नमामि गंगे और जल जीवन मिशन के तहत घटिया पाइप बिछाने के आरोप, लोग परेशान
लखनऊ। प्रदेश में नमामि गंगे और जल जीवन मिशन (हर घर जल) के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन अब खुद समस्या की जड़ बनती जा रही है। कई जिलों से सामने आ रही शिकायतों के अनुसार, घटिया गुणवत्ता के पाइप, मानक से कम गहराई में बिछाई गई लाइनें और जल्दबाज़ी में किए गए कार्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और गंभीर कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पाइप कुछ ही महीनों में फट गए,जोड़ों से लगातार लीकेज हो रहा है,लीकेज की वजह से पाइप में मिट्टी और गंदा पानी मिल रहा है।
परिणामस्वरूप नल से आने वाला पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। कई गांवों में बदबूदार और पीला पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
पाइपलाइन एक तय गहराई और सुरक्षा परत के साथ डाली जानी चाहिए, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि पाइप ऊपर-ऊपर ही बिछा दिए गए,सड़क कटान के बाद ढंग से मरम्मत नहीं हुई,बरसात में पाइप उखड़कर बाहर आ गए।इससे न सिर्फ पानी की सप्लाई बाधित हुई, बल्कि ग्रामीण सड़कों की हालत भी बद से बदतर हो गई।
जल जीवन मिशन पर सवाल
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन खराब पाइपलाइन के कारण
कई गांवों में पानी कुछ दिन चलकर बंद हो जाता है,बार-बार मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी रहती है,विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल चलता रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि “कनेक्शन दिखाने के लिए दे दिए गए, लेकिन टिकाऊ व्यवस्था नहीं बनाई गई।”
जहां पाइपलाइन लीकेज हो रही है, वहां—गंदा पानी दोबारा नालों और नदियों में पहुंच रहा है,इससे नमामि गंगे के उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक सीवेज और पेयजल पाइपलाइन की गुणवत्ता दुरुस्त नहीं होगी, तब तक गंगा की सफाई के दावे अधूरे ही रहेंगे।
जानकारों का कहना है कि
कई जगह कम कीमत वाले पाइप लगाए गए,गुणवत्ता जांच कागज़ों तक सीमित रही,ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई।यही कारण है कि करोड़ों की परियोजनाएं कुछ महीनों में जवाब दे रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से उठ रही आवाज़ साफ है “अगर पाइप ही खराब हैं तो हर घर जल सिर्फ कागज़ी नारा बनकर रह जाएगा।”लोग मांग कर रहे हैं कि
खराब पाइपलाइन की तकनीकी जांच हो,दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए,और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उत्तर प्रदेश में पेयजल योजनाओं की सबसे बड़ी विफलता अब साफ दिखने लगी है।
हजारों करोड़ खर्च, लेकिन घटिया पाइपलाइन और लापरवाही ने जल संकट को और गहरा कर दिया है।
जब तक गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक नमामि गंगे और जल जीवन मिशन आम जनता की प्यास बुझाने में नाकाम ही साबित होते रहेंगे।

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