काठमांडू/नई दिल्ली।
नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब देश के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही सख्त कार्रवाई का संकेत दिया। इसी क्रम में नेपाल पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए ‘जेन जी’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों से जुड़े गंभीर आरोपों के तहत की गई है।
बताया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की जान गई थी, जिसके बाद सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे थे। जांच एजेंसियों ने मामले में गैर इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही के आरोप तय किए, जिसके आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से इस मामले की जांच चल रही थी और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद बालेन शाह का यह कदम साफ संकेत देता है कि नई सरकार कानून-व्यवस्था और जवाबदेही के मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। राजनीतिक जानकार इसे “जीरो टॉलरेंस” नीति का शुरुआती संकेत मान रहे हैं, जो आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
हालांकि, केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है। काठमांडू समेत कई इलाकों में हलचल तेज हो गई है और विरोध-प्रदर्शन की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे नेपाल की सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा संदेश देता है कि सत्ता परिवर्तन के साथ जवाबदेही की कार्रवाई किस हद तक जा सकती है।


