदन क्षेत्र में काम किया।

वी नारायणन ने एब्लेटिव नोजल सिस्टम, कंपोजिट मोटर केस और कंपोजिट इग्नाइटर केस की प्रक्रिया योजना, प्रक्रिया नियंत्रण और कार्यान्वयन में योगदान दिया। फिलहाल नारायणन लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर  के निदेशक हैं, जो इसरो के प्रमुख केंद्रों में से एक है, जिसका मुख्यालय तिरुवनंतपुरम के वलियामला में है, जिसकी एक इकाई बेंगलुरु में है। नारायणन के पास 40 साल का अनुभव है। वे रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशन के एक्सपर्ट हैं।