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Friday, February 20, 2026
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IT कंपनियों की मांग: 12 घंटे की ड्यूटी, 2 घंटे का ओवरटाइम

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यूथ इंडिया, बेंगलुरू। आईटी कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ाकर 14 घंटे करने की मांग की है। इस प्रस्ताव को लेकर कर्मचारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है, इसे स्वास्थ्य समस्याओं और छंटनी की आशंका के कारण अमानवीय करार दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार कर्नाटक दुकान और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1961 में संशोधन पर विचार कर रही है, जिसमें आईटी कंपनियों के प्रस्ताव को शामिल करने की संभावना है।

प्रस्ताव का विवरण

यदि सरकार आईटी कंपनियों की इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो कानूनी तौर पर काम के घंटे 14 घंटे (12 घंटे नियमित + 2 घंटे ओवरटाइम) हो जाएंगे। वर्तमान श्रम कानूनों के तहत 12 घंटे (10 घंटे नियमित + 2 घंटे ओवरटाइम) काम करने की अनुमति है। आईटी क्षेत्र के नए प्रस्ताव में कहा गया है कि आईटी/आईटीईएस/बीपीओ क्षेत्र के कर्मचारियों को हर दिन 12 घंटे से अधिक और लगातार तीन महीनों में 125 घंटे से अधिक काम करने की आवश्यकता हो सकती है।

कर्मचारियों का विरोध

कर्नाटक राज्य आईटी/आईटीईएस कर्मचारी संघ (केआईटीयू) ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। संघ का कहना है कि शिफ्टों की संख्या कम होने से एक तिहाई कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। तीन शिफ्ट प्रणाली के बजाय दो शिफ्ट प्रणाली अपनाने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है।

स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

कर्मचारी संघ ने रिपोर्ट में बताया कि आईटी क्षेत्र में 45% कर्मचारी अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जबकि 55% शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। काम के घंटे बढ़ाने से ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

सरकार से पुनर्विचार का आग्रह

कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कर्मचारियों को मशीन मान रही है। उन्होंने सिद्धारमैया सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और आईटी कंपनियों की मांग को लागू न करने का आग्रह किया है। संघ का मानना है कि इस प्रस्ताव के लागू होने से कर्मचारियों की स्थिति और भी खराब हो जाएगी और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

इस प्रकार, आईटी कंपनियों के इस प्रस्ताव ने कर्नाटक में कर्मचारियों के बीच गहरा असंतोष और विरोध पैदा कर दिया है, और सरकार के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

झूठे आरोप में फंसाया निर्दोष, कोर्ट ने बरी किया और महिला पर जुर्माना लगाया

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यूथ इंडिया, बरेली। एक विवाहित महिला द्वारा शादी का झांसा देकर दो वर्ष तक दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। फास्ट ट्रैक प्रथम रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने पांच महीने में ही मामले का निपटारा कर आरोपी को दोषमुक्त करार दिया। साथ ही, महिला पर झूठे आरोप लगाने के लिए एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

झूठे आरोपों की असलियत

बारादरी निवासी एक महिला की शादी सीबीगंज क्षेत्र में हुई थी और उनके तीन बच्चे भी थे। पति से विवाद के बाद महिला अपने मायके में रहने लगी। इसी दौरान, महिला का पड़ोसी राहुल से प्रेम संबंध हो गया। राहुल से दो साल तक संबंध रहने के बावजूद शादी से इनकार करने पर, महिला ने राहुल और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। इस मामले की विवेचना एसआई दुष्यंत गोस्वामी ने की। विवेचना में सामने आया कि महिला ने बदले की भावना से झूठे आरोप लगाए थे।

कोर्ट का आदेश

जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने स्पष्ट किया कि विवेचक का काम सत्य की खोज करना है, न कि किसी को फंसाना। अदालत ने यह भी कहा कि विवेचक और अन्य पुलिस अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही पालन नहीं किया। एसएसपी को आदेश दिया गया कि वे संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में विवेचक सत्य की खोज में ईमानदारी से काम करें।

अभियोजन की प्रक्रिया

16 फरवरी 2023 को राहुल के खिलाफ आरोप तय किए गए और सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने चार गवाह पेश किए जबकि राहुल के बचाव में उसके वकील ने महिला के पति और ससुराल के पड़ोसी को पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने राहुल को दोषमुक्त करार दिया।

