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Sunday, April 12, 2026

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना का उद्देश्य समाज में एकता लाना: मोहन भागवत

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निजामाबाद
मोहन भागवत ने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की स्थापना देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने और हिंदू समाज में फैली फूट को समाप्त करने के उद्देश्य से की थी। उनके अनुसार, हेडगेवार का मानना था कि समाज में एकता की कमी ही भारत की बार-बार गुलामी का प्रमुख कारण रही है।

उन्होंने बताया कि हेडगेवार ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विभिन्न तरीकों से संघर्ष किया, जिसमें राजनीतिक और सशस्त्र विरोध भी शामिल था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें यह अनुभव हुआ कि भारत को गुलाम बनाने वाले केवल अंग्रेज ही नहीं थे, बल्कि आंतरिक कमजोरियां भी इसकी बड़ी वजह थीं।

भागवत ने कहा कि हेडगेवार का मानना था कि जब तक समाज अपनी कमियों को दूर नहीं करेगा, तब तक बाहरी ताकतें उसका फायदा उठाती रहेंगी। इसलिए उन्होंने समाज को संगठित और मजबूत बनाने पर जोर दिया, ताकि देश को बार-बार संघर्ष का सामना न करना पड़े।

यह बयान भागवत ने कंडाकुर्थी गांव में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर दिया। यह गांव हेडगेवार का पैतृक स्थान है। उन्होंने कहा कि यहां विकसित किया गया स्फूर्ति केंद्र लोगों को राष्ट्र सेवा और निस्वार्थ कार्य के लिए प्रेरित करेगा।

अपने संबोधन में भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि RSS की स्थापना किसी के विरोध में नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसी पर आक्रमण करना नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराना और समाज में सकारात्मक मूल्यों का विकास करना था।

भागवत ने हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ दूसरों के साथ मिलकर रहना, अपने मार्ग पर चलना और सभी का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि संघ की प्रार्थना और शाखाओं में इसी प्रकार के संस्कार विकसित किए जाते हैं, जिससे समाज में एकता, निडरता और सेवा की भावना मजबूत होती है।

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