संभल। जनपद संभल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस व्यक्ति को मृत मानकर उसका पोस्टमार्टम कराया गया, अंतिम संस्कार हुआ और तेरहवीं तक की रस्में निभा दी गईं, वही व्यक्ति 18 दिन बाद जीवित वापस लौट आया। इस घटना ने न केवल परिजनों, बल्कि पुलिस और प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है।
मामला बहजोई कोतवाली क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार 24 दिसंबर को क्षेत्र में एक लहूलुहान शव बरामद हुआ था। शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान कर पाना मुश्किल था। मौके पर पहुंचे सुनील नामक व्यक्ति ने शव की पहचान अपने भाई सुशील के रूप में की थी। परिजनों की पहचान के आधार पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दिया गया। इतना ही नहीं, मृतक की तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर ली गई। परिवार और गांव के लोग सुशील की मौत को सच मानकर शोक में डूबे रहे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में तब सनसनी फैल गई, जब 18 दिन बाद सुशील स्वयं अपने घर लौट आया। सुशील को जीवित देखकर परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग स्तब्ध रह गए। हर किसी के मन में एक ही सवाल उठ खड़ा हुआ—जो चिता में जलाया गया, वह आखिर कौन था?
सुशील के जीवित लौटने की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि सुशील किसी कारणवश घर से दूर चला गया था और इस दौरान उसकी कोई जानकारी परिजनों को नहीं मिल सकी। वहीं, 24 दिसंबर को मिले शव की पहचान जल्दबाजी या भ्रमवश गलत कर दी गई।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहन जांच में जुट गई है। शव की वास्तविक पहचान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई—सभी पहलुओं की दोबारा जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला गंभीर लापरवाही की ओर भी इशारा करता है और सच्चाई सामने लाने के लिए हर बिंदु पर जांच की जाएगी।
संभल की यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग हैरानी जता रहे हैं कि आखिर एक जिंदा व्यक्ति को मृत मानकर अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया और प्रशासनिक प्रक्रिया में यह चूक कैसे हुई। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस चौंकाने वाले मामले के पीछे असल सच्चाई क्या है।




