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Monday, March 9, 2026

नाबार्ड ने गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग के साथ मिलकर नेशनल क्लाइमेट फिजियोलॉजी इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत

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नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग के साथ मिलकर ग्रामीण भारत में कृषि संबंधी जानकारी और समाधान विकसित करने के लिए नेशनल क्लाइमेट फिजियोलॉजी इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की

६ मार्च २०२६ से इनोवेटर्स के लिए आवेदन खुले हैं, ताकि वे निकट-अवधि के जलवायु जोखिम पूर्वानुमान मॉडल और व्यावहारिक डैशबोर्ड विकसित कर सकें। शीर्ष तीन टीमों को क्रमशः ₹15 लाख, ₹10 लाख और ₹5 लाख के पुरस्कार दिए जाएंगे।

9 मार्च, 2026:* राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने गेट्स फाउंडेशन और डलबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से राष्ट्रीय जलवायु स्टैक इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की घोषणा की है। यह एक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के लिए राष्ट्रीय जलवायु स्टैक की मूलभूत परतों का निर्माण करके भारत की जलवायु लचीलापन संरचना को मजबूत करना है।

इस चैलेंज के लिए आवेदन खुले हैं और इसकी विस्तृत जानकारी https://www.climatestackinnovationchallenge.com/ पर उपलब्ध है।

भारत में जलवायु संबंधी जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। हीटवेव, बाढ़, सूखा और चक्रवात कृषि और ग्रामीण आजीविका पर लगातार बढ़ता दबाव डाल रहे हैं।

हालाँकि जलवायु से संबंधित डेटा की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन निकट अवधि के जोखिमों का पूर्वानुमान अभी भी अलग-अलग डेटा सेट और अलग-थलग मॉडलों में बिखरा हुआ है। मौजूदा जोखिम प्रबंधन प्रणालियाँ अभी भी काफी हद तक प्रतिक्रियात्मक बनी हुई हैं, जो भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई, परस्पर जुड़ी और निर्णय लेने के लिए तैयार जलवायु जानकारी की आवश्यकता को दर्शाती हैं।

इस अवसर पर नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी ने कहा, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर हमने जलवायु डेटा के संग्रह और विश्लेषण में वास्तव में काफी लंबा सफर तय किया है। चुनौती यह है कि ये सभी डेटा सेट अलग-अलग वेबसाइटों पर अलग-थलग पड़े हुए हैं। नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज का उद्देश्य देश के श्रेष्ठ दिमागों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे ऐसा समाधान विकसित करने में हमारी मदद करें जो इन सभी डेटा स्रोतों को सहज रूप से एक साथ जोड़ सके।

इसका बड़ा उद्देश्य एक ऐसा तकनीकी समाधान विकसित करना है जो जलवायु डेटा को वास्तव में लोकतांत्रिक बनाए ऐसे तरीके से, जैसा अब तक नहीं किया गया है। इस प्रकार यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें तकनीक का उपयोग करके अधिक सक्षम और लचीला ग्रामीण भारत बनाने की बात कही गई है।”

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