– अन्नदाता को राहत | लेकिन बढ़ती लागत बनी बड़ी चुनौती।
– सरकार का मास्टर प्लान | 6500 केंद्रों पर होगी सीधी खरीद।
अनुराग तिवारी
प्रदेशिक (लखनऊ) खाद्य एवं रसद विभाग के अंतर्गत लिए गए हालिया कैबिनेट निर्णय ने देश के करोड़ों गेहूँ किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर दी है। वर्ष 2026-27 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹160 प्रति क्विंटल अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों की आय में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
सरकार ने इस बार गेहूँ खरीद की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत एवं व्यापक बनाने की तैयारी की है। 30 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक प्रदेश भर में खरीद अभियान चलाया जाएगा। राज्य के सभी 75 जनपदों में लगभग 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। इस खरीद व्यवस्था में एफसीआई, यूपी मंडी परिषद, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, नैफेड और एनसीसीएफ जैसी कुल 8 प्रमुख एजेंसियों को शामिल किया गया है, ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारू बनी रहे।
इस निर्णय से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। MSP में वृद्धि सीधे तौर पर उनकी फसल का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करेगी, वहीं अधिक क्रय केंद्रों की उपलब्धता से बिचौलियों की भूमिका कम होगी। साथ ही, डिजिटल भुगतान व्यवस्था के माध्यम से किसानों को सीधे उनके खातों में धनराशि प्राप्त होगी, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
हालांकि, इस सकारात्मक तस्वीर के बीच एक महत्वपूर्ण चिंता भी उभरकर सामने आई है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध जैसे हालातों के कारण कृषि लागत में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। उर्वरकों जैसे DAP और यूरिया के दामों में इजाफा हुआ है, बीज और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ी हैं, और डीजल-पेट्रोल के महंगे होने से सिंचाई और परिवहन लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में MSP में हुई ₹160 की बढ़ोतरी किसानों के बढ़ते खर्च के मुकाबले कितनी प्रभावी साबित होगी, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में वृद्धि निश्चित रूप से एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यदि खेती की लागत पर नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों की वास्तविक आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाएगी। सरकार को चाहिए कि वह उर्वरक, बीज और ईंधन पर अतिरिक्त सब्सिडी या राहत देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों को वास्तविक आर्थिक मजबूती मिल सके। समग्र रूप से देखा जाए तो यह फैसला किसानों के लिए एक ओर राहत और अवसर लेकर आया है, तो दूसरी ओर बढ़ती लागत के कारण चिंता भी बनी हुई है। किसानों की सच्ची समृद्धि तभी संभव है जब उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ खेती की लागत भी संतुलित रहे।