पति का बयान

महिला के पति ने कोर्ट में बयान दिया कि उसकी पत्नी मोहल्ले के नये लड़कों को फंसाकर रुपये ठगती थी। जो रुपये नहीं देता, उसके खिलाफ झूठे केस दर्ज करा देती थी।

इस प्रकार, अदालत ने इस मामले में सत्य को उजागर करते हुए न्याय किया और झूठे आरोप लगाने वाली महिला पर जुर्माना भी लगाया।

केरल में निपाह वायरस का खौफ, 14 साल के लड़के की मौत

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यूथ इंडिया, एजेंसी। केरल के मलप्पुरम जिले में एक 14 वर्षीय लड़के की निपाह वायरस से मौत हो गई। कोझिकोड के अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार को यह घटना हुई। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस जानकारी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पांडिक्कड़ निवासी इस लड़के को दिल का दौरा पड़ा और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

अंतिम संस्कार और सावधानियां

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि लड़के का अंतिम संस्कार अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाएगा। जिलाधिकारी इस बारे में लड़के के माता-पिता और परिवार के साथ चर्चा करेंगे। संक्रमण के केंद्र पांडिक्कड़ में एहतियाती कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। मंत्री ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने और अस्पतालों में मरीजों से मिलने से बचने की अपील की है।

तैयारियां और उपाय

स्वास्थ्य विभाग ने मंजेरी मेडिकल कॉलेज में 30 अलग कमरों और 6 बिस्तरों वाले ICU की स्थापना की है। इन सभी लोगों को, जो संक्रमित लड़के के संपर्क में आए थे, पृथक कर दिया गया है। पांडिक्कड़ में संक्रमण के केंद्र से तीन किलोमीटर के दायरे में सख्ती से निगरानी की जाएगी और प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

पिछला प्रकोप और एहतियाती योजना

राज्य सरकार ने निपाह वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की है। निपाह वायरस ने पहले भी राज्य को परेशान किया है, जैसे 2018, 2021 और 2023 में कोझिकोड जिले में और 2019 में एर्नाकुलम जिले में संक्रमण के मामले दर्ज किए गए थे। कोझिकोड, वायनाड, इडुक्की, मलप्पुरम और एर्नाकुलम जिलों के चमगादड़ों में निपाह वायरस की एंटीबॉडी की उपस्थिति का भी पता चला था।

इस प्रकार, कोरोना के बाद निपाह वायरस ने एक बार फिर से डर पैदा कर दिया है, और राज्य सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरतते हुए हर संभव कदम उठा रहे हैं।

“हम सब एक परिवार हैं”: पीएम मोदी ने बिना छुट्टी के तीन महीने काम करने वाले कार्यकर्ताओं का किया धन्यवाद

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यूथ इंडिया, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय का दौरा किया और वहां के अधिकारियों से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने पार्टी की तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। ‘स्नेह मिलन’ नामक इस कार्यक्रम में, पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से पहली बार बातचीत की।

बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पार्टी कार्यालय में पीएम मोदी का स्वागत किया। ढाई घंटे लंबे इस कार्यक्रम में पार्टी महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष और महासचिव अरुण सिंह भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक परिवार का सदस्य बताते हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने गुजरात और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठन में बिताए अपने समय को याद किया और सीमित संसाधनों के साथ पार्टी के कार्यों की सराहना की।

पीएम मोदी ने बिना छुट्टी के तीन महीने तक लोकसभा चुनाव के दौरान काम करने वाले कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन से बड़ा कुछ नहीं होता और सभी कार्यकर्ता इसके केंद्र में होते हैं। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उन वरिष्ठ कर्मचारियों से भी मुलाकात की, जिनके साथ उन्होंने पार्टी संगठन में अपने कार्यकाल के दौरान काम किया था। सत्ता में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी ने पार्टी मुख्यालय के कर्मचारियों के साथ भी बातचीत की।

ट्रैवल इन्फ्लुएंसर आनवी कामदार की खाई में गिरने से मौत: मुंबई में रील के लिए शूटिंग कर रही थीं; इंस्टाग्राम पर थे 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

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यूथ इंडिया, एजेंसी। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में एक दुखद घटना में ट्रैवल इन्फ्लुएंसर आनवी कामदार की खाई में गिरने से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, आनवी रायगढ़ के प्रसिद्ध कुंभे झरने को देखने आई थीं और इंस्टाग्राम रील की शूटिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे 300 फुट गहरी खाई में गिर गईं।

आनवी पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट भी थीं। उन्होंने @theglocaljournal नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था, जिसके 2.80 लाख फॉलोअर्स थे। वह अपने ट्रैवल एक्सपीरियंस सोशल मीडिया पर साझा करती थीं।

