लखनऊ। युवाओं (जेन-जी) आंदोलन के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद ने नेपाल में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान बॉर्डर से असफल घुसपैठ के बाद अब ये संगठन नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने की कोशिश कर सकते हैं। इस जानकारी के बाद नेपाल बॉर्डर पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा सख्त कर दी गई है।
एजेंसियों के मुताबिक, दोनों संगठनों के स्लीपर सेल नेपाल में सक्रिय हो रहे हैं। इस्लामी संघ ऑफ नेपाल (आईएसएन) और वर्क फॉर नेपाल जैसे संगठन इनकी मदद कर सकते हैं, जिन्हें कथित तौर पर काठमांडो स्थित पाकिस्तानी दूतावास से समर्थन मिल रहा है। ये संगठन आतंकियों को वित्तीय मदद और सेफ शेल्टर उपलब्ध करा सकते हैं।
आईबी के पूर्व अधिकारी संतोष सिंह का कहना है कि नेपाल में फरवरी से ही आतंकी गतिविधियों की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही थी। 8-9 फरवरी को सुनसरी (नेपाल) में आईएसएन द्वारा आयोजित जलसे में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी संदिग्धों का जमावड़ा हुआ था। अब जेन-जी आंदोलन का लाभ उठाकर बॉर्डर से घुसपैठ कराने की साजिश रची जा रही है।
नेपाली कांग्रेस के पूर्व सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने भी कहा कि भारत-नेपाल की 1751 किलोमीटर खुली सीमा बड़ी चुनौती है। 10 जुलाई 2025 को काठमांडो में आयोजित एनआईआईसीई सेमिनार में नेपाल के तत्कालीन राष्ट्रपति सलाहकार सुनील बहादुर थापा ने भी चेतावनी दी थी कि लश्कर, जैश और अल कायदा भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नेपाल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की 42वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दिलीप कुमार ने बताया कि हालात को देखते हुए बॉर्डर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हर आने-जाने वाले की जांच हो रही है और जंगलों व वन क्षेत्रों में भी कड़ी चौकसी रखी जा रही है।




