शरद कटियार
निर्यात तैयारी सूचकांक–2024 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का ओवरऑल चौथे स्थान पर पहुंचना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि उस दीर्घकालिक नीति दृष्टि का प्रमाण है, जिसने एक परंपरागत रूप से उपभोक्ता राज्य माने जाने वाले प्रदेश को निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा तय की है। नीति आयोग द्वारा जारी यह सूचकांक बताता है कि उत्तर प्रदेश अब आर्थिक विकास के राष्ट्रीय विमर्श में हाशिए पर नहीं, बल्कि केंद्र में खड़ा है।
नीति से परिणाम तक का सफर
वर्ष 2022 में जहां उत्तर प्रदेश सातवें स्थान पर था, वहीं दो वर्षों में चौथे पायदान तक पहुंचना यह दर्शाता है कि निर्यात से जुड़ी नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई रणनीति का मूल मंत्र स्पष्ट रहा—निर्यात को केवल व्यापार नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश और सामाजिक संतुलन का माध्यम बनाना।
एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं ने स्थानीय हुनर को वैश्विक बाजार से जोड़ा। पहले जो कारीगर और लघु उद्यम केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित थे, आज वही अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे संवाद कर रहे हैं। यह बदलाव केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और पहचान से भी जुड़ा है।
उत्तर प्रदेश का भू-आबद्ध राज्य होना हमेशा से उसकी एक बड़ी चुनौती रहा है। समुद्री तट के अभाव में निर्यात की लागत और समय दोनों अधिक रहे हैं। ऐसे में तटीय राज्यों के बीच चौथे स्थान पर पहुंचना यह सिद्ध करता है कि बेहतर लॉजिस्टिक्स, सड़क संपर्क, ड्राई पोर्ट और नीतिगत सहयोग से भौगोलिक सीमाओं को भी अवसर में बदला जा सकता है।
यह उपलब्धि इस धारणा को भी तोड़ती है कि केवल बंदरगाहों वाले राज्य ही निर्यात में आगे बढ़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश ने यह दिखाया है कि अगर नीति स्पष्ट हो और प्रशासन सक्रिय, तो भूगोल बाधा नहीं बनता।
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे आयोजनों ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक संवाद की भाषा सिखाई है। यहां केवल उत्पाद प्रदर्शित नहीं हुए, बल्कि विश्वास और ब्रांड उत्तर प्रदेश का निर्माण हुआ। विदेशी खरीदारों के साथ हुए समझौते और निर्यात ऑर्डर इस बात के संकेत हैं कि राज्य अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह बना रहा है।
आर्थिक संतुलन की दिशा में कदम
इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निर्यात वृद्धि केवल कुछ औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं रही। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई जैसे क्षेत्रों में भी निर्यात आधारित गतिविधियों ने नई संभावनाएं पैदा की हैं। यह क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
निर्यात तैयारी सूचकांक–2024 में मिली यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के लिए एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। अब चुनौती है—इस गति को बनाए रखना, उत्पाद गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाना और छोटे निर्यातकों को डिजिटल व वित्तीय रूप से और सशक्त बनाना।
यदि यही नीति निरंतरता बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश केवल देश का सबसे बड़ा राज्य ही नहीं, बल्कि निर्यात और समावेशी आर्थिक विकास का सबसे सशक्त मॉडल भी बनेगा।