बारिश के दौरान वीडियो शूट कर रही थीं

मुंबई निवासी आनवी कामदार 16 जुलाई की सुबह अपने 7 दोस्तों के साथ कुंभे झरने गई थीं। बारिश के दौरान वह वीडियो शूट कर रही थीं, तभी यह हादसा हुआ। यह घटना सुबह 10.30 बजे के आसपास हुई। उनके दोस्तों के शोर मचाने के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस और रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई। आनवी को रेस्क्यू करके पास के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

एसपी बोले- रेस्क्यू के दौरान आनवी जिंदा थीं

रायगढ़ एसपी सोमनाथ घरगे ने बताया कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद रेस्क्यू के समय आनवी जिंदा थीं। उन्हें बचाते समय पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर गिर रहे थे। पहले तो ऐसा लगा कि वो जिंदा नहीं हैं, लेकिन करीब जाने पर देखा गया कि उनकी सांसें चल रही थीं। दुर्भाग्यवश, उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पुणे के जिला कलेक्टर की अपील

पुणे के जिला कलेक्टर सुहास दिवास ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में किसी भी नदी, झरने या तालाब के पास न जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं, इसलिए जिम्मेदार और जागरूक बनें।

असम सरकार ने मुस्लिम विवाह कानून निरस्त करने के लिए विधेयक को दी मंजूरी

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यूथ इंडिया, गुवाहाटी। असम सरकार ने गुरुवार को असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम एवं नियम 1935 को निरस्त करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है। यह कानून विशिष्ट परिस्थितियों में कम उम्र में विवाह की अनुमति देता था। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। निरसन विधेयक 2024 को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने की संभावना है। इस साल की शुरुआत में, मंत्रिमंडल ने अधिनियम को समाप्त करने की मंजूरी दे दी थी और गुरुवार की बैठक में इस निर्णय को लागू करने के लिए आवश्यक निरसन विधेयक को अधिकृत किया गया।

मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमने बाल विवाह के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करके अपनी बेटियों और बहनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज असम मंत्रिमंडल की बैठक में हमने असम निरसन विधेयक 2024 के माध्यम से असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम एवं नियम 1935 को निरस्त करने का निर्णय लिया है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य ‘‘विवाह और तलाक के पंजीकरण में समानता’’ लाना है।

उन्होंने आगे लिखा, “आज असम कैबिनेट की बैठक में हमने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम और नियम 1935 को निरस्त करने का निर्णय लिया है।” मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा ने इस कदम को बेटियों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया और कहा कि यह बाल विवाह के खिलाफ उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि निरसन विधेयक को अगले मानसून सत्र में विधानसभा के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य मंत्रिमंडल को यह भी निर्देश दिया गया है कि असम में मुस्लिम विवाहों के पंजीकरण के लिए एक उपयुक्त कानून लाया जाए, जिस पर विधानसभा के अगले सत्र तक विचार किया जाएगा।’’ मंत्रिमंडल ने राज्य में बाल विवाह के सामाजिक खतरे को समाप्त करने के लिए 23 फरवरी को अधिनियम को निरस्त करने के निर्णय को मंजूरी दे दी थी।

इस कानून के निरस्त हो जाने से अब कई बदलाव आएंगे। मसलन, बाल विवाह पर प्रतिबंध लग जाएगा। इसके अलावा विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा और काजियों (विवाह और तलाक रजिस्ट्रार) को सेवा से हटा दिया जाएगा। यानी काजी अब ना तो निकाह पढ़वा सकेंगे और ना ही किसी का तलाक करवा सकेंगे। उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

इस अधिनियम की धारा 8 में प्रावधान था कि अगर वर या वधू या दोनों नाबालिग हैं, तो उनके विवाह के पंजीकरण के लिए उनके वैध अभिभावकों द्वारा आवेदन किया जाएगा। यानी इस प्रक्रिया से उनका विवाह वैध था लेकिन इस कानून के समाप्त हो जाने के बाद यह प्रावधान समाप्त हो गया और राज्य में बाल विवाह पर प्रतिबंध लग गया है।

यह कदम राज्य मंत्रिमंडल द्वारा ब्रिटिश कालीन असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को रद्द करने और उस कानून के तहत सभी विवाह और तलाक की कार्यवाही को विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के दायरे में स्थानांतरित करने के निर्णय के कुछ महीने बाद उठाया गया है।