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Thursday, April 2, 2026

नाटो पर बढ़ा टकराव: ट्रंप की नाराजगी के बीच विदेश मंत्री रुबियो की पुरानी पोस्ट वायरल

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– गठबंधन पर छिड़ी नई बहस
वाशिंगटन
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका की विदेश नीति को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नाटो से बढ़ती नाराजगी के बीच विदेश मंत्री मार्को रूबियो की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट फिर से सुर्खियों में आ गई है।

दरअसल, रुबियो का यह बयान उस समय का है जब वह फ्लोरिडा से सीनेटर थे। उन्होंने दिसंबर 2023 में कहा था कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति सीनेट की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर नहीं निकल सकता।

यह मुद्दा ऐसे समय पर फिर उभरा है जब ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद वह नाटो में अमेरिका की भूमिका की समीक्षा कर सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

रुबियो ने अपने पुराने बयान में एक ऐसे कानून का समर्थन किया था, जो राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति के बिना इस सैन्य गठबंधन से बाहर निकलने से रोकता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सहयोगी देशों के हित में जरूरी बताया था।

बुधवार को यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लाखों लोगों ने इसे देखा। इसके बाद अमेरिकी राजनीति में नाटो को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता Chuck Schumer ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीनेट कभी भी अमेरिका को नाटो से बाहर करने के पक्ष में मतदान नहीं करेगी।

शूमर ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा कानून के तहत नाटो छोड़ने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जिससे किसी भी राष्ट्रपति के लिए अकेले ऐसा फैसला लेना लगभग असंभव हो जाता है।

हालांकि, हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में रुबियो ने अपने पुराने रुख में बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पहले वह नाटो को अमेरिका की ताकत का महत्वपूर्ण साधन मानते थे, लेकिन अब यह एकतरफा व्यवस्था बनती जा रही है।

रुबियो ने आरोप लगाया कि जब अमेरिका को सैन्य सहयोग की जरूरत होती है, तब कई सहयोगी देश पीछे हट जाते हैं। उन्होंने इसे गठबंधन की कमजोरी बताया।

खबरों के अनुसार, इटली और स्पेन जैसे देशों ने अमेरिकी विमानों को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। वहीं, फ्रांस और स्पेन ने अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर भी पाबंदियां लगाई हैं।

रुबियो ने सवाल उठाया कि जब जरूरत के समय इन ठिकानों का इस्तेमाल ही नहीं किया जा सकता, तो वहां अरबों डॉलर खर्च करने का क्या औचित्य है।

इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी नाटो को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने गठबंधन को ‘कागजी शेर’ बताते हुए सहयोगी देशों पर निशाना साधा और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए।

बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए यूरोपीय देशों के जहाज न भेजने से ट्रंप और ज्यादा नाराज हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ नाटो तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अमेरिका की वैश्विक रणनीति, उसके सहयोगी संबंध और भविष्य की विदेश नीति पर गहरा असर पड़ सकता है।

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